‘यह मुंबई किसी की जागीर नहीं है। हिंदुस्तान के सभी लोगों का मुंबई पर बराबर का अधिकार है।’ सचिन, तेरी इन बातों ने मराठी मन को चीर डाला है। इसकी क्या आवश्यकता थी? बाकी के सभी लोग मुंबई को निगलने की तैयारी में हैं और तुझे यह बयान देकर उन्हें बढ़ावा देने की क्या जरूरत थी?
सचिन को लिखे बाल ठाकरे के पत्र का हिंदी अनुवाद .
चिरंजीव सचिन को,
खेल के मैदान में तू बादशाह जैसा खेला। तुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोहरत मिली। भरपूर पैसे भी मिले। तेरे लखपति नहीं, करोड़पति नहीं बल्कि अरबपति होने पर भी किसी को कोई आपत्ति नहीं है। उल्टा अभिमान महसूस होता है। खेल के मैदान में तू एक तेज की तरह चमक रहा है। लेकिन प्रेस वार्ता में तूने कहा, ‘मुझे मराठी और महाराष्ट्र का होने पर गर्व है, लेकिन मैं सबसे पहले हिंदुस्तानी हूं।’ तेरे इस स्ट्रेट ड्राइव जैसे बयान से मराठी मन को दुख पहुंचा है। क्योंकि तू अपने खेल मैदान को छोड़कर राजनीति के मैदान में कूदा और बोला, ‘यह मुंबई किसी की जागीर नहीं है। हिंदुस्तान के सभी लोगों का मुंबई पर बराबर का अधिकार है।’ सचिन, तेरी इन बातों ने मराठी मन को चीर डाला है। इसकी क्या आवश्यकता थी? बाकी के सभी लोग मुंबई को निगलने की तैयारी में हैं और तुझे यह बयान देकर उन्हें बढ़ावा देने की क्या जरूरत थी?
तूने मराठी होने का अभिमान की बात करते हुए मुंबई के हक को लेकर ‘चिकी सिंगल’ क्यों निकाला? यहीं पर तू मराठी मन की पिच पर ‘रन आउट’ हो गया। हमें यह समझ में नहीं आता कि ऐसे ख्याल मराठी मन को क्यों आते हैं? मराठी लोगों ने मुंबई कैसे हासिल की यह तुम्हें नहीं पता होगा, क्योंकि तब तुम्हारा जन्म भी नहीं हुआ था। मोरारजी देसाई ने तो मुंबई में आतंक मचा रखा था। इस आतंक में मराठी लोगों के खून के छींटे सड़कों पर बिखर रहे थे। 105 मराठी लोगों ने मुंबई के लिए अपना बलिदान दिया। यह मुंबई किसी परप्रांतीय के बाप की हो ही नहीं सकती है। और यदि किसी ने मुंबई को महाराष्ट्र से तोड़ने का प्रयत्न भी किया तो मराठी माणूष उसे सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेगा।
देश के बारे में अभिमान सभी को है और होना भी चाहिए, तुम जैसे खिलाड़ियों को देश के लिए खेलना भी चाहिए। लेकिन आज-कल तो प्रत्येक क्रिकेटर खुद के लिए खेलता है, उसका क्या? देश के ऊपर कई संकट आए हैं और महाराष्ट्र के बारे में कहना ही क्या। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बिजली की कमी के कारण जनता अंधेरे में छटपटा रही है। साग-सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। महंगाई के भस्मासुर ने हाहाकार मचा रखा है। अनाज का अकाल है। मुंबई में झुग्गी-झोपड़ियों के साथ-साथ बीमारी भी बढ़ रही है। उसमें बांग्लादेशी मुसलमान भी जीवाणु की तरह फैलते जा रहे हैं। देश के बारे में सोचने वाले तेरे जैसे क्रिकेटर ने क्या कभी इस विषय पर भी विचार किया है?
मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होगी, लेकिन यह मत भूल की मुंबई सबसे पहले महाराष्ट्र की राजधानी है। सचिन, तेरे बैट से तू जब चौका-छक्का मारता है, तब लोग तेरी प्रशंसा करते हैं। लेकिन जब तू तेरी जीभ को बैट बनाकर मराठी माणूष के दिल को चीरने वाले चौके-छक्के मारेगा, तो यह मराठी माणूष कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। इसलिए क्रिकेट के मैदान से जो कमाया है, वह तू राजनीति के मैदान में मत गंवा। तुझे यह प्रेम भरी चेतावनी तेरे हित के लिए दे रहा हूं।
बाल ठाकरे
शिवसेना प्रमुख