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शराब कारोबार की उलटी गिनती
धीरेन्द्र श्रीवास्तव 
लखनऊ. शराब दुकानों के खिलाफ महिलाओं के रौद्र रूप से उत्तर प्रदेश में तकरीबन 19 हज़ार करोड़ का राजस्व देने वाले इस कारोबार की उलटी गिनती शुरू हो गयी है. इसे लेकर शराब कारोबारियों के हाथ पांव फूले हुये हैं. वे सत्ता के गलियारे में इसे मैनेज करने के लिए प्रयास तेज कर दिये हैं.शराब कारोबारियों को पहला झटका लगा सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश से जिसमें कहा गया था कि हाइवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें नहीं रहेगीं, जो हैं उन्हें हटाया जाए. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को लागू कराने में लोक कल्याणकारी सरकारों के पसीने छूट गये. राज्य सरकारों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले की आंच को कम करने के लिए हाइवे से निकलने वाले बाईपास का नाम कर दिया अदर डिस्ट्रिक रोड. राज्य सरकारों के इस फैसले से शराब कारोबारियों को थोड़ी राहत मिली कि उत्तर प्रदेश में इस कारोबार को दूसरा बड़ा झटका लगा.
 
यह झटका दिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने. इसके लिये जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल, मंदिर, मस्जिद के 500 मीटर दायरे में शराब की दुकाने नहीं खुलेंगी. इस आदेश के आम होने के साथ ही यूपी में लोग शराब दुकानों की भौगोलिक नाप जोख शुरु कर दिये. सूबे की अधिसंख्य शराब दुकानें इस आदेश की जद में आने लगीं और इसी के साथ तेज होने लगी पूरे प्रदेश में शराब दुकानों को बंद करने की मांग.इसे लेकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है. पूरब से लेकर पश्चिम तक शराब दुकानों को बंद करने के लिए महिलायें नारेबाजी करती देखी जा रही हैं. कई जगहों पर महिलाओं ने तोड़फोड़ भी किया है. जौनपुर में एक शराब दुकान को महिलाओं ने आग के हवाले कर दिया. राजधानी लखनऊ में भी लाठी डंडा लेकर महिलाएं शराब की कुछ दुकानों को घुस गईं और शटर गिराने के लिए मजबूर कर दिया.
 
यह एक कड़वा सच है कि शराब दुकानों से पुलिस वसूली करती है. इसलिये पुलिस इनकी रक्षा में पूरी ताकत झोंके हुये है. आम आदमी की तकलीफ दर्ज करने में खून का आंसू निकल देने वाली पुलिस सत्याग्रही महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर रही है. उन्हें डरा-धमका रही है लेकिन शराब दुकानों के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. शराब दुकानों को बंद करने के आंदोलन का दायरा भी बढ़ता जा रहा है.इसे लेकर धनबल और बाहुबल से बड़े बड़ों को सेट कर लेने वाले, खरीद लेने वाले और कुचल देने वाले शराब व्यवसायी परेशान दिख रहे हैं. वे तर्क दे रहे हैं कि जब उनसे 15 मार्च 2017 को लाइसेंस फ़ीस जमा कराई गयी थी, तब यह आदेश नहीं था कि स्कूल, मंदिर, मस्जिद के 500 मीटर के दायरे में शराब दुकानें की दुकानें नहीं खुलेंगी. तब यह दायरा था शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 50 व 75 मीटर तक की दूरी बनाकर रखनी होगी. यह दायरा 500 मीटर होने से दो तिहाई शराब की दुकानें प्रभावित हो रहीं हैं. इसकी वजह से 19 हज़ार करोड़ का राजस्व देने वाला यह कारोबार बर्बाद हो जायेगा. 
 
वैसे क़ानूनी दृष्टि से शराब के कारोबारियों का पक्ष बहुत मजबूत है, लेकिन आंदोलनकारी महिलायें एक भी तर्क सुनने को तैयार नहीं हैं. उनका एक ही तर्क है कि यह शराब का कारोबार जानलेवा है, हिंदुस्तान को बर्बाद करने वाला कारोबार है, इसे बंद होना चाहिये, हम इसे बंद कराकर मानेंगे. महिलाओं के इस रौद्र रुप से फिलहाल यूपी में शराब कारबार की उलटी गिनती शुरु हो गयी है.
 
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