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तो पटना से ही लड़ेंगे शत्रुघ्न सिन्हा

फज़ल इमाम मल्लिक 

पटना .शत्रुघ्न सिन्हा फिल्मों से सियासत में आए इसलिए वे कई बार फिल्मों की तरह सियासत में भी संवाद बोलते हैं. पटना में एनडीए की रैली थी. लेकिन उन्हें न्योता नहीं दिया गया. उनके साथ हाल के दिनों में अक्सर ऐसा हो चुका है. लालकृष्ण आडवाणी से नजदीकी की वजह से पार्टी ने उन्हें हाशिए पर रखा. जो संकेत मिल रहे हैं उससे साफ है कि भाजपा उन्हें इस बार टिकट नहीं देने जा रही है. इसलिए वे सिचुएशन का हवाला दे रहे हैं. फिल्मों में सिचुएशन के लिहाज से लोकेशन खोजा जाता है ताकि कहानी को फिट किया जा सके. लेकिन तीन मार्च को रैली में वे नहीं थे. तीन मार्च को वे पटना की बजाय लखनऊ में थे. तीन मार्च को ही उन्होंने अपनी मंशा भी साफ कर दी.
 
भारतीय जनता पार्टी के बागी सांसद और जाने-माने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कर दिया है कि हालात कैसे भी हों, पर आने वाले लोकसभा चुनाव में वह पटना साहिब से ही मैदान में उतरेंगे. तीन मार्च को वे बोले सिचुएशन कोई भी हो, मगर लोकेशन वही रहेगी. शॉटगन ने इसके अलावा पत्नी पूनम सिन्हा के चुनावी मैदान में उतरने के बारे में रहस्य बनाए रखा. न तो इनकार किया, न ही इकरार. उन्होंने कहा कि वक्त आने दें सब पता चल जाएगा.राजनीतिक सरर्गिमयों के बीच बीते दिनों लखनऊ पहुंचे शत्रुघ्न ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से लंबी बातचीत की थी. इस मुलाकात से अटकलें परवान चढ़ी. हालांकि, पार्टी की तरफ से उसे महज शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, जबकि शत्रुघ्न भी इस मुद्दे पर मीडिया से ज्यादा नहीं बोले. इस मुलाकात के बाद से चर्चा थी कि शायद शत्रुघ्न की पत्नी सपा-बसपा गठबंधन में सपा उम्मीदवार हो सकती हैं. शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि पूनम लंबे समय से सामाजिक कार्यों में व्यस्त हैं. लोग चाहते भी हैं कि वे चुनाव लड़ें, लेकिन मैं उनके आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने के बारे में न तो इनकार कर रहा हूं और न ही इकरार. यह पूछे जाने पर कि कोई पेशकश हुई है, शॉटगन ने कहा कि वक्त आने दो दोस्त सब कुछ साफ हो जायेगा. लंबे समय से शत्रुघ्न सिन्हा अपनी भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कार्यशैली व नीतियों से खफा हैं. गाहे-बगाहे वे असंतोष जाहिर भी करते रहते हैं. फिर चाहे राजनीतिक मंच हो या सोशल मीडिया.
 
ऐसी खबरें भी आ रही थीं कि शत्रुघ्न सिन्हा के तेवर देखते हुए भारतीय जनता पार्टी शायद इस बार सिन्हा को उम्मीदवार न बनाए. इसलिए शत्रुघ्न सिन्हा का लखनऊ आना और समाजवादी पार्टी मुख्यालय जाकर अखिलेश यादव से मुलाकात करना कई चुनावी अटकलों को हवा दे गया. वे जिस तरह समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की तारीफ कर रहे हैं, उसके भी कई मतलब निकाले जा रहे हैं. शत्रुघ्न सिन्हा ने अखिलेश यादव को संस्कारी बताया था और कहा था कि मैं मुलायम जी का बहुत सम्मान करता हूं. हालांकि, उन्होंने यह कहकर अटकलों को विराम देने का प्रयास किया कि मुलाकात का गलत अर्थ न निकाला जाए. यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी.   
 
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