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दम तोड़ता अरब सागर का पानी

 सविता वर्मा 

दिन भर घुमने के बाद सिल्वासा के रास रिसार्ट में लौटे तो राहत मिली । गर्मी और समुंद्र के किनारे दूर तक चलने की वजह से थक चुके थे।फिर वापी के बाज़ार में सड़क जाम में फंसे।पर सिल्वासा के हरे भरे इस रिसार्ट में कुछ सुकून मिला ,बगल में ही दमन गंगा का पथरीला तट है जिसके आगे दूर तक जाता जंगल।यह इलाका आज भी आदिवासी गाँव की झलक दिखता है पर वापी पहुँचते ही मन खट्टा हो जाता है ।  सुबह की शुरुआत दमन के जम्पोर बीच से हुई थी । पर कैशुरिना के जंगलों के किनारे समुंद्र तट पर पहुँचते ही हम सब हैरान रह गए। पहली बार समुंद्र का पानी काला नज़र आया। करीब पांच सौ साल पुराने  पुर्तगाली उपनिवेश दमन के समुद्री तट से टकराने वाला अरब सागर का पानी अब काला हो चुका है  ।  उत्तर भारत की नदियाँ तो पहले से ही प्रदूषित हो चुकी थी पहली बार सागर के दम तोड़ते पानी को देखा । यह एक बड़ा संकट है ।  अगर जल्द ठोस पहल नहीं हुई तो इसका दायरा जो फिलहाल बीस वर्ग किलोमीटर तक फैला है वह और आगे बढ़ जाएगा  ।  जिसकी कीमत यहाँ के मछुवारे से लेकर आम लोगो को चुकाना भी पड़ रहा है  ।  दमन प्रशासन के लिए भी यह बड़ी चुनौती है क्योकि  उसकी अर्थव्यवस्था जिस पर्यटन उद्योग पर टिकी है उस पर देर सबेर असर पड़ना तय है  ।  
करीब डेढ़ दशक बाद फिर दमन के खुबसूरत समुद्री तटों पर कुछ समय गुजरने का मौका मिला । अरब सागर का पानी  न तो हरा था और न ही नीला बल्कि काला था । साथ ही काली झाग भी जगह जगह बहती नज़र आ रही थी   । साथ थे नलिन टंडेल जिनका पुतैनी काम मछली पकड़ने का रहा है ।काले पानी का रहस्य उजागर करते हुए उन्होंने कहा ,"यह दमन गंगा के जरिए आए वापी के रसायन उद्योगों के जहरीले कचरे का कमाल है  । इसके चलते करीब बीस वर्ग किलोमीटर समुद्र का पानी जहरीला हो चुका है  । इस पानी में मछलियाँ  भी नहीं बची है  । अब मछलियाँ पकड़ने के लिए गहरे समुद्र में जाना पड़ता है जो छोटे मछुवारों के बस का नहीं है  । वाही जाते है जिनके पास ट्रालर या बड़ी नावें हो  । इसी वजह से यहाँ के आम मछुवारे बदहाली के शिकार है ।"
पर यह सब सिर्फ मछुवारों तक सीमित नहीं है । गुजरात की उद्योग नगरी वापी ने विकास  की अंधी दौड़ के घातक नतीजों को भी उजागर कर दिया है   । एक तरफ दादरा नागर हवेली का पर्यावरण चौपट हो रहा है तो दूसरी तरफ पुर्तगाली  संस्कृति को संजोए दमन -दीव का मुख्यालय प्रदूषित होता जा रहा है  । नानी दमन से मोती  दमन जाने वाले रास्ते पर  नया पुल दमन गंगा नदी पर बना है । पुल से नीचे देखें तो पश्चिम की गंगा गटर के पानी जैसी काली नज़र आती है । यही पानी करीब दो सौ मीटर दूर अरब सागर में मिल जाता है । जिसके बाद वापी के उद्योगों का जहरीला कचरा नानी दमन ,देविका बीच और जम्पोर बीच तक फ़ैल जाता है  । एक