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गुजरात का वेंटिलेटर तो गुब्बारा जैसा निकला !

अमदाबाद .गुजरात की विजय रुपाणी सरकार बड़े विवाद में फंस गई है  यह मामला है सरकारी अस्पतालों में लगे फर्जी वेंटिलेटर का है .इसे लेकर कांग्रेस ने रूपाणी सरकार पर हल्ला बोल दिया है .गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा , सरकार कोविड-19 के उन मरीजों का आंकड़ा बताए, जिनकी जान वेंटिलेटर्स पर रखने से गई.इस मामले में न्यायिक जांच होनी चाहिए.क्या फर्जी वेंटिलेटर के कारण सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस के मरीजों की जान गई.

कांग्रेस का कहना है कि कोविड-19 के मरीजों की जान ताक पर रखकर इन मशीनों पर उन्हें रखा गया और उनकी मौत हो गई। अमित चावड़ा ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अंबू बैग लगे हैं और उन्हें वेंटिलेटर्स कहा जा रहा है। इस मामले में न्यायिक जांच होनी चाहिए.क्योंकि अमदाबाद के सिविल अस्पताल में 300 से ज्यादा कोरोना वायरस के मरीजों की जान जा चुकी है .

अमित चावड़ा ने आरोप लगाया है कि ये तथाकथित  वेंटिलेटर धामन-1 राजकोट की एक ज्योति सीएनसी कंपनी में बने हैं. इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रम सिंह जुनेजा सीएम रुपाणी के मित्र हैं. इस तरह के फेक वेंटिलेटर्स गुजरात के 900 अस्पतालों में लगाए गए, जिनमें में 230 अकेले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में लगे हैं.दरअसल यह वेंटिलेटर न होकर बेसिक ऑक्सिजन देने वाली  मशीन है .यह मामला अहमदाबाद मिरर की खबर से सामने आया था .मिरर ने  धामन-1 के बारे में खबर छापी थी कि इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया  से लाइसेंस नहीं मिला है.

इसे पांच अप्रैल को मुख्यमंत्री ने लांच किया था.पर लांच करने से पहले सिर्फ एक ही मरीज पर ही इसका परीक्षण किया गया था .हालांकि लांच के दिन कंपनी ने भी बताया कि ये वेंटिलेटर्स नहीं हैं सिर्फ मरीजों को बेसिक ऑक्सिजन देने वाली मशीन है.फिर ऐसी गफलत क्यों हुई यह सवाल उठ रहा है .

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