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संकट में उतराखंड के गुलदार

 राजकुमार शर्मा 

देहरादून  मार्च .देवभूमि के नाम से विख्यात उतराखंड  राज्य के गठन के बाद से इस सूबे के वन एंव वन्यजीवों पर लगातार संकट बढ़ रहा  है.इस हिमालयी प्रदेश  में तीन पखवारें में दो दर्जन गुलदारों की मौत ने यह सिद्ध कर दिया है कि सूबे में वन्यजीवों पर आफत का दौर जारी है.पुरा राज्य इन दिनों भू-माफिआओं एंव वन्यजीव के शिकारी तस्करों के लिए स्वर्ग बनता जा रहा है.चीन के सीमा पर सटा राज्य होने के कारण टाइगर के शिकारी भी इस राज्य के रिजर्ब फारेस्ट में भी घात लगा कर शिकार करने से नही चुकते.दिल्ली सहित अन्य भीड़ भाड़ वाले षहरों से राज्य की दूरी कम होने एंव मनोहारी हिमालयी राज्य होने के कारण लोग इस राज्य में बड़ी संख्या में घर बनाना चाहते है. इस लिए इस राज्य में जमीन के भाव आसमान छू रहे है जिसके चलते अनेक देष के भू-माफिया यहा के वन एंव वन्य जीवों पर बुरी नजर रखते है जिसके पीछे उनकी मंशा यह है कि पहले यहा के षहरी इलाके से सटे वनों से वन्य जीवों को खत्म किया जाए  फिर वनों को को हथियाया जाए .इसी के चलते इस राज्य में नेताओं और वन कर्मीयों की मिलीभगत से वन्यजीवों पर संकट मंडरा रहा है.
उत्तराखण्ड में इन दिनों वन्यजीव गुलदार पर भारी आफत आयी हुयी है. जिसके चलते 45 दिनों में 24 गुलदार शिकारियों के हाथों मरे जा चुके  हैं.पिछले  वर्ष  व  2009 में प्रदेश में लगभग 72 गुलदारों की मौत हुई थी ..इस वर्ष के जनवरी माह में ही 13 गुलदार शिकारियों की  भेट चढ़ गये.फरवरी में भी इनकी मौत का सिलसिला  नही रूका और आठ गुलदार 16 फरवरी तक अपनी जान गवा चुके है.उत्तराखंण्ड में कुछ रसूखदार लोगों के इसारे पर वन एंव वन्यजीवों पर आफत खड़ी की जा रही है.5जनवरी 2010 से 16 फरवरी 2010 तक इनके मौत के जो आकड़े मिले है वे चौंकाने वाले  है.5जनवरी को दून ऋषिकेष मार्ग पर दो गुलदारों का शव  मिला,6 जनवरी को दो गुलदार मृत पाए गए .इसी दिन ऋषिकेष में गुलदारों की बड़ी मात्रा में खाल बरामद की गयी.12जनवरी को काशीपुर में एक गुलदार मृत पाया गया.15जनवरी को एक गुलदार हरिद्वार में मिला .21जनवरी को रूद्रपुर में एक मादा गुलदार का शव  मिला,22जनवरी को देहरादून में एक नरभक्षी गुलदार को मार गिराया गया.24जनवरी को कालसी चकराता में एक गुलदार का शव  मिला,27जनवरी को रामनगर में एक गुलदार मृत पाया गया.29जनवरी को अल्मोडा में एक गुलदार का शव  पाया गया,30जनवरी को मालसी डियर पार्क प्रसाशन  की लापरवाही के चलते एक बाल गुलदार ने दम तोड़ दिया.12फरवरी को 2गुलदारों को शिकारियों  ने उनके गले में फंदा डालकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.14फरवरी को लैंसडाउन   में एक गुलदार का शव  मिला,15फरवरी को गुलदारों की खाल का जखीरा पुलिस ने बरामद किया,16फरवरी को कालसी वन प्रभाग के डूगावाला गांव में शिकारीयों ने एक गुलदार को अपना शिकार बनाया,
सूबे में अभी टाइगरों के मौत का सिलसिला अभी थमा भी नही था कि गुलदारों की मौत ने सरकार के कामकाज के तौर तरीकों पर सवाल खड़ा कर दिया  है.सरकार इस मामले में केंद्रीय वन राज्यमंत्री जयराम रमेश के खत का जबाब  दे भी नही पायी थी कि गुलदारों की मौत ने सरकार को कठघरें में खड़ा कर दिया . सूबे के प्रमुख वन संरक्षक केएल आर्या भी सूबे में गुलदारों पर आए संकट को तो मानते है पर उनकी लाचारी भी सामने आ जाती है .
 
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