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भारतीय हिस्से को नेपाल ने अपना बताया

यशोदा श्रीवास्तव

काठमांडू .नेपाल और भारत के बीच ताजा विवाद के पीछे चीन तो नही है? मानसरोवर के मुख्य द्वार तक भारत की बनाई सड़क से चीन का नाराज होना इसकी वजह हो सकता है.नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली ने भारत के भूक्षेत्र लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को न केवल अपना बताया है.बुधवार को भूमि सुधार मंत्री पद्मा आर्याल ने नया नक्शा जारी किया. नक्शे में विवादित तीनों क्षेत्र को नेपाल के भूक्षेत्र में समाहित कर भारत को चुनौती देने की कोशिश की गई. नेपाली पीएम ने कहा सत्यमेव जयते का नारा बुलंद करने वाला देश सिंहमेव जयते का हिमायती है.सिंहमेव जयते कहकर नेपाल ने भारतीय सेना पर भी तंज कसा है. भारत के प्रति नेपाल का यह बड़बोलापन दो पड़ोसी राष्ट्र के बीच किसी तीसरे राष्ट्र की दखलंदाजी का साफ संकेत है. दोनों देशों के संबंधों के जानकार इस खेल में चीन के शामिल होने की बात कहते हैं.चीन भारत और नेपाल के मधुर संबंधो को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है. और जबसे नेपाल में कम्युनिस्ट सरकार सत्ता रूढ़ हुई है तब से वह भारत को लेकर नेपाल को गुमराह करने का कोई मौका नहीं छोड़ता.

  मानसरोवर के मुख्य मार्ग तक भारत द्वारा सड़क बनाये जाने से खफा नेपाल ने सोमवार को उक्त भूक्षेत्र का नया नक्शा जारी करने की घोषणा की थी.नये नक्शे में नेपाल ने लिंपियाधुरा, लिपुलेख , कालापानी को अपने भूक्षेत्र का हिस्सा दर्शाया है.सुगौली संधि के वक्त के नक्शे में ये तीनों क्षेत्र भारत का भूभाग है. नेपाल का कहना है कि उस वक्त का नक्शा राजनीति से प्रभावित है. ध्यान देने की बात है कि नेपाल ने सिर्फ उत्तराखंड से लगी 805 कीमी की सीमा में ही बदलाव किया है.लद्दाख,उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ ही चीन से लगती सीमा को पूर्ववत रखा है. इतना ही नहीं नेपाल ने नये नक्शे को छात्रों के पाठ्यक्रम में भी शामिल करने की भी बात कही है.  काठमांडू से यशोदा श्रीवास्तव की पूरी रपट शुक्रवार के अगले अंक में पढ़ें 

फोटो -नया नक्शा जारी करते हुए नेपाल की भूमि सुधार मंत्री पद्मा आर्याल 

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