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शुरुआत तो ठीक ही हुई है महाराज ! केशव प्रसाद मौर्य होंगे यूपी के सीएम ? उत्तर प्रदेश में मोदी का रामराज ! आधी आबादी ,आधी आजादी?
आओ चलो हवा बनाएं

अंबरीश कुमार 

लखनऊ .सिर्फ अप्राकृतिक बरसात  ही नहीं कराई जाती है बल्कि हवा भी बनाई जा सकती है .उत्तर प्रदेश में हवा बन रही है और बनाई भी जा रही है . उत्तर प्रदेश में छठे चरण के मतदान से पहले भाजपा जिस तरह की हड़बड़ी और बदहवासी में दिख रही है वह अप्रत्याशित है .चुनाव कई दल लड़ रहे है पर इस अंदाज में नहीं .समाजवादी पार्टी सरकार में है तो बसपा की कई बार सरकार रही है .वोटबैंक की राजनीति में दोनों दल भाजपा पर भारी पड़ते हैं अगर कोई दंगा फसाद के चलते मजहबी गोलबंदी का माहौल न हो तो .यह भाजपा भी जानती है .पहले दो चरणों के चुनाव जिस अंचल में थे वहां कुछ उम्मीद भी थी पर जाट बिरादरी ही जब नहीं तैयार हुई तो सारा खेल बिगड़ गया .इसी के बाद पार्टी ने रणनीति बदली और हर तरह से हवा बनाने का काम शुरू हुआ .सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया में .तरह तरह के फार्मूले दिए गए .मुसलमान मतदाता बंट जाए तो रास्ता निकल आएगा .इस फार्मूले के तहत प्रायोजित मीडिया में उस दल को आगे किया गया जो वास्तव में आगे नहीं था .पर फिर भी काम नहीं बना .फिर बिहार की तर्ज पर अति पिछड़ा वोट की थ्योरी लाई गई .बताया गया कि बसपा का अति पिछड़ा अब भाजपा की तरफ शिफ्ट कर रहा है .क्योंकि वह अपनी अनदेखी से आहत है और भाजपा ने इस बिरादरी के लोगों को ज्यादा टिकट दिया है .यह भी गजब का फार्मूला है .पिछली बार बुन्देलखंड में कुशवाहा की मदद के बाद भी पार्टी बुरी तरह पिटी थी पर फिर उसी फार्मूले को दोबारा ले आई है .अब जरा जमीन पर आ जाएं .पिछले बड़े चुनाव यानी लोकसभा चुनाव में भाजपा को मोदी लहर में 42 फीसद से ज्यादा वोट मिले थे .क्या इसमें बढ़ोतरी होगी ,यह कोई भी मानने को तैयार नहीं है .इसमें गिरावट आना तय है .राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार भी इसमें दस फीसद की गिरावट मानते हैं .पर उत्तर प्रदेश को करीब से देखने वाले जानकार इसमें पंद्रह से बीस फीसद की गिरावट देख रहे हैं .भाजपा अपने मूल वोट बैंक यानी पंद्रह फीसद से थोडा आगे रहेगी .इसकी वजह कई जगहों पर नर्म हिंदुत्व का असर बनाया गया है .यही उसका बोनस वोट है .पर क्या यह इतना है जो सपा बसपा से मुकाबला कर पाए .भाजपा के वोटों में न्यूनतम पंद्रह फीसद की जो गिरावट आएगी वह सपा बसपा में ही बटेगी .इसमें बड़ी आबादी पिछड़ों की है .सपा को लोकसभा में करीब 22 फीसद और बसपा को करीब 19 फीसद वोट मिले थे .भाजपा को लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते जो वोट पड़े थे उसमे जो कमी इस बार आ रही है वही सपा बसपा का मुनाफा है .आधा आधा कर ही जोड़ दे तो तस्वीर दिखने लगेगी .इसमें अभी न कांग्रेस है न माहौल .न गैस है न नोटबंदी की कतार .ये सब भूल भी जाए तो सिर्फ हवा से भाजपा पार हो जाएगी यह संभव तो नहीं लगता .पर कोई चीज असंभव तो है नहीं .इसी भरोसे पर इस बार भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उम्मीद लगाए हुए है .बनारस पर नजर डालिए सब समझ आ जाएगा .सारा काम छोड़कर भारत सरकार यहीं बैठी है अपने मुखिया के साथ .दो जवानो ने परेशान कर दिया है .और बची खुची कसर बहन जी पूरी कर दे रहीं हैं .दरअसल ये मैदान भी इन्ही दोनों यानी सपा बसपा का ही है .
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  • शुरुआत तो ठीक ही हुई है महाराज !
  • केशव प्रसाद मौर्य होंगे यूपी के सीएम ?
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