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छीना जा रहा है खेत

 लखनऊ , अगस्त । आगरा में किसानो से प्रशासन और जेपी समूह के अफसर किसानो से न सिर्फ जबरन करार करा रहे है बल्कि किसानो की खेती की जमीन पर कब्ज़ा भी कर रहे है । यह जानकारी अलीगढ़, मथुरा, हाथरस व आगरा के किसान आंदोलन  का सघन विश्लेषण करने गई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट में दी गई है ।   भाकपा के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी जांच रिपोर्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी को आज यहां सौंप दी है।पार्टी इस मुद्दे पर ३० अगस्त को पूरे प्रदेश में आंदोलन करने जा रही है जिसे  उत्तर प्रदेश किसान सभा, किसान मंच और महाराणा संग्राम सिंह किसान कल्याण समिति (दादरी) ने भी समर्थन दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया  है कि टप्पल में 14 अगस्त को अलीगढ़ जिला प्रशासन ने आग भड़काने के उद्देश्य से ही शांतिपूर्ण धरने पर नेताओं की धर-पकड़ की और मामला तूल पकड़ गया। अलीगढ़ से लेकर आगरा तक जेपी ग्रुप के अधिकारियों और प्रशासनिक मशीनरी ने प्रशासनिक आतंक के जरिए किसानों से कम कीमतों में करार कराए। इतना ही नहीं तमाम करार फर्जी कराए गए हैं। तमाम ऐसे किसानों की जमीनों पर भी कब्जा कर लिया गया है जिन्होंने करार करने से साफ मना कर दिया। इस कुकृत्य के लिए क्षेत्र के पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों को जेपी ग्रुप ने बड़ी रिश्वतें दीं और दलालों को भी मालामाल कर दिया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रारम्भ में किसान ज्यादा मुआवजे के लालच में फंस गये थे लेकिन जल्दी ही समझ गये कि मुआवजे में मिली धनराशि वे खर्च कर बैठेंगे और रोजी-रोटी के लिए सड़क पर आ जायेंगे। क्षेत्र के खेतिहर मजदूरों एवं नौजवानों में भी खेती और भूमि न रहने पर भविष्य के अंधकारमय होने की चेतना जगी और आन्दोलन ने जोर पकड़ लिया। जेपी समूह के लोग और राज्य सरकार इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए  और आन्दोलनकारियों पर लाठी गोली का प्रयोग किया जिसमें चार किसानों की जानें चली गयीं।
जांच रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि किसानों का अपार बहुमत आज जमीनों को देना नहीं चाहता लेकिन राजनैतिक दलों के नेता किसानों को गुमराह कर रहे हैं। वे भूमि बचाने की बात न कर ज्यादा मुआवजा दिलाने की बात कर रहे हैं। इसका कारण साफ है। ज्यों-ज्यों किसान आन्दोलन आगे बढ़ेगा, इन दलों की भूमि और किसानों के सम्बंध में कारगुजारियां उजागर होती चली जायेंगी। कांग्रेस ने विशेष आर्थिक परिक्षेत्र एसईजेड के लिए देश भर में लगभग पचास हेक्टेयर जमीनें अधिगृहीत कराईं, भाजपा जिसकी नीतियां भी कांग्रेस के समान हैं और जिसकी उत्तर प्रदेश सरकार ने ही एक्सप्रेस-वे करार किया अथवा 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून में दोनों दल केन्द्र में सत्ता में रहने के बावजूद बदलाव नहीं कर पाये। सपा जिसने दादरी में किसानों की जमीन का बड़ा रकबा अंबानी  को दे डाला तथा बसपा जो अपार मात्रा में जमीनें किसानों से छीन कर उद्योगपतियों को सौंपने में जुटी है, इन सभी दलों की योजना किसान आन्दोलन को रास्ते से भटकाने की है। इसीलिए इन दलों का शीर्ष नेतृत्व आज अचानक किसानों का खैरख्वाह बन गया है और आन्दोलनकारी किसानों को तरह-तरह से लुभाया जा रहा है। केवल भाकपा ही है जो प्रदेश में निस्वार्थ भाव से लगातार किसान आन्दोलन के साथ है।
पार्टी के सचिव डाक्टर गिरीश ने इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया । उन्होंने रपट में आगे कहा  है कि सरकारों को केवल सड़क, रेल, अस्पताल, स्कूल एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के लिए ही बाजार भाव पर जमीनों का अधिग्रहण करना चाहिए। निजी एवं व्यवसायिक कम्पनियों का औजार उसे नहीं बनना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह पुरानी सड़कों का विस्तार कर नई बनाने से बचे। किसानों को भी आगाह किया गया है कि अधिक मुआवजा लेकर जमीनें देकर वे बरवाद हो जायेंगे और उनके साथ ग्रामीणों की बेरोजगारी, खाद्यान्नों का संकट, विस्थापन और पर्यावरण के विनाश का रास्ता खुलेगा। जांच के बाद भाकपा ने प्रदेश में छह  सूत्रीय मांगपत्र पर किसानों के हित में लगातार आन्दोलन की रूपरेखा तैयार की है। मांग हैं -
1प्रदेश भर में विकास के नाम पर चल रही उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण की तमाम कार्यवाहियों को रद्द किया जाये, विकास योजनायें गैर उपजाऊ जमीनों पर चलें।
2भूमि अधिग्रहण कानून 1894 में किसान हितैषी बदलाव का संशोधन तत्काल संसद में पारित किया जाये।
3दादरी आन्दोलन से लेकर आज तक किसानों पर लगाये गये तमाम मुकदमें वापस लिये जायें।
4गिरतार किसानों को रिहा किया जाये।
5आजादी के बाद से आज तक तमाम अधिगृहीत जिन जमीनों का मुआवजा आज तक नहीं मिला, उसके रेट समसामयिक करने और उन्हें जल्द भुगतान कराने को एक राज्य स्तरीय मुआवजा प्राधिकरण बनाया जाये।
6किसानों से अधिगृहीत जमीनों पर लगे उद्योग, जो बन्द हो चुके हैं, उनकी जमीनों को उद्योगपतियों से वापस लेकर या तो किसानों को लौटाया जाये अथवा नई विकास योजनाओं को आबंटित किया जाये।
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने उपरोक्त 6 मांगों पर 30 अगस्त से आन्दोलन छेड़ने का निर्णय लिया है। 30 अगस्त समूचे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर धरने प्रदर्शन किये जायेंगे और उपर्युक्त 6 सूत्रीय मांगपत्र राष्ट्रपति एंव राज्यपाल के नाम जिलाधिकारियों को सौंपा जायेगा।
भाकपा के इस जांच दल में भाकपा राज्य कार्यकारिणी के चार सदस्य तथा कई राज्य कौंसिल सदस्य भी शामिल थे।
 
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