जनादेश

इस अंधविश्वास के पीछे है कौन ? सरगुजा की मांड नदी का बालू खोद डाला लैंसेट ने लेख क्यों वापस लिया? क्या बड़ा मेडिकल घोटाला है यह ! अमेरिकी आंदोलन को ओबामा का समर्थन ये फेक न्यूज़ फैलाते हैं ? भारत चीन के बीच शांति का रास्ता तिब्बत से गुजरता है - प्रो आनंद कुमार पांच जून 1974 को गांधी मैदान का दृश्य ! रामसुदंर गोंड़ की हत्या की हो उच्चस्तरीय जांच-दारापुरी घर लौटे मजदूरों से कानून-व्यवस्था को खतरा ? अंफन ने बदली सुंदरबन की तस्वीर और तकदीर बबीता गौरव से कौन डर रहा है अख़बार से निकले थे फ़िल्मकार बासु चटर्जी देश में कोरोना तो बिहार में होगा चुनाव ? बुंदेलखंड़ लौटे मजदूरों की व्यथा भी सुने ! बिहार को कितनी मदद देगा केंद्र ,साफ बताएं एजेंसी की खबरें भरते हिन्दी अखबार ! दान में भी घालमेल ! मंच पर गांधी थे नीचे मैं -पारीख पार्टी और आंदोलन के बीच संपूर्ण क्रांति इसलिए पांच जून एक यादगार तारीख है !

सुरैया पर लाखों मरते थे, लेकिन वो सिर्फ़ देव पर

 वीर विनोद छाबड़ा

सुरैया परदे की नहीं असल दुनिया में भी रानी थी. बेहद खूबसूरत. तीन-तीन ख़िताब उनके नाम थे. मलिका-ए-हुस्न, मलिका-ए-तरन्नुम और मलिका-ए-अदाकारी. उस दौर की सबसे महंगी स्टार. अब ऐसी अदाकारा पर ज़रूरी है कि मरने वाले भी लाखों होंगे. मशहूर एक्ट्रेस वीना का भाई तो भूख हड़ताल पर ही बैठ गया था. एक दिल का मारा तो लाहोर से दहेज़ के साथ बारात ही लेकर आ गया. अनेक प्रेम दीवाने तो तस्वीर रख कर पूजा किया करते थे. मोरारजी देसाई के पुत्र कांति देसाई ने उन्हें डिनर पर बुलाया लेकिन सुरैया ने इंकार कर दिया. धर्मेंद्र ने किशोरावस्था में उनकी फिल्म 'दिल्लगी' चालीस मरतबे देखी. इसके लिए उन्हें घर से पचास मील दूर जाना पड़ता था.

हॉलीवुड के स्टार ग्रेगरी पैक ने जब सुरैया को देखा तो दंग रह गए. उन्होंने सुरैया की एक बड़ी सी तस्वीर अपने बैडरूम की दीवार पर टांग रखी थी. लेकिन सुरैया उनकी छायाप्रति देवानंद को चाहती थी. और देवानंद भी उनको बड़ी शिद्दत से चाहते थे. लेकिन सुरैया की नानी ने सब गड़बड़ कर दिया. पहले तो हिंदू-मुसलमान की दीवार खड़ी करने की कोशिश की. लेकिन यह नाक़ाम साबित हुई. दोनों ने भागने का प्लान बनाया. लेकिन ऐन मौके पर किसी ने गद्दारी कर दी. दोनों को अलग कर दिया गया. सख्त पहरे बैठा दिए गए. मगर एक-दूसरे को टूट कर चाहने वालों को फ़ौलाद की सख़्त और ऊंची दीवार भी डरा नहीं सकी. कहीं पढ़ा था, तब नानी ने धमकी दी कि अगर ज़िद्द न छोड़ी तो उसके आशिक को ख़त्म भी किया जा सकता है. और सुरैया डर गयीं. उन्होंने मिन्नत की कि वो हर क़ुरबानी देने को तैयार है, बस उसके देवीना (देवानंद का निकनेम, जो सुरैया ने रखा था) को कोई छुए भी नहीं. देवानंद ने सुरैया को जो अंगूठी दी थी, नानी ने उसे समुंदर में फेंकवा दिया.

गहरे अवसाद से बाहर निकलने के लिए देवानंद ने अपनी फिल्मों (टैक्सी ड्राईवर, नौ दो ग्यारह, House No. 44) की हीरोइन कल्पना कार्तिक से शादी कर ली. लेकिन वो सुरैया को भूले नहीं. उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी सुरैया की याद में देवीना रखा.इधर सुरैया के लिए नानी एक से बढ़ कर एक रिश्ते लायी. इनमें पहले से शादी-शुदा मशहूर डायरेक्टर एम.सादिक भी थे. बाद में एक्टर रहमान का नाम भी जुड़ा. लेकिन सुरैया ने सबको मना कर दिया. देवीना नहीं तो कोई भी नहीं. वो आजन्म कुंवारी रहीं.

देवानंद ने अपनी ऑटोबायोग्राफी - रोमांसिंग विद लाईफ़ - में लिखा है - सुरैया मेरा पहला प्यार था और ज़िंदगी की आख़िरी सांस तक करता रहूंगा. मैं सुरैया की मौत पर कब्रिस्तान नहीं गया, इसलिए की पुरानी बातें बहुत याद आएंगी. दिल को बेहद तक़लीफ़ होगी. दूर खड़ा रो लूंगा. उसे दुखभरी ज़िंदगी से छुटकारा मिल गया.

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :