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पूर्वांचल में कहीं बिगड़ न जाए भाजपा का खेल

इंदू सिंह

गोरखपुर /संतकबीरनगर . बुधवार को संतकबीर नगर में भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी ने जिस तरह पार्टी के विधायक राकेश सिंह की जूतों से पिटाई के मामले को पार्टी भले ही निपटाने का प्रयास करे पर मामला बहुत दूर तक जा चुका है .दरअसल यह मुद्दा जातीय वर्चस्व का सवाल बन चुका है और इसे प्रतिष्ठा से जोड़ दिया गया है .  समूचा पूर्वांचल तीन दशक से ठाकुर बनाम बाभन के टकराव का गवाह रहा है .पिछले डेढ़ दशक से पूर्वांचल में जातीय जंग काफी हद तक शांत हुई थी .जिसे इस घटना ने फिर उभार दिया है .अस्सी नब्बे के दशक में सौ से ज्यादा लोग दो बड़े माफिया की लड़ाई में मारे जा चुके हैं .इसमें एक माफिया राजपूत नेतृत्व वाला रहा तो दूसरा ब्राह्मण नेतृत्व वाला .पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही और हरिशंकर तिवारी के बीच लंबा टकराव चल चुका है .मौजूदा सरकार के नेतृत्व पर भाजपा के ही कई नेता ब्राह्मणों की अनदेखी का आरोप लगाते हैं .बुधवार की घटना के मूल में भी एक दो ऐसे ही मामले थे . 
जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री आशुतोष टंडन,डीएम और एसपी सहित अन्य अफसरों की मौजूदगी में मामूली विवाद को लेकर सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच हुए जूतम पैजार की घटना को लेकर हर कोई सकते में है. घटना का स्वरूप और विवाद की जड़ देखने से साफ है यह ठाकुर बनाम ब्राह्मण कार्ड खेलने के लिए चुनाव पूर्व लिखी गई पटकथा का हिस्सा है. यह घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाले गोरखपुर और बस्ती मंडल की नौ लोकसभा सीटों का समीकरण बिगाड़ सकती है. 
सांसद शरद त्रिपाठी व विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच में मारपीट की घटना के बाद गुरुवार को सबसे पहले संगठन मंत्री सुनील बंसल और फिर थोड़ी देर बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल से फोन पर वार्ता की. योगी के दखल के बाद वे धरना समाप्त करने की घोषणा कर विधायक लखनऊ चले गए.लखनऊ में सांसद और विधायक ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को सफाई भी दी .गौरतलब है कि  बुधवार की देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में सांसद शरद त्रिपाठी द्वारा मेहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल को जूते से पीटने की घटना के बाद विधायक समर्थकों में आक्रोश कायम है. विधायक राकेश बघेल समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट में धरने पर पूरी रात बैठे रहे. वर्तमान समय में विधायक लाठीचार्ज के दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरनादे रहे थे . जिलाधिकारी रवीश गुप्त ने सुबह 9 बजे विधायक को मनाने की कोशिश किया लेकिन विधायक कार्रवाई की मांग पर अडिग रहे. विधायक को मनाने के लिए डीआईजी कमिश्नर ने भी दो बार विधायक से वार्ता किया लेकिन फिर भी विधायक टस से मस नहीं हुए थे.बाद में योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद मामला शांत हुआ .
गौरतलब है कि गोरखपुर ठाकुर और ब्राह्मण की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है. चिल्लूपार से विधायक रहे पंडित हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही इसके मुख्य सूत्रधार रहे हैं. शाही अब इस दुनिया में नहीं है तो हरिशंकर तिवारी ने राजनीति से किनारा कस लिया है. भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी के पिता रमापति राम त्रिपाठी भाजपा के कद्दावर नेता रहे हैं. यह केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं. घटना के दूसरे पक्षकार विधायक राकेश सिंह बघेल हिंदू युवा वाहिनी से शुरूआत से ही ज़ुडे रहे,यह योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं. दोनों का जुड़ाव गोरखपुर की माटी से है. वर्तमान राजनीतिक माहौल पर नजर दौड़ाए तो पाएंगे खलीलाबाद में ब्राह्मण और यादव निर्णायक भूमिका में होते हैं. मोदी लहर में जातीय राजनीति करने वालों की हवा निकल गई थी इस घटना ने उनको जीत का मंत्र दे दिया है. राजनीतिक रणनीतिकार इस घटनाक्रम को दूसरे चश्मे से देख् रहे हैं. सेाशल मीडिया में घटनाक्रम को लेकर दो पक्ष तेजी से उभर रहे हैं.बहरहाल भाजपा के रणनीतिकार इस घटना से पशोपेश में है .कोई भी कदम पूर्वांचल की जातीय राजनीति में पार्टी को भारी पड़ सकता है .
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ब्राहमण सांसदो की अनदेखी भी है वजह ?
अमरेश मिश्र
गोरखपुर .आप सब लोगों ने संत कबीर नगर के भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी द्वारा उसी जिले के मेहंदवा विधान सभा के भाजपा विधायक राकेश सिंह बघेल से हाथापाई का वीडियो देखा.ऐसा आखिर क्यूं हुआ?वीडियो की सच्चाई कुछ और है.
दरअसल, शरद त्रिपाठी, राकेश सिंह बघेल से बात नही कर रहे थे. वो एक अधिकारी से पूछ रहे थे कि उनका नाम जिले की उक्त परियोजना के शिलान्यास मे क्यूं नही गया, जबकी वो वहीं से सांसद हैं. इसपर राकेश सिंह बघेल ने खुद उन्हे टोका--और कहा ,मुझसे बात करिये--मैने करवाया है. फिर भी सांसद शरद त्रिपाठी उसके प्रति मुखातिब नही हुए.जूते से मारने की बात सबसे पहले राकेश सिंह बघेल ने की. शरद त्रिपाठी इस बदतमीज़ी पर तिलमिला गये.