दिन बाद ही देविका बीच पर नासिक से आई देवयानी मिली जो यहाँ हनीमून मनाने आई थी और बीच रिसार्ट पर ही रुकी थी  । वे अपने पति अजय को उलाहना दे रही थी कि कैसे बीच रिसार्ट पर ले आए जहाँ के पानी में पैर रखना भी घातक हो सकता है  । इस बारे में रिसार्ट के बैरा ने उन्हें आगाह कर दिया था  । देविका बीच काफी लम्बा और पथरीला है । पहले लोग इन पत्थरों पर बैठ कर अरब सागर की लहरों का आनंद लेते थे  । पर अब इन पत्थरों पर भी जहरीले कचरे के चलते काई और गन्दगी दिखाई पड़ती है ,जिससे फिसलने का भी खतरा है ।
दमन गंगा का प्रदूषित पानी किस तरह यहाँ के पर्यटन उद्योग को प्रभावित करने लगा है ।यदि प्रशासन समय पर नहीं चेता तो करोड़ों रुपये का पर्यटन उद्योग भी नहीं बचेगा ।पिछले दो दशक के दौरान कई समुद्री तट पर जाने और समुद्री यात्रा करने का मौका मिला पर कही भी समुद्र का पानी काला नहीं मिला  ।काला पानी के नाम से मशहूर अंडमान निकोबार का पानी भी काला नहीं है ।गोवा के किसी भी समुद्री तट पर जाएँ सागर का नीला पानी अपनी ओर खींचता नज़र आएगा  ।यही हाल तिरुअनंतपुरम के कोवलम बीच से लेकर पूरी के समुद्र तट का है ।खास बात यह है कि गोवा ,दमन ओर दीव तीनो ही पुर्तगालियों के अधीन रहे ओर इनकी संस्कृति भी साझा है   ।गोवा ओर दमन -दीव जहा पुर्तगाली राज १५३१ से शुरू हुआ ओर १९६१ तक चला ।गोवा बाद में अलग राज्य बना तो दमन ओर दीव केंद्र शाषित राज्य ही रहा । पर आज पर्यावरण का बड़ा खतरा दमन पर ही मंडरा रहा है ।यह भी रोचक है की दमन से गोवा ओर दीव दोनों ही सात सौ किलोमीटर से ज्यादा दूर है  । दीव जाना हो या गोवा हवाई यात्रा के लिए मुंबई ही जाना पड़ेगा । दमन मुंबई -अमदाबाद राजमार्ग ओर रेल लिंक के बीच वापी से जुड़ा है  ।
 मुंबई से १९३ किलोमीटर की दूरी पर बसा दमन गुजरात के सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह है।सूरत से लेकर वलसाड़ बगल में है ओर तेज रफ़्तार ट्रेने भी है  ।पर अब यहाँ के समुद्री तट पर बढ़ते प्रदूषण के चलते होटल उद्योग भी चिंतित हो गया है  ।सीडाडे दमन के मैनेजर हितेश टंडेल ने कहा -मुंबई से आने वाले सैलानी अरब सागर के पानी को देख काफी निराश हो रहे है। पर्यटक यहाँ के समुद्र तट पर पानी में बैठना चाहते है पर पानी देख कर वे वापस लौट जाते है  ।
दमन में अरब सागर में तीन नदियाँ मिलती है ।दमन गंगा नानी दमन में अरब सागर में मिलती है तो उसके उत्तर में कोलाक ओर  दक्षिण में कलाई नदी सागर में गिरती  है ।पर वापी के उद्योगों का ज्यादातर जहरीला कचरा दमन गंगा ही अरब सागर पहुंचाती  है ।दमन प्रशासन के चीफ इंजीनियर आरएन सिंह ने कहा ,"वापी के उद्योगों खासकर रसायन उद्योगों का जहरीला कचरा दमन गंगा के जरिए अरब सागर में जाता है क्योकि ज्यदातर उद्योग दमन गंगा के तट पर है  । बाकि दोनों नदियों से करीब बीस फीसदी कचरा ही समुद्र में जाता है । यह दमन के लिए बड़ी समस्या है जिसका असर अब समुद्र के पानी के साथ भूजल पर पड़ने लगा है । दमन गंगा में तो मछलियाँ ख़तम हो चुकी है । इसके बाद समुद्र में भी किनारे से कुछ किलोमीटर दूर तक मछली नहीं मिलती है ।"
