जनादेश

इस अंधविश्वास के पीछे है कौन ? सरगुजा की मांड नदी का बालू खोद डाला लैंसेट ने लेख क्यों वापस लिया? क्या बड़ा मेडिकल घोटाला है यह ! अमेरिकी आंदोलन को ओबामा का समर्थन ये फेक न्यूज़ फैलाते हैं ? भारत चीन के बीच शांति का रास्ता तिब्बत से गुजरता है - प्रो आनंद कुमार पांच जून 1974 को गांधी मैदान का दृश्य ! रामसुदंर गोंड़ की हत्या की हो उच्चस्तरीय जांच-दारापुरी घर लौटे मजदूरों से कानून-व्यवस्था को खतरा ? अंफन ने बदली सुंदरबन की तस्वीर और तकदीर बबीता गौरव से कौन डर रहा है अख़बार से निकले थे फ़िल्मकार बासु चटर्जी देश में कोरोना तो बिहार में होगा चुनाव ? बुंदेलखंड़ लौटे मजदूरों की व्यथा भी सुने ! बिहार को कितनी मदद देगा केंद्र ,साफ बताएं एजेंसी की खबरें भरते हिन्दी अखबार ! दान में भी घालमेल ! मंच पर गांधी थे नीचे मैं -पारीख पार्टी और आंदोलन के बीच संपूर्ण क्रांति इसलिए पांच जून एक यादगार तारीख है !

महाननगर से गांवों में आता कोरोना !

अवधेश मल्ल

कुशीनगर. गांव-घर के "लाडले" ही अब अपनों के लिये खतरे की वजह बनने लगे है.  सबब यह कि शहरों से हताश- निराश कमासुतों की भीड़ सामानों की गठरी के साथ-साथ कोरोना को भी अपने कंधे पर लादे घर लौट रहें हैं. स्वास्थ्य विभाग की बदइंतजामी के चलते शहरों से ढोकर लाया गया कोविड 19 अब गांवों में भी  तेजी से फैलने लगा है. स्थिति यह है कि कुशीनगर में कोरोना वायरस के "कम्युनिटी स्प्रीड" का खतरा मडराने लगा है. कोरोना वायरस इस बात का संकेत भी दे रहा है. स्वास्थ्य विभाग को 2 दिनों में केवल एक गांव से 25 कोरोना संदिग्धों को जांच के के लिए भेजना पड़ा है. इसके बावजूद भी विभाग की चाल में कोई तेजी नहीं आयी है. 

    आंकड़ों की जुबान में बात की जाय तो कुशीनगर जनपद की आबादी लगभग 38 लाख है. दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिये अनुमानतः करीब 3 लाख लोग देश- परदेश के कोने-कोने में जाते हैं. लॉकडाऊन के चलते शहरों में रोजी खो चुके लोग अपने गांवों की ओर दौड़ पड़े हैं. बाहर से जिले में आने वाली भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल कुशीनगर के सांसद विजय दूबे के पास 42 हजार लोगों ने बाहर से अपने गांव आने के लिये आवेदन किया है. जिला प्रशासन के मुताबि, 21  तारीख तक करीब 45 हजार लोग बाहर से कुशीनगर जिले में आ चुके हैं. इस संख्या के इतर महानगरों से आ रहे लोगों का रेला लगातार  गांवों में पहुंच रहा है.

     4 मई तक कुशीनगर जनपद ग्रीन जोन में शामिल था लेकिन 5 मई को जिला अचानक ऑरेंज जोन में आ गया.इसकी वजह कानपुर से अपने गांव बेलवनिया आई एक किशोरी रही. 5 मई से लेकर 19 मई तक महज 14 दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या 7 तक पहुंच गई. यही नहीं हाटा तहसील के पडरी खास गांव निवासी रामबृक्ष साहनी की मौत भी कोविड 19  से संक्रमित होने के कारण 17  मई को हो गई.यह स्थिति तब  है जब  21 मई तक स्वास्थ्य विभाग महज 817 लोगों का सैंपल जांच हेतु भेजा है और केवल 602  की रिपोर्ट आयी है. 208 संदिग्धों की जांच रिपोर्ट अभी शेष है. गौर  करने  वाली बात यह है कि सभी संक्रमित मुंबई, कोलकाता, कानपुर जैसे महानगरों से अपने घर लौटे थे. . 

