जनादेश

इस अंधविश्वास के पीछे है कौन ? सरगुजा की मांड नदी का बालू खोद डाला लैंसेट ने लेख क्यों वापस लिया? क्या बड़ा मेडिकल घोटाला है यह ! अमेरिकी आंदोलन को ओबामा का समर्थन ये फेक न्यूज़ फैलाते हैं ? भारत चीन के बीच शांति का रास्ता तिब्बत से गुजरता है - प्रो आनंद कुमार पांच जून 1974 को गांधी मैदान का दृश्य ! रामसुदंर गोंड़ की हत्या की हो उच्चस्तरीय जांच-दारापुरी घर लौटे मजदूरों से कानून-व्यवस्था को खतरा ? अंफन ने बदली सुंदरबन की तस्वीर और तकदीर बबीता गौरव से कौन डर रहा है अख़बार से निकले थे फ़िल्मकार बासु चटर्जी देश में कोरोना तो बिहार में होगा चुनाव ? बुंदेलखंड़ लौटे मजदूरों की व्यथा भी सुने ! बिहार को कितनी मदद देगा केंद्र ,साफ बताएं एजेंसी की खबरें भरते हिन्दी अखबार ! दान में भी घालमेल ! मंच पर गांधी थे नीचे मैं -पारीख पार्टी और आंदोलन के बीच संपूर्ण क्रांति इसलिए पांच जून एक यादगार तारीख है !

संप्रभुता का एक संदेश है नेपाल का नया नक्शा

 आनंद स्वरूप वर्मा 

एबीपी न्यूज़ से ले कर एनडीटीवी तक यानी फर्जी से ले कर जेनुइन चैनलों तक सब एक ही राग अलाप रहे हैं कि नेपाल ने चीन के कहने पर अपने नए नक्शे में भारत के हिस्से को शामिल किया है!18 मई को नेपाल ने आधिकारिक तौर पर अपना नया नक्शा जारी किया जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा तथा लिपुलेक को नेपाल का भू-भाग बताया है. इन्हीं इलाकों को भारत ने भी अपने नक्शे में भारतीय भू-भाग बता रखा है.मामला थोड़ा पेचीदा होने के बावजूद नेपाली जन मानस से भारत की विस्तारवादी छवि को निकाल बाहर करना भारत के लिए असंभव है.1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद राजा महेंद्र द्वारा भारतीय सेना को कालापानी में अस्थायी तौर पर चीन के खिलाफ मोर्चेबंदी की दी गई सहूलियत को कितने छल-प्रपंच द्वारा भारत ने, अभिलेखागारों से निकाले गए नक्शों के जरिए, भारत का हिस्सा साबित करना चाहा और अंत में उसने अपना हिस्सा बना ही लिया, इसे नेपाली जनता समझती है. उसने कम से कम 1990 से लगातार कालापानी के साथ की जा रही साजिश पर आवाज उठाई है हालांकि उसके नेतागण ज्यादा समय सत्ता की बंदरबांट में व्यस्त रहे.

जो लोग नक्शे के संदर्भ में चीन की साजिश देख रहे हैं वे शायद यह भूल रहे हैं कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा की समाप्ति पर जो संयुक्त वक्तव्य जारी हुआ था उसमें ‘लिपुलेक को द्विपक्षीय व्यापार मार्ग’ कहे जाने पर नेपाल ने चीन की आलोचना की थी और भारत और चीन दोनों को साफ शब्दों में कहा था कि “किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह नेपाल की गैर मौजूदगी में नेपाल के किसी क्षेत्र के बारे में विचार करे.जाहिर सी बात है कि नए नक्शे में कालापानी, लिम्पियाधुरा तथा लिपुलेक को नेपाल का भू-भाग दिखा कर नेपाल ने भारत और चीन दोनों को अपनी संप्रभुता को ले कर साफ साफ संदेश दिया है.इस पर विस्तार से पढ़े और लिखे जाने की जरूरत है.फेसबुक वाल से साभार (ये लेखक के निजी विचार हैं )

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :