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मोदी बनाम अखिलेश होता चुनाव

धीरेंद्र  श्रीवास्तव

लखनऊ। दो चरणों के मतदान के बाद यह  स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में सीधे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच हो रहा है। दो चार जगहों नहीं, सभी विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों के प्रत्याशी प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं तो समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी मुख्यमंत्री अखिलेश के नाम पर। इसलिए इस जंग में हार और जीत किसी प्रत्याशी की नहीं, पीएम और सीएम की ही होनी है। 
इस चुनाव में एक तीसरा पक्ष है, बहुजन समाज पार्टी का। कमोवेश सभी क्षेत्रों में टिकट बिक्री का आरोप झेल रही यह पार्टी पुराने झंझावातों से बाहर निकल आयी है। सूबे की हर समस्या का इलाज इस पार्टी ने दिया है- बहन जी को आने दो। अपने पुराने सिपहसलारों के बल पर यह पार्टी पीएम और सीएम दोनों को एक साथ हराने का सपना देख रही है।वे कई क्षेत्रो में मजबूती से अपना दमखम दिखा रही हैं .
दावा चाहे जो करें, दो चरणों के सच से भाजपा भी अवगत है और सपा-कांग्रेस गठबन्धन भी। इसलिए इस चुनाव को लेकर दोनों खेमों में करो या मरो वाली स्थिति व्याप्त है। देश के सबसे बड़े प्रदेश में हो रहे इस चुनावी दंगल में विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हो, इसके लिए हांफ रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, भारत सरकार के मंत्री राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, श्रीमती उमा भारती, श्रीमती मेनका गांधी, सन्तोष गंगवार, मनोज सिन्हा और व्यापम घोटाले को राष्ट्रीय स्तर  गन्ध बिखेर रहे मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदि, आदि। दूसरी तरफ से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जीत के लिए मोर्चा सम्भाले हुए हैं कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव अशोक गलहौत, प्रदेश अध्यक्ष राजब्बर और सपा की सांसद श्रीमती डिम्पल यादव आदि। 
देश के सबसे बड़े प्रदेश के लिए हो रहे इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की ओर से अखिलेश यादव 2017 के लिए मुख्यमंत्री के घोषित प्रत्याशी हैं। इसलिए पहले से तय था कि कांग्रेस औऱ समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम पर वोट मांगेंगे। अभी तक हुए दो चरणों में मांगे  भी हैं। और, आगे के पांच चरणों में भी मांगेंगे। इसके लिए अधिक से अधिक जगहों पर मुख्यमंत्री पहुंचने का प्रयास कर रहे है और लोगों से अपील कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश को देश का उत्तम प्रदेश बनाने के लिए हमें एक बार अवसर दीजिये। 
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यहाँ तक बोल रहे हैं कि अगर हमारे प्रत्याशी से कोई गलती हुई है तो उसकी सजा मुझे मत दीजियेगा। स्टार प्रचारक के तौर पर कमोबेस इसी भाषा में  उनका साथ दे रहीं की उनकी जीवन संगनी सांसद डिम्प्पल यादव। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को छोड़िए, 27 साल - यूपी बेहाल का नारा लगाने वाले कांग्रेसी नेताओं और राहुल गांधी को भी- काम बोलता है - का अखिलेशी मंत्र समझ में आ गया है।
परिणाम है कि 2012 में समाजवादी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र फाड़ देने वाले राहुल गांधी अखिलेश यादव के साथ मंच साझा कर रहे हैं। अन्य नेता भी सभाओं में अखिलेश यादव के काम की तारीफ कर रहे हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गलहौत पीसीसी कार्यालय में 
एक सरल और सहज उपलब्ध कार्यकर्ता की तरह कोआर्डिनेशन का मोर्चा संभाल लिए हैं। गठबंधन के प्रत्याशी तो चीख चीख कर बोल रहे हैं - सीएम अखिलेश, सीएम अखिलेश। इसलिए लगने लगा है कि विधान चुनाव में कांग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी जीतेंगे तो अखिलेश यादव जीतेंगे और हारेंगे तो अखिलेश यादव। 
इस चुनाव को - अभी नहीं तो कभी नहीं - के तर्ज पर लड़ रही भारतीय जनता पार्टी में चुनाव के एलान से पहले सूबे मुख्यमंत्री के लिए कई नाम चले। मसलन, मनोज सिन्हा, स्मृति ईरानी, दिनेश शर्मा से लेकर भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक, लेकिन तय हुआ कि सीएम कस फैसला चुनाव बाद। फ़िलहाल विधानसभा का चुनाव भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही लड़ा जायेगा। और, लड़ा भी जा रहा है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हों या भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह या कोई अन्य मंत्री या दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री सभी इस चुनाव में नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। इसे जीतने के लिए भाजप  के राष्ट्रीय अध्यक्ष भोर के चार बजे तक बैठक कर रहे हैं। गैरों को तरजीह दिए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं मो लालीपाप दिया जा रहा है। खुद  प्रधानमंत्री दिन रात एक किये हुए हैं। मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए वह यहां तक बोल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में दोपहर में भी महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। 
अखिलेश यादव को पराजित करने का माहौल बनाने के  चक्कर में यह बोलते समय उन्हें यह भी याद नहीं रहा कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। देश के किसी भी हिस्से में यह शर्मनाक स्थिति उनके लिए भी ठीक नहीं है। इसे लेकर लोग उनसे भी सवाल करेंगे कि देश के सबसे बड़े राज्य में अगर यह शर्मनाक स्थिति थी या है तो भारत सरकार ने इसे संज्ञान में क्यों नहीं लिया?  देश का गृहमंत्रालय क्या कर रहा था? राज्यपाल क्या रहे थे? बहरहाल यह चुनाव है। इसमें -एवरी थिंग इज राइट इन लव एंड वार- का फार्मूला चलता है। प्रधानमंत्री भी चला रहे हैं। इसके जवाब में  सपा और कांग्रेस गठबंधन भी पद और गरिमा का सवाल उठा रहा है लेकिन वुह कहने से बाज नहीं आ रहा है कि प्रधानमंत्री और उनके अन्य मंत्री पर्यटन पर निकले हैं। रैलियों और सभाओं इस तरह के जुमलों की वजह से नीचे तक सन्देश है कि इस बार का चुनावी दंगल सीधे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच है।
बहुजन समाज पार्टी और उसकी प्रमुख सुश्री मायावती इस चुनाव में एक साथ दोनों पर हमलावर हैं। पार्टी ने इसके लिए अपना तौर तरीके भी बदल है। मिडिया ही, सोशल मीडिया में भी स्पा भाजपा के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है। इस अभियान में सुश्री मायावती के साथ जूझ रहे हैं पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश मिश्र और नसीमुद्दीन। बोल रहे हैं कि एक साथ दोनों को हरा रही है बसपा। इस बार की टक्कर है सुश्री मायावती बनाम मोदी और अखिलेश।
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