       शहर, तारीख और संख्या गिनाने के पीछे मकसद यह बताना है कि कुशीनगर जनपद में  कोविड 19 का संक्रमण फैलने के पीछे बाहर से आये लोग हैं. हाटा क्षेत्र के किशोरी को छोड़कर सभी अपने घर के आर्थिक स्तंभ हैं और इनकी कमाई से घर  की दाल- रोटी चला करती थी. परंतु स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्था एवं लापरवाही से यह लोग अपने गांव- घर के लिये संकट का कारण बन गये हैं. पडरौना कोतवाली के कांटी गांव के निवासी एक युवक की रिपोर्ट 16  मई को पॉजिटिव आ गई. यह युवक 7 दिन पहले अपने साथियों के साथ मुंबई से आया था लेकिन उसका सैंपल 13 मई  को लिया गया और एक दिन बाद उसे जांच के लिये क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र गोरखपुर भेजा गया. मुंबई से घर पहुंचने के बाद वह अपने 6 साथियों के साथ गांव के स्कूल में बने क्वारंटाईन सेंटर में रहने लगा. यहां कोई देखरेख नहीं होने के कारण  युवक पडरौना नगर सहित अन्य जगहों पर मनमर्जी घूमता रहा. यह कितने लोगों को संक्रमित किया होगा इसका अंदाजा किसी को भी नहीं है. इस 25 वर्षीय युवक का एक मित्र भी19 मई को कोविड19 से ग्रसित हो गया.कुबेरस्थान  थाना क्षेत्र के शिवराजपुर गांव निवासी इस युवक को भी क्वारंटाईन करने में काफी विलम्ब किया गया .

        कोविड 19 के संक्रमण से मरे रामबृक्ष के मामले में भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई है. मुंबई से आने के बाद भी 3 दिन तक रामबृक्ष की सुधि लेने वाला कोई नहीं था.  17  मई को जब उसकी हालत ज्यादा खराब हो गई तो  परिजन पीएचसी सुकरौली लाये. परंतु उसे बचाया नहीं जा सका.  लापरवाही का नतीजा यह है कि केवल 2 दिनों में पडरी खास गांव से 25 कोरोना संदिग्धों को जांच के लिये स्वास्थ्य विभाग को भेजना पड़ा है. इस गांव में  कोविड 19 के " कम्युनिटी स्प्रीड" का खतरा पैदा हो गया. इसके बावजूद भी 19 मई को पडरी खास गांव से  जिन 4 लोगों को स्वास्थ्य विभाग जांच के लिये भेजा था उनको भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया. 24 घंटे से ज्यादा समय तक भूखे- प्यासे रहने के बाद 20 मई को चारो घर चले आये. घर पहुंचते ही  रामबृक्ष के चचेर भाई की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा है.

    गांवों में बने क्वारंटाईन केंद्रों की हालत तो बेहद खराब है. ग्राम प्रधानों के ऊपर इसकी जिम्मेदारी थोपकर जिला प्रशासन पल्ला छाड़ लिया है. दूसरी ओर ग्राम प्रधान फंड का रोना रो रहें हैं. ग्राम प्रधानों का कहना है कि क्वारंटाईन केंद्रों की देखभाल के लिए उन्हें धन नहीं मिला है. अपने जेब से जो बन पड़ रहा है वह कर रहें हैं.     यह बात शीशे की तरफ साफ हो गई है कि बाहर से आने वाले लोगों में कोविड 19 के भी वाहक हैं. इसके बावजूद भी कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिये न तो जिला प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है न ही स्वास्थ्य विभाग. होम क्वारंटाईन रहने का उपदेश देकर सभी अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा ले रहें हैं जबकि बाहर से आने वालों  की भीड़ गांवों मे बढ़ती जा रही है.

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :