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गेंहू की चाट भी कभी खिलाएं मोदी का रास्ता रोक न दें यह गठबंधन ! इतिहास में नाम दर्ज करा गए मोदी पर बने तो धोखे से थे
तब तखत के पीछे छुप गए थे मोदी !
केपी साहू
रायपुर. भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हो पाने पर प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने भाजपा को पार्टी मुख्यालय में सुरक्षा देने की पेशकश की है .त्रिवेदी ने कहा है कि दरअसल 2000 में भाजपा विधायक दल के नेता चुनते समय रायपुर भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में जो पत्थरबाजी, आगजनी और हिंसक घटनाएं हुई थी.भाजपा के तेज तर्रार नेता बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों ने काफी हंगामा किया था क्योंकि विरोधी गुट उन्हें नेता विरोधी दल के पद पर न बैठने की कवायद में जुटा था .तब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी .आज फिर वही आशंका मंडरा रही है . उस घटना की पुनरावृत्ति होने के डर से कोई भी भाजपा का वरिष्ठ नेता रायपुर पर्यवेक्षक बनकर आने के लिए तैयार नहीं हो रहा है. उस समय पर्यवेक्षक बनकर आए नरेंद्र  मोदी खुद को बचाने एक अंधेरे कमरे में तखत के पीछे छिपना पड़ा था जिसका रायपुर के प्रेस फोटोग्राफर ने फोटो भी खींच लिया था. यह घटना समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हुई थी. पर बाद में भाजपा की सरकार आई तो मीडिया भी यह घटना भूल गया .अब सरकार बदली है ,माहौल बदला है तो वे घटनाएं भी याद आ रहीं है जो लोग भूल गए था .पर संदर्भ वही है .इसलिए कांग्रेस भी मौका नही चूक रही .
  यही वजह है कि कांग्रेस ने भाजपा के केंद्रीय  नेताओं को लगातार समुचित सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है. कांग्रेस सरकार के आश्वासन के बाद अब तो भाजपा विधायक दल को अपना नेता चुन लेना चाहिए. श्री त्रिवेदी ने कहा कि विधायक दल का नेता का निर्वाचन करवा पाने में भाजपा की विफलता से मान्य संसदीय परंपराओं का पालन संभव नहीं होगा. यह प्रजातंत्र की अपूरणीय क्षति है. भाजपा हार के सदमें से अभी तक बाहर नहीं निकल पाई है. भाजपा के विधायक दल के नेता का चुनाव तक नहीं हो पा रहा है. 
छत्तीसगढ़ के मतदाताओं ने पहले ही भाजपा पर बहुत थोड़ा विश्वास व्यक्त किया है और 90 में से सिर्फ 15 सीटें दी है. भाजपा विधायक दल ने अभी तक अपना नेता न चुनकर और बिना विपक्ष के नेता के विधानसभा के सत्र संचालन की स्थिति निर्मित कर जनता के बचे खुचे विश्वास को भी तोड़ा है. भाजपा ने साबित कर दिया है कि वह जनता का इतना विश्वास भी प्राप्त करने योग्य नहीं थी. आज यदि विधानसभा चुनाव होगा तो भाजपा को 15 विधानसभा सीटों पर भी सफलता नहीं मिलेगी. शून्य ही भाजपा के हाथ लगेगा. नेता प्रतिपक्ष का नेमप्लेट खाली रहना स्पष्ट रूप से विपक्ष के रूप भाजपा में आयी शून्यता खालीपन और रिक्तता का जीता जागता सबूत है.
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  • पर बने तो धोखे से थे
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