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कुशवाहा की जान लेना चाहते थे नीतीश ?
फज़ल इमाम मल्लिक 
पटना .राष्ट्रीय लोक समता पार्टी अब आरपार के मूड में है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधे टक्कर तो फिलहाल रालोसपा ही ले रही है. रालोसपा न सिर्फ सड़कों पर उतर रही है बल्कि आंदोलन कर रही है बल्कि महागठबंधन को एकजुट करने के केंद्र में भी उसकी बड़ी भूमिका हो गई है. शिक्षा के सवाल पर दो फरवरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री और रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में निकाले गए राजभवन आक्रोश मार्च पर पुलिस ने जिस तरीके से लाठियां बरसाईं उसे लोकतंत्र के लिए ठीक तो नहीं ही कहा जा सकता है. नीतीश कुमार की पुलिस ने उपेंद्र कुशवाहा को निशाना बनाया. लोकतंत्र के लिए इसे काले अध्याय के तौर पर ही याद रखा जाएगा. नीतीश कुमार की सरकार और उसकी साख पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा बिहार के बड़े कद के नेता हैं. उनके नेतृत्व में रालोसपा 2017 से सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा के लिए आंदोलन चला रही है. एनडीए में रहते हुए भी पार्टी लगातार शिक्षा सुधार के लिए मुहिम चलाती रही थी. दो फरवरी को राज्य के एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर के साथ राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाना था. राज्यपाल से ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मिलना था. तीन बजे का समय दिया गया था. लेकिन नीतीश कुमार की पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे लोगों पर लाठियां बरसा कर इस आंदोलन को और हवा ही दे दिया है. अमूमन होता यह है कि पुलिस एक निर्धारित जगह पर रोक कर बात करती है, फिर प्रतिनिधिमंडल को साथ लेकर जाती है या प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करती है. लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं किया गया और पहले पानी की बौछार की गई और फिर लाठियां बरसाईं गईं. उपेंद्र कुशवाहा पर तो हमला पीछे से सादे लिबास वालों ने किया था. यह कौन लोग थे, यह रहस्य बना हुआ है.
 
अब पूर्व केंद्रीय मंत्री व राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाया है. उपेंद्र ने सीधा नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वे उनकी हत्या करवाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि दो फरवरी को राजभवन मार्च के दौरान मुझे जान से मारने की साजिश रची गई थी. भगवन का शुक्र है कि मैं बच गया. उन्होंने कहा कि रैली के दौरान हुए हंगामे को लेकर जो सुबूत मिल रहे है उसे देख कर तो ऐसा ही कहा जा सकता है. कुशवाहा ने कहा है कि नीतीश कुमार मेरी जान लेना चाहते है. मुझे नहीं पता है उन्हें मुझसे क्यों चिढ़ है. उन्होंने कहा कि वे पहले राजनितिक तरीके से हटाना चाहते थे, लेकिन उसमे कामयाब नही हो पाए तो जगदेव प्रसाद को जिस तरीके से हटाया गया था, उसी तरीके से अब मुझे रास्ते से हटाना चाहते है.
 
कुशवाहा ने कहा कि उनके राजभवन मार्च के दौरान मुख्यमंत्री के कुछ लोग सिविल ड्रेस में मेरे आंदोलन में शामिल ही गए थे, उसी में से एक आदमी मेरे सर पर लाठी मारने की कोशिश की. लेकिन मेरे साथियों ने देख लिया और उसे धक्का देकर हटाया तब मेरी जान बची. कुशवाहा का कहना है कि घटना के बाद वह युवक भाग गया, जिससे यह साबित होता है कि मेरी हत्या की साजिश रची गई थी. उन्होंने कहा कि इतना कुछ होने के बाद भी सरकार के इशारे पर मेरे और मेरे तकरीबन ढाई सौ अज्ञात साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उपेंद्र ने कहा कि पुलिस दो दिनों के अंदर इस मामले को वापस ले, नहीं तो वे अपने दाई सौ कार्यकर्ताओं के साथ पटना के कोतवाली पहुंच अपनी गिरफ्तारी की मांग करेंगे. 
 
रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा अपनी चोट से उबर भी नहीं पाए हैं कि एक बार फिर हंगामा खड़ा करने को तैयार हैं. कुशवाहा नौ फरवरी को राजधानी पटना के कोतवाली थाना में जाकर अपनी गिरफ्तारी देंगे. इस दौरान उनके साथ ढाई सौ के करीब रालोसपा कार्यकर्ता भी रहेंगे. इन सभी पर प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन करने का आरोप है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि प्रदर्शन के लिए मेरे ऊपर केस दर्ज किया गया है. मेरे ढाई सौ साथियों पर भी केस किया गया है. यह सब नीतीश कुमार ने अपने बचाव में कराया है. उपेंद्र कुशवाहा ने खुद पर हुए हमले को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा. उन्होंने कहा कि मुझपर भगवान का आशीर्वाद था कि मैं बच गया. नहीं तो, जो सुबूत मिल रहे हैं, उसके अनुसार सरकार मुझे जान से मारना चाहती थी.
 
कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर सवाल भी उठाया और पूछा कि कुछ साल पहले हजारों की भीड़ साठ-सत्तर किलोमीटर दूर से चल कर आई थी और पटना में उत्पात मचाया था. तब आप खामोश रहे थे और पुलिस को भी कार्रवाई से मना कर डाला था. कुशवाहा ने करीब सात साल पहले उस घटना की याद नीतीश कुमार को दिलाई जब रणवीर सेना के प्रमुख  ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद पटना की सड़कों पर जम कर तांडव हुआ था. रणवीर सेना के समर्थकों ने पुलिस के अधिकारियों की भी पिटाई की थी और घंटों पटना को बंधक बना रखा था. तब नीतीश कुमार ने कहा था कि उन्होंने डीजीपी को किसी तरह की कार्रवाई करने से मना कर डाला था. कुशवाहा ने सवाल किया कि ऐसा क्यों. हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठियां और उन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं जिन्होंने पूरे शहर को बंधक बना डाला था. उस दिन शहर में सरकार का नहीं अराजक तत्वों का राज था.
 
उपेंद्र कुशवाहा ने इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूरे मामले की जांच हाइकोर्ट के सीटिंग जज से कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि मैंने जो आरोप लगाए हैं, उसकी भी जांच करवाईए. बिहार की जनता सच्चाई जानना चाहती है. दो फरवरी को बिहार में गिरती शिक्षा व्यवस्था को लेकर उपेंद्र कुशवाहा राजभवन मार्च कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने डाकबंगला चौराहे पर लाठीचार्ज किया. दोनों पक्षों के बीच झड़प भी हुई. पुलिस ने मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. इसमें उपेंद्र कुशवाहा को चोटें भी आईं. इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा अपने समर्थकों के साथ चौराहा पर बैठ गए, जहां उनकी तबीयत बिगड़ गई. फिर उन्हें पीएमसीएच भेजा गया. पीएमसीएच में उनका हाल जानने पूरा विपक्ष उमड़ पड़ा था. लालू यादव और राहुल गांधी ने फोन पर उनकी खैरियत ली तो कांग्रेस, राजद और हम के बड़े नेता उन्हें देखने अस्पताल गए. 
 

 

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