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छतीसगढ़ में जोगी की जमीन खिसकी ! कांग्रेस की सरकार बनने का इंतजार ! एमपी में कहीं बागी न बिगाड़ दें खेल नोटबंदी ने तो अर्थव्यवस्था का बाजा बजा दिया
मिशन 65 प्लस के बजाय 35 प्लस का खाका ?

केपी साहू 

रायपुर. हालांकि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों के लिए अपने सारे प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए हैं, इसलिए चुनावी- समीकरणों और दीगर राजनीतिक बिंदुओं की निर्णायक चर्चा करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी, फिर भी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने जितने नाम घोषित किए हैं, उन्हें देखकर चुनावी बिसात के नतीजों का खाका तो खिंच ही सकता है. जाहिर है, प्रत्याशी- चयन में जितनी सतर्कता और पारदर्शिता बरतने का सियासी ढोंग दोनों ही दलों ने रचा, अब बस उन प्रत्याशियों की सियासी हैसियत की पोल खुलनी ही शेष नजर आ रही है और दोनों ही दलों के नेतृत्व की तथाकथित सूझबूझ और राजनीतिक व रणनीतिक चतुराई का दांव पर लगना ही शेष है. भाजपा ने एक ही झटके में अपने 78 ‘रणबांकुरों’ को मैदान में उतारकर प्रदेश में सियासी धमाका करने की कोशिश की, पर धमाके की गूंज जिस तरह असंतोष और बगावत की शक्ल में बदली है, उससे कांग्रेस सहम नहीं पाई और भाजपा के हमलों की धार कुंद पड़ती नजर आ रही है. पिछले कई महीनों की सियासी कसरत में जुटी भाजपा की सूची में परिवर्तन के जिस साहस का आलोक दिखने की उम्मीद की जा रही थी, उय आलोक पर धन और बाहुबल के ग्रहण की छाया पड़ गई है. पुराने दागदार राजनीतिक आभा से विहीन और अक्षम मंत्रियों से लेकर विधायकों तक के टिकट काटने के साहसिक बोल सूची जारी होने तक भोथरे हो गए और 65 नए चेहरों के साथ चुनावी  मैदान में उतरने के दावे करने वाली भाजपा का केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व अब तक घोषित सूची में 65 पुराने उन्हीं चेहरों के सामने समर्पण के मुद्रा में नजर आ  रही है. जिन नए 14 चेहरों को लेकर भाजपा अपना विजय-रथ लेकर मिशन 65 प्लस के मुकाम तक बढ़ने की ललक दिखा रही है, क्या वास्तव में वे 14 नए चेहरे तरोताजा हैं? इन हालात में भाजपा के विजय-रथ के पहिए अगर असंतोष के दलदल में धंसें और बगावत की पथरीली-रपटीली राहों में क्षतिग्रस्त होते दिख रहे हैं, तो इसमें विस्मय कैसा? पर हां, भाजपा नेतृत्व को मंथन तो करना ही होगा क्योंकि प्रत्याशी चयन के नाम पर जितने सर्वे, बैठकों और रायशुमारी तक के दौर महीनों तक चलाए गए, प्रत्याशियों की पहली सूची ने उन सबको भाजपाई सियासत का ढोंग साबित कर दिया है. अपने निर्धारित मापदंडों के पालन में भी भाजपा नेतृत्व ने परले दर्जे के दोगलेपन का परिचय दिया है. अब इस सूची को देखकर पूरे प्रदेश में जो पहली स्वाभाविक प्रतिक्रिया गूंजी, उसका मूल सवालिया स्वर यही था कि क्या इन प्रत्याशियों के दम पर भाजपा मिशन 65 प्लस का ख्वाब संजो रही है? क्या भाजपा अब मिशन 65 के बजाय मिशन 35 प्लस के लिए जी-जान से जद्दोजहद में जुटने वाली है?  नकारे हुए और घिसे-पिटे मोहरों को जातीय और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भाजपा नेतृत्व शौर्यवान भले मान ले, पर उनके सहारे विजय-रथ का मुकाम तक पहुंचना उतना आसान नजर नहीं आ रहा है. भ्रष्टाचार, घोटालों और चंदाखोरी के आरोपों से घिरे मंत्री-विधायक जिस तरह से ताल ठोकते नजर आ रहे हैं उससे भाजपा के चाल-चरित्र-चेहरा की पॉलिश उतर गई है. बदतमीजी और बदजुबानी से झलकता इन मंत्रियों-विधायकों का अहंकार भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाओं को पिछले 5 वर्षों में इतना लहूलुहान कर चुका है कि अगले चुनाव तक उन जख्मों का भरना आसान नहीं दिख रहा है. इस लिहाज से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राय को भी अनदेखा करने में भाजपा ने कृपणता नहीं बरती है. भाजपा नेतृत्व ने जो सूची जारी की है, वह बताती है कि भाजपा अपने ही भीतर जरूरत से ज्यादा बलवान हो चले नेताओं के सम्मुख सहमी हुई है, पर भाजपा नेतृत्व शायद यह भूलने का दुस्साहस कर रहा है कि किसी भी कार्यकर्ता को नेता उस पार्टी के कार्यकर्ता बनाते हैं जिन्हें जनादेश की आखिरी मुहर ही प्रामाणिकता प्रदान करती है. इसलिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भले ही यह कहें कि अब कोई प्रत्याशी नहीं बदला जाएगा, पर जनता और कार्यकर्ता तो ऐसे लोगों को राजनीतिक परिदृश्य से लुप्त करने की ताकत तो रखते हैं न ! टाइम्स नाउ और एबीपी न्यूज, सी वोटर के ओपीनियन पोल में व्यक्त बहुमत की संभावना से आत्ममुग्ध भाजपा को अपनी यह जमीनी सच्चाई देखनी ही होगी ! 
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  • एमपी में कहीं बागी न बिगाड़ दें खेल
  • कांग्रेस की सरकार बनने का इंतजार !
  • छतीसगढ़ में जोगी की जमीन खिसकी !
  • नोटबंदी ने तो अर्थव्यवस्था का बाजा बजा दिया
  • नोटबंदी की एक और कहानी !
  • छतीसगढ़-सतनामी समाज ने भाजपा को दिया झटका
  • और राजस्थान में जाटों ने छोड़ा साथ
  • महाजन और विजयवर्गीय के बीच घमासान !
  • अन्ना ,विवेकानंद फाउंडेशन और डोभाल
  • छतीसगढ़ में कांग्रेस टिकट बेंच रही है ?
  • तो डोभाल के दिमाग की उपज थी अन्ना आंदोलन !
  • रवि पार्थसारथी का नाम मीडिया छुपा क्यों रही
  • टिकट बंटने से पहले ही भाजपा में भगदड़
  • प्रदेश में गरीब 50 फीसदी कैसे हो गए ?
  • रास्ते में जो अफसर आया वह निपट गया !
  • अजीत जोगी नहीं लड़ेंगे चुनाव ?
  • एमपी में भाजपा की हालत बिगड़ी ,संघ का सर्वे
  • सरकार के अहंकार ने ली सानंद की जान !
  • इस ' अकबर ' को जानते हैं आप !
  • एमपी में भाजपा का सिंधिया कार्ड
  • गंगा के लिए मौत मुबारक़!
  • एमजे अकबर नपेंगे तो नरेंद्र मोदी कैसे बचेंगे?
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  • गंगा के लिए प्राण देने वाला संत !
  • एमपी में कांग्रेस का खेल बिगाड़ेगी सपा बसपा
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