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एक नहीं साठ स्टेशन बेचने की तैयारी !

जनादेश ब्यूरो 

 
नई दिल्ली.हबीबगंज रेलवे स्टेशन को बेचे जाने के खिलाफ आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है .एनएपीएम और  किसान संघर्ष समिति रेलवे स्टेशनों को निजी क्षेत्र में देने के खिलाफ दिल्ली और भोपाल में आंदोलन छेड़ेंगे .एनएपीएम के राष्ट्रीय संयोजक डा सुनीलम ने यह जानकारी दी .दिल्ली के जंतर मंतर से इसकी शुरुआत होगी .डा सुनीलम के मुताबिक हबीबगंज स्टेशन से इसकी शुरुआत भले हो पर देश के पांच दर्जन स्टेशन इस निजीकरण योजना के दायरे में आ रहे हैं .निजी क्षेत्र को दिए जाने स्टेशन से रेलवे दो करोड़ रुपए सालाना की आय होगी .पर इसकी भरपाई रेलवे के मुसाफिरों से ही की जाएगी .यह साफ़ है .रेलवे की सबसे बड़ी यूनियन आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के अध्यक्ष शिव गोपाल मिश्र ने कहा है कि निजीकरण का विरोध किया जाएगा .
गौरतलब है कि हबीबगंज रेलवे स्टेशन अब निजी हाथों में दिया जा चूका है .इसे और अन्य स्टेशनों को तीस साल की लीज पर दिया जा रहा है . रेलवे ने गुरुवार को अवने समस्त अधिकार प्रायवेट कंपनी बंसल हाथवे प्रायवेट लिमिटेड को सौंप दिए. अब रेलवे केवल गाड़ी संचालन के लिए ही जिम्मेदार होगा. रेलवे ने पीपीपी मोड के तहत हबीबगंज स्टेशन को वल्र्ड क्लास बनाने के लिए प्रायवेट कंपनी बंसल के साथ करार किया है. इस के तहत बंसल कंपनी स्टेशन में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तर्ज पर सुविधाएं प्रदान करेगी.इस काम में फिलहाल तीन साल का समय लगेगा .डा सुनीलम के मुताबिक रेलवे को ऐसे हर स्टेशन से दो करोड़ रुपए की आमदनी तो होगी पर इसकी भरपाई आम आदमी से होगी .निजीकरण के बाद ऐसे स्टेशनों पर रात में कोई गरीब मुसाफिर रुक नहीं पाएगा .दूसरे निजीकरण बढ़ने पर इसका सीधा असर रेलवे कर्मचारियों पर पड़ेगा .वैसे भी रेलवे लगातार आम आदमी पर तरह तरह से आर्थिक बोझ डालता जा रहा है .इस मुद्दे कोई लेकर डा सुनीलम ने दिल्ली में बैठक बुलाई है .जिसमे आंदोलन की रणनीति पर विचार होगा .उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के निजीकरण के बाद राजनैतिक दलों ,किसान और जन संगठनों की रैलियों में जाने वाले कार्यकर्त्ता भी ऐसे स्टेशन पर नहीं रुक पाएंगे .साफ़ है यह तरीका देश के जन आंदोलनों को कुचलने की भी साजिश है .दूसरी तरफ सोशलिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय संयोजक विजय प्रताप ने रेलवे स्टेशन के निजीकरण का तीखा विरोध करते हुए विभिन्न जन संगठनों से संवाद शुरू कर दिया है ताकि इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन छेड़ा जा सके .
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  • माणिक सरकार का प्रतिबंधित भाषण
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