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देहिंग पटकाई अभयारण्य में भी खनन

दिनकर कुमार

कोयला या अन्य प्राकृतिक संसाधनों के खनन में कोई बुराई नहीं है. लेकिन यह सवाल पैदा होता है कि खनन कार्य किस कीमत पर चलाया जा है. वन्यजीव की कीमत पर? यदि प्राकृतिक संसाधनों का खनन जंगली जीवों और वनस्पतियों के निवास को नष्ट कर देता है, तो क्या हमें रुक कर सोचना नहीं चाहिए? यही हाल असम के देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य में हो रहा है. देहिंगपटकाई वन्यजीव अभयारण्य विभिन्न प्रकार के जीवों और वनस्पतियों का एक घर है. इनमें कुछ लुप्तप्राय और गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं. इसके अलावा, यह एक नामित हाथी गलियारा है. ऐसी परिस्थितियों में इसकी जैव विविधता को बनाए रखने के लिए विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है.देश भर में चल रहे लॉकडाउन के बीच राज्य के देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य में कोयले के खनन की अनुमति देने के केंद्र के फैसले के खिलाफ असम में हितधारकों ने सड़कों पर और सोशल मीडिया दोनों प्लेटफार्मों पर अपना विरोध प्रदर्शन किया है.

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) से लेकर भारत के फॉरेस्ट मैन जादव पायेंग तक और अभिनेता आदिल हुसैन से लेकर गायक अंगराग पापोन महंत, वन्यजीव कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) के फैसले की आलोचना की है जिसने देहिंग पटकाई वर्षावन में कोयले के खनन की अनुमति दी है.

पूरब के अमेज़ॅन के रूप में मशहूर देहिंग पटकाई वर्षावन हाथियों सहित 40 से अधिक प्रजातियों का घर है. इनमें बड़ी बिल्लियों, भालू और प्रसिद्ध असम मैकाक की कई किस्में, 300 से अधिक पक्षियों की 40 से अधिक प्रजातियाँ, 40 से अधिक प्रकार के सरीसृप, पेड़ और 100 से अधिक किस्मों के ऑर्किड शामिल हैं.

प्रमुख पर्यावरणविद्, कार्यकर्ता, शिक्षक और छात्र सोशल मीडिया पर हैशटैग "कोल माफियाओं से पूरब के अमेज़न को बचाओ" और "मैं देहिंग पटकाई" हेशटैग के साथ  सीआईएल के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए एनबीडब्ल्यूएल के निर्णय के खिलाफ विरोध कर रहे हैं.

गौरतलब है कि 1973 में सीआईएल को 30 वर्षों के लिए एक खनन पट्टा दिया गया था. इसकी समाप्ति के बाद सीआईएल को मंजूरी के लिए आवेदन करना था, लेकिन उसने 2012 में आवेदन किया. जबकि खनन पिछले साल तक जारी रहा.तदनुसार असम के वन विभाग ने 2003 के बाद से 16 वर्षों के लिए अवैध खनन करने के लिए सीआईएल पर 43.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. वन विभाग ने लगभग देहिंग-पटकाई हाथी रिजर्व फॉरेस्ट की 73 हेक्टेयर भूमि के अंदर कथित अवैध गतिविधि के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.

अब यह सवाल उठता है कि एनबीडब्ल्यूएल उस संगठन को अनुमति कैसे दे सकता है जिसके खिलाफ अवैध व्यवहार के लिए जुर्माना लगाया गया? अगर यह पहले गलत था, तो अब भी गलत है. केंद्रीय पर्यावरण, वानिकी और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले एनबीडब्ल्यूएल को एक बार फिर से अपने फैसले पर सोचना चाहिए और प्राकृतिक पर्यावरण पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए.

स्थायी विकास की अवधारणा को वनों की कटाई और उत्थान के प्रभाव के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है. विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर वनों की कटाई केवल जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और समस्याओं को बढ़ाएगी. प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हमारे भविष्य के साथ छेड़छाड़ करने जैसा है. जब तक वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित हैं, तब तक मानव भी सुरक्षित हैं.देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य 111.19 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है जो डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों के अंतर्गत आता हैएनबीडब्ल्यूएल ने हाल ही में वन्यजीव अभयारण्य के साल्की क्षेत्र में एक कोयला खनन परियोजना को मंजूरी दी.ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन और ऑल असम मटक यूथ स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्यों ने मानव श्रृंखला बनाकर केंद्र के फैसले के खिलाफ तिनसुकिया जिले में विरोध प्रदर्शन किया. फैसले को न बदलने पर प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन तेज करने की धमकी दी है.

ऑल असम मटक यूथ स्टूडेंट्स यूनियन के एक नेता ने कहा, "हम केंद्र सरकार के फैसले के घोर विरोधी हैं. हम भारत के प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भेजेंगे. यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है, तो हम अपना विरोध तेज कर देंगे."

दूसरी ओर पद्म श्री जादव पाएंग,जिनको भारत के फॉरेस्ट मैन के रूप में भी जाना जाता है, ने केंद्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. जादव पाएंग ने कहा, "जलवायु और पर्यावरण की रक्षा के लिए कोयला खनन पर रोक लगनी चाहिए. देहिंग पटकाई वर्षावन में कोयला खनन से हमारी जलवायु, असम के पर्यावरण और उत्तर पूर्वी क्षेत्र के पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा." असम के लोगों ने  "सेव देहिंग पटकाई" और "सेव अमेजन ऑफ ईस्ट" के बैनर तले केंद्र के फैसले के खिलाफ ऑनलाइन विरोध प्रदर्शन भी शुरू किया है.

असमिया बॉलीवुड गायक अंगराग पापोन महंत ने ट्वीट किया, "दुनिया तब रोई जब अमेज़न में आग लगी! असम में देहिंग पटकाई भारत का सबसे बड़ा वर्षा वन है. हम पहले से ही जो कुछ कर रहे हैं उसके बीच में प्रकृति के साथ कोई और जोखिम नहीं उठा सकते!"

"देहिंग पटकाई वन को पूरब के अमेज़न के रूप में जाना जाता है. यह हाथियों के लिए घर और वनस्पतियों से समृद्ध है. यह समझने के लिए रॉकेट विज्ञान की जरूरत नहीं है कि हम एक वैश्विक पर्यावरण तबाही के कगार पर हैं"अभिनेता आदिल हुसैन ने ट्वीट किया.

देहिंग पटकाई में कोयले के प्रस्तावित खनन के खिलाफ विरोध को देखते हुए असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पिछले दिनों राज्य के वन मंत्री परिमल शुक्लबैद्य को अभयारण्य का दौरा करने और वहां की जमीनी स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया.एक आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कहा कि असम सरकार राज्य के पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और विकास की पहल के नाम पर अपने रुख के साथ कोई समझौता नहीं करेगी. सरकार ने हमेशा अपनी पारिस्थितिकी के साथ विकास को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.असम के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मंत्री परिमल शुक्लबैद्य वन्यजीव अभयारण्य की वर्तमान स्थिति का क्षेत्र अध्ययन करेंगे और अपनी यात्रा के दौरान अपने अनुभवों से सरकार को अवगत कराएंगे.फोटो साभार 

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