राकेश सिंह बघेल कौन है?ये मेहंदवा का विधायक, ठाकुर है, योगी आदित्यनाथ का आदमी हैं . ये हिंदू युवा वाहिनी का नेता भी है. इसके ऊपर अपराधिक मामलो मे कई नामजद हैं. 2017 से राकेश सिंह से ब्राहमण विरोधी अभियान छेड़ रखा है. भाजपा योगी भाजपा के मुख्यमंत्री हैं उत्तर प्रदेश के; फिर भी, सांसद शरद त्रिपाठी और भाजपा के अन्य ब्राहमण सांसदो को योगी उपेक्षित करते रहे हैं.भाजपा मे दलित और पिछड़ी जातीयों के विधायक-सांसद भी योगी से परेशान हैं. सावित्री बाई फुले और ओम प्रकाश राजभर खुल कर योगी का विरोध कर चुके हैं.भाजपा नेता रमाकांत यादव भी योगी के जातिवाद के ऊपर सवाल उठा चुके हैं.

राकेश सिंह बघेल ने शरद त्रिपाठी का 2018 मे पुतला फुंकवाया, उनके खिलाफ प्रदर्शन करवाया, उनके कार्यकर्ताओं पर हमले करवाये.शरद त्रिपाठी ने यूंही ये सब नही किया. ये एक लम्बे समय से हो रही प्रताड़ना की प्रतिक्रिया है.जब से योगी सरकार आयी है, पूरे पूर्वांचल मे ब्राहमणो और अन्य जातियों को सताया जा रहा है. पूरे इलाक़े मे कई भाजपा सांसद और विधायक परेशान हैं. योगी की नीतियां, अच्छे ठाकुरों को भी परेशान कर रही हैं. योगी सिर्फ हिंदू युवा वाहिनी के लोगों को बढ़ा रहा है.लेखक राजनैतिक कार्यकर्त्ता हैं .
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  • भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी
  • तो शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस के साथ
  • प्रियंका गांधी से कौन डर रहा है ?
  • तो अब धरोहरों से मुक्त हुई भाजपा
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