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पीएमओ ने रक्षा मंत्रालय को भी ठेंगा दिखाया नेहरु परिवार, तब और अब कुशवाहा की जान लेना चाहते थे नीतीश ? चंद्रशेखर का जुमला भी ले उड़े मोदी !
चंद्रशेखर का जुमला भी ले उड़े मोदी !

त्रिभुवन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नारा दिया है , आपके 55 साल, मेरे 55 महीने. चंद्रशेखर की सरकार गई और चुनाव हुए तो उन्होंने नारा दिया था,  ' चालीस साल बनाम चार महीने. अब प्रधानमंत्री जी और उनकी पार्टी उस नारे को ले उड़ी.
माओवादी और धुर वामपंथी कवि गोरख पांडेय की प्रसिद्ध कविता थी : अच्छे दिन आएंगे. बीजेपी और मोदी जी ने वह भी उड़ा लिया. यह भी ख़याल न किया कि ऐसी चीज़ें बूमरैंग भी करती हैं. गाय कांग्रेस की, सनातन धर्म के प्रतीक कांग्रेस के, पटेल कांग्रेस के, गांधी कांग्रेस के, वह भी उड़ा लिए. कालेधन वाली फ्रेजेज कम्युनिस्टों की. भाई लोगों ने सबका सब चूरमा बनाकर अपने पॉलिटिकल टिफिन में रख लिया. अपने आडवाणी की घोर उपेक्षा और कांग्रेस के प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न! हद है!
 
बीजेपी के अपने मुद्दे थे संविधान से धारा 370 को हटाना, समान नागरिक संहिता लाना, राम मंदिर बनाना, स्वदेशी का सरंक्षण करना, एफडीआई को एकदम समाप्त करना और हर भारतीय या हिन्दू व्यापारी की समृद्धि को सुनिश्चित करना, एक-एक गाय को संरक्षण देना, पाकिस्तान और चीन अगर हमारे एक भी सैनिक को मारें तो उन्हें हर बार घर में घुसकर मारना और एकात्म मानवतावाद के सहारे चाल, चरित्र और चेहरा सबसे अलग रखकर शुचितापूर्ण शासन-प्रशासन देना. राम मंदिर बनाना ही मुद्दा नहीं था, मुद्दा यह भी था कि राम को आप याद भी करें. उनके नाम से सरकार बनाई है तो आप पूरी आस्था से राम की नगरी अयोध्या जाकर समय-समय पर राम लला के आगे साष्टांग हों. हर रोज़ नहीं तो कम से कम सरकार बनने के बाद हर राम नवमी पर तो यह अनिवार्य रूप से करना ही चाहिए था. नहीं किया; क्योंकि आस्था नहीं है. ढकोसला है.
 
अपना सब कुछ भूल गए और लोगों का पुराना सामान अपने घर में भरे जा रहे हैं. अब बताओ देश का भविष्य क्या होगा ऐसे शीर्षासनियों के शासन में? कांग्रेस टू जी करके चलती बनी. उसके सारे कुसूरवार सीना ठोककर घूम रहे हैं और कुछ तो फिर से जीतकर आ गए. कम्युनिस्ट अपने रनिवासों में जाकर सो गए हैं. समाजवादी सत्ता की गाड़ियों में बैठ गए. सच तो यही है, किसी के गले उतरे या न उतरे.साभार 
 
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