जगदलपुर ,मार्च। महिला दिवस के दिन बस्तर की एक खबर महिलाओं की समाज में स्थिती की असलियत बताने वाली है । आदिवासी बहुल बस्तर का बघियाकरीन इकलौता मंदिर है जहां बालिकाओं और महिलाओं को देवी दर्शन की अनुमति नहीं है।यह बात अलग है कि आदिवासी समाज काफी खुला समाज माना जाता है और महिला पुरुष की समानता दिखाई पड़ती है ।
घने जंगल में स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ प्रत्येक रविवार को जुटने लगी है। जहां मन्नतें पूरी होने पर लोग बकरा, भेड़, मुर्गा, बतख, कबूतर की बलि देते हैं । पुजारी बंशीधर ने बताया कि बाप-दादा इस मंदिर में पूजा करते रहे। मैं बचपन से यहां पूजा करता आ रहा हूं। बालिकाओं और महिलाओं को बघियाकरीन मंदिर में पूजा करना मना है। यहां का प्रसाद भी महिलाएं खा नहीं सकती ।
बलि के बाद इसी जंगल क्षेत्र में खाना पकाकर भोजन करना होता है। घर ले जाकर भोजन नहीं बना सकते। धीरे-धीरे यह धार्मिक स्थल मेला का रुप लेता जा रहा है। करपावंड के लोग मंदिर स्थल में पेयजल और शेड के लिए विधायक-सांसद से पहल कर हैंडपंप और विश्राम कुटीर बना लिए हैं। पुजारी बंशीधर ने बताया कि मान्यता के अनुसार जंगल में प्रत्यक्ष देवी है। मन्नत पूरी होने पर लोग दोस्तों और परिजनों के साथ आते हैं। लेकिन परिवार के महिला सदस्यों को न लाया जाता है न ही उन्हें प्रसाद खिलाया जाता है। रविवार को बघियाकरीन में ग्रामीण और जगदलपुर शहर से सैकड़ों लोग पहुंचे थे। प्रसाद चढ़ाकर जंगल में खाना पकाकर लोगों ने भोजन किया।पर महिलाओं के बिना ।