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तो अब धरोहरों से मुक्त हुई भाजपा भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी प्रियंका गांधी से कौन डर रहा है ? तो शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस के साथ
साढ़े तीन दर्जन दलों की नाव पर सवार हैं मोदी !

गिरधारी लाल जोशी

नई दिल्ली .  देश में लोकतंत्र के महापर्व की डुगडुगी बज चुकी है.भाजपा का शीर्ष नेतृत्व  यूपीए को या दूसरे गठबंधन को खिचड़ी , मिलावटी या सत्ता के लिए जुटे लोगों की जमात बता रहा  है.मगर 2014 या उसके बाद के हालात पर हम गौर करें तो सब कुछ साफ साफ नजर आने लग जाएगा.
 
 भाजपा ने 2014 का चुनाव 28 दलों के साथ मिलकर लड़ा था.इनमें से 16 ने गठबंधन छोड़ दिया है.पांच घटक दल दबाव बनाए है.भाजपा को बीते चुनाव में 282 सीटें और 22 घटक दलों को 54 सीटें मिली थी.चुनाव के बाद छोटे छोटे दलों को एनडीए में शामिल कराया गया.इससे घटक की संख्या में इजाफा हो 42 हो गई.इनमें कई छोटे दल ऐसे है जो चुनाव नहीं लड़ते.मगर जातीय वोटों पकड़ की वजह से इन्हें शामिल किया गया.
 
  हाल में असम गण परिषद (एजीपी) ने नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एनडीए छोड़ दिया था. मगर बुधवार को मिली सूचना के मुताबिक वह फिर से एनडीए का  हिस्सा बनने को राजी हो गई है.साल 2018 में जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) एनडीए छोड़ महागठबंधन का दामन थाम लिया.फरवरी में ही नागालैंड विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए के पुराने सहयोगी नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने पंद्रह साल पुराने रिश्ते को तिलांजलि दे दी.
 
मार्च में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी ने भी एनडीए का साथ छोड़ दिया.वे विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने से नाराज थे.पश्चिम बंगाल की गोरखा जन मुक्ति मोर्चा ने भाजपा पर धोखा देने का आरोप लगा बीते साल एनडीए छोड़ दिया.कर्नाटक चुनाव के बाद कर्नाटक  प्रज्ञावंत जनता पार्टी ने भी भाजपा नीत गठबंधन त्याग दिया.उसने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन का हाथ थाम लिया.
 
 इसके बाद 2018 के अंत में उपेंद्र कुशवाहा ने भी एनडीए का आगे हिस्सा बनने से इंकार कर दिया.और अपनी पार्टी आरएलएसपी को विपक्ष के महागठबंधन से जुड़ गए.2018 में ही जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार चलाने वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने खुद भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया.वहां महबूबा मुफ्ती सरकार में शामिल थी.इसके अलावे बिहार की एक क्षेत्रीय दल मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी ने भी एनडीए छोड़ महागठबंधन का पल्ला पकड़ लिया.
 
और तो और 2014 में एक साथ लोकसभा चुनाव लड़नेवाली हरियाणा जनहित कांग्रेस ने कुछ महीने बाद ही एनडीए छोड़ दिया था.और पार्टी के अध्यक्ष कुलदीप विश्नोई ने आरोप लगाया था कि भाजपा धोखा देने वाली पार्टी है.जो क्षेत्रीय दलों को खत्म करना चाहती है.तामिलनाडु की एमडीएमके, डीएमके और रामदास की पीएमके भी एनडीए छोड़ चुकी है.आंध्रप्रदेश में तेलड़ा स्टार पवन कल्याण की पार्टी जनसेवा पार्टी ने भी 2014 के आम चुनाव के कुछ महीने बाद ही एनडीए छोड़ दी थी.साथ ही केरल की रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (वोल्शेविक) आदिवासी नेता सीके जानू की जनधिपत्य राष्ट्रीय सभा और महाराष्ट्र के स्वाभिमानी पक्ष ने भी मोदी सरकार के किसान विरोधी बताते हुए एनडीए छोड़ दिया था.
 
  इतना ही नहीं दूसरे साथी भी दबाव बनाए हुए है.उत्तरप्रदेश में योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का अपना दल भाजपा पर लगातार दबाव बनाए है.राजभर ने तो बाकायदा धमकी दे रखी है.उधर महाराष्ट्र में शिवसेना से गठजोड़ तो हो गया.फिर भी जहर उगल रही है.तो मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी भी भाजपा को आंखें दिखा रही है.बिहार में जदयू साथ तो आ गई है.मगर सीटें कौन सी कौन लेगा .अभी जिच बरकरार है. यह सच है कि 1995 से देश में गठबन्धान का दौर चल रहा है.इससे नकारा नहीं जा सकता है.तभी यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन बना है.ऐसे में एनडीए के भाजपा नेता की गठबंधन पर किए जा रहे हमले बेमतलब नजर आते है.
 
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  • भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी
  • तो शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस के साथ
  • प्रियंका गांधी से कौन डर रहा है ?
  • तो अब धरोहरों से मुक्त हुई भाजपा
  • विदेश में तो बज ही गया डंका
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