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बिहार बंद से मोदी राज की उलटी गिनती शुरू !
डा लीना
पटना.मजदूर वर्ग की देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में 9जनवरी को भाकपा-माले सहित वाम दलों के बिहार बंद का मिला जुला असर रहा. अन्य बंद की तरह राजधानी पटना के साथ-साथ राज्य के विभिन्न जिला केंद्रों पर बंद समर्थकों ने रेल-सड़क यातायात को बाधित किया, जिसके कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई.बंद के दौरान राज्य में सैकड़ों बंद समर्थकों की भी गिरफ्तारी हुई.माले ने दावा किया है कि कई जगहों पर भाजपा के लोगों ने बंद समर्थकों पर हमला किया,जो साबित करता है कि भाजपा हताश है और मोदी राज की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
 
बंद के दिन पटना में जुलूस निकाला गया, जिसका नेतृत्व वाम दलों के राज्य स्तरीय नेताओं ने किया.बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के नेतृत्व में सैंकड़ों की संख्या में रसोइयों ने मार्च निकाला.डाकबंगला चैराहे पर संगठित क्षेत्र के मजदूरों-कर्मचारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्कीम वर्कर, खेत मजदूर, निर्माण मजदूर, मनरेगा मजदूर, छात्र-नौजवान, बीमा-बैंक के कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मचारी आदि ने हिस्सा लिया और मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया.बंद का जुलूस डाकबंगला चैराहा पर सभा में तब्दील हो गई, जिसे वाम नेताओं के अलावे राजद, विकास इंसान पार्टी व अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी संबोधित किया. बंद को कांग्रेस, सपा, हम आदि विपक्षी दलों ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया।
 
सभा को मुख्य रूप से माले राज्य सचिव कुणाल, खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा, सीपीआई के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह, सीपीआईएम के सर्वोदय शर्मा, एसयूसीआईसी के राजकुमार चौधरी, राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे, तनवीर हसन, विकास इंसान पार्टी के मुकेश सहनी, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार, बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, ऐडवा की रामपरी देवी, अरुण मिश्रा, एटक के गजनफर नबाव सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
 
माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि मोदी सरकार की कारपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ विगत दो दिनों से पूरा देश ठप्प है.कारपोरेट पक्षीय श्रम कानूनों में संशोधनों को वापस लेने, सभी स्कीम वर्करों के लिए न्यूनतम 18 हजार वेतन का प्रावधान करने, समान काम के लिए समान वेतन लागू करने, पुरानी पेंशन नीति बहाल करने आदि मांगों पर यह हड़ताल है, जो पूरी तरह जायज है.भाकपा-माले, अन्य वाम व विपक्षी दल उनकी मांगों के समर्थन में पूरे देश में सड़कों पर उतर रहे हैं.बिहार में भी आज भाजपा का ही राज चल रहा है और नीतीश महज मुखौटा बन कर रह गए हैं.मौब लिंचिंग आम हो गई है, अपराध आज चरम पर है. किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिल रहा है, धान खरीद की कोई व्यवस्था नहीं हो रही है. आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में एक हजार वृद्धि करने में भी सरकार के पसीने छूट गए और अब मानदेय को सरकार प्रोत्साहन राशि बता रही है.7 जनवरी से विद्यालय रसोइयों की हड़ताल चल रही है.
 
अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि बिहार में आशाकर्मियों की लंबी हड़ताल चली और अब रसोइया व आंगनबाड़ी सेविका- सहायिकाओं की हड़ताल चल रही है.लेकिन दिल्ली-पटना की सरकार स्कीम वर्करों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दे रही है.जो सरकार स्कीम वर्करों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं देती, उसे सत्ता में बने रहने का कोई भी अधिकार नहीं है. ऐसी सरकार को गद्दी से उतार फेंकना होगा.
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