एक निजी बैंक में काम करने वाले सुनील सिंह के मुताबिक दमन के भूजल पर जहरीले कचरे का असर पड़ता जा रहा है ।वापी से दमन के बीच की आबादी इससे प्रभावित होती जा रही है ।कई तरह की बीमारियाँ होने लगी है ,कैंसर से लेकर अस्थमा ओर त्वचा के रोग बढ़ रहे है। वापी को तो विश्व के दस सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है ।अब यह हाल है कि ज्यादातर मध्यवर्गीय परिवारों में मिनरल वाटर की बल्क सप्लाई की जा रही है  ।पर आम आदमी उसी भूजल को पीने के लिए मजबूर है  ।इसी पर उसकी खेती भी निर्भर है। 2000-01 की कृषि जनगणना के अनुसार दमन और दीव में कुल सिंचित क्षेत्र 393.93 हेक्‍टेयर है, जबकि असिंचित क्षेत्र 3304.73 हेक्‍टेयर है। यहां की महत्‍वपूर्ण फसलें धान, रागी बाजरा, ज्‍वार, मूंगफली दालें, सेम, गेहूं, चीकू, सपोता, आम, केला, नारियल और गन्‍ना हैं। दमन में कुल भौगोलिक इलाके का साढ़े पांच फीसदी क्षेत्र वन क्षेत्र है । जंगल के नाम पर अरब सागर के किनारे लगे कैशुरिना के जंगल दिखाई पड़ते है ।जंगल कम होने की वजह से प्रदूषण का खतरा भी ज्यादा है ।
 
फिर बच जाएगी दमन गंगा 
वापी के उद्योगों के जहरीले कचरे से प्रदूषित दमन गंगा को बचाने की कोशिश भी शुरू हो चुकी है । दमन और दादरा नगर हवेली के मुख्य वन संरक्षक कमल दत्ता जो इन दोनों जगहों की प्रदूषण संबंधित कमेटी के भी मुखिया है उनसे बातचीत के अंश - 
दमन गंगा और अरब सागर के प्रदूषित होगये पानी को साफ़ करने की कोई योजना बनाई गई है ?
पिछले साल केंद्र की पहल पर एक ठोस योजना बनी है जिसके लागु हो जाने के बाद दमन गंगा और अरब सागर के किनारे का पानी साफ़ हो जाएगा ।
यह योजना क्या है ?
इस योजना के तहत वापी के उद्योगों का कचरा दमन गंगा में डालने की बजाय सीधे बड़े पाइप से ले जाकर समुद्र में इतनी दूर छोड़ा जाएगा कि उसका असर किसी पर न पड़े । 
पर इससे तो गहरे समुद्र की मछलियों पर असर पड़ेगा ?
नहीं ,इस काम के लिए गोवा के राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है जो कचरा इस तकनीक और प्रवाह से बहाएंगे कि समुद्री जीवन पर भी असर न पड़े ।
दमन के तट पर अरब सागर का पानी काला पड़ गया है ,मछलियाँ मर रही है इसके लिए कौन जिम्मेदार है ?
इसमे दमन की कोई भूमिका नहीं है । गुजरात के कई औद्योगिक शहर अपना कचरा नदियों के जरिए समुद्र में बहा रहे है । वापी से लेकर अंकलेश्वर तक उदहारण है । दमन के तट पर वापी के उद्योगों का कचरा काफी समय से बहाया जा रहा है इसी वजह से मछलियाँ भी मर जाती है । इस बारे में तो पूरी रिपोर्ट बनाई गई है ।
 
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