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गेंहू की चाट भी कभी खिलाएं मोदी का रास्ता रोक न दें यह गठबंधन ! इतिहास में नाम दर्ज करा गए मोदी पर बने तो धोखे से थे
रवि पार्थसारथी का नाम मीडिया छुपा क्यों रही

गिरीश मालवीय 

नई दिल्ली .नीरव मोदी मेहुल चौकसी विजय माल्या जतिन मेहता की लिस्ट में एक नाम और है लेकिन मीडिया वह नाम बताना नही चाहती वह नाम है रवि पार्थसारथी का.रवि पार्थसारथी आईएल एफएस  के चेयरमैन थे जो आज लंदन में बैठे हुए हैं.वैसे कमाल की बात है सुबह आईएल एफएस  का नया बोर्ड एनसीएलटी को कंपनी की अलग-अलग इकाइयों और एसेट बेचकर रिवाइवल करने का नया प्लान सौंपता है ओर शाम को पता चलता है कि इस नए बोर्ड के अहम सदस्य ओर सेबी के पूर्व चेयरमैन जीएन वाजपेयी ने आईएल एफएस  के निदेशक मंडल से इस्तीफा दे दिया है.पुराने निदेशक मंडल को हटाने के बाद सरकार ने कंपनी के नए निदेशक मंडल में वाजपेयी सहित सात  निदेशकों की नियुक्ति की थी.
उदय कोटक की अध्यक्षता वाले नए बोर्ड ने कार्यभार संभालने के बाद जो चार समितियां बनाई गयी थी इनमें वाजपेयी शेयरधारक संबंध समिति एवं कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व समिति का हिस्सा थे .वैसे इस्तीफा निजी कारणो से दिया गया है यह बताया जा रहा है लेकिन यदि आज की परिस्थितियों में उर्जित पटेल भी इस्तीफा देंगे तो कारण भी निजी ही बताया जाएगा,
नए बोर्ड ने अपनी असेसमेंट रिपोर्ट में आईएलएंडएस ग्रुप और उसकी 347 सब्सिडियरी के ऊपर कुल 94200 करोड़ कर्ज बताया है, उदय कोटक ने पिछले हफ्ते पहली बोर्ड बैठक के बाद कहा, 'बोर्ड ने आईएल एफएस की 347 इकाइयों की खोज की थी, जो पहले से मिली जानकारी के मुकाबले 'काफी अधिक' थी.
 
बताया जाता है कि ऐसी कोई चीज नहीं है, जिसका बिजनेस यह कंपनी न करती हो. नोएडा के टोल ब्रिज से लेकर तमिलनाडु के पानी प्रोजेक्ट तक, गुजरात इंटरप्राइजेज फाइनेंस से लेकर कश्मीर में जोजिला टनल प्रोजेक्ट तक, बनारस के गंगाघाटों की सफाई से लेकर देश के तमाम क्षेत्रों में बननेवाले स्मार्ट सिटी तक में यह कंपनी काम कर रही है.एक रिपोर्ट के अनुसार अनुमान लगाया जा रहा है कि आईएल एफएस  को बचाने लिए तीस हजार करोड़ रुपए लग सकते हैं. यह आयुष्मान योजना से भी तीन गुणा ज्यादा बड़ी राशि है. यह राशि देश के कुल स्वास्थ्य बजट के आधे से भी अधिक है वैसे इतने में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी जैसी 10 प्रतिमाएं ओर भी बनाई जा सकती है.आईएल एफएस  कंपनी इतनी महत्वपूर्ण है कि इसे भारत सरकार का एक 'शैडो बैंक' माना जाता है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इसे 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' करार देता है यदि आईएल एफएस  किसी भी कारण से कंगाली के कगार पर पहुंचती है तो इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव होगा इसकी तुलना अमेरिका के लेहमैन ब्रदर्स से अब बड़े बड़े अर्थशास्त्री करने लगे है जो पहले इस विषय को महत्वपूर्ण नही मान रहे थे.
 
वित्त वर्ष 2013-14 में कंपनी का कर्ज 48672 करोड़ रुपए था प्रोजेक्ट फंसने से लागत बढ़ी तो कम्पनी शॉर्ट टर्म लोन लेती रही धीरे धीरे 49 हजार करोड़ से बढ़कर 2018 में कर्ज 91 हजार करोड़ रु पुहंच गया.लेकिन मोदी सरकार में कोई इस बात की जवाबतलबी नही की जा रही कि ऐसा कैसे हो गया?जबकि कंपनी की खराब सेहत के पहले संकेत साल 2014-15 की आरबीआइ की सालाना निरीक्षण रिपोर्ट से मिलने लगे थे कम्पनी का पिछला बोर्ड कैसे अपनी तनख्वाह बढ़ा कर सिर्फ अपनी जेबें भरने में लगा रहा रवि पार्थसारथी ने 2017 - 18 मे अपनी तनख्वाह में 144 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी जब उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया तो उनकी सालाना सैलेरी 26 करोड़ रुपये थी.आज पुराने बोर्ड का अध्यक्ष रवि पार्थसारथी जो 1987 में आईएल एफएस  में बतौर प्रेसिडेंट व सीईओ आए थे फिर 1994 में उन्हें सीईओ  भी बना दिया गया, जो आज इस 94 हजार करोड़ के कर्ज के जिम्मेदार है 6 महीने से लगातार उनकी कम्पनी डिफॉल्ट कर रही है, वह आज लंदन में क्यो बैठे हुए है? यह प्रश्न कोई भी पूछने को तैयार क्यो नही है.
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