जनादेश

इस अंधविश्वास के पीछे है कौन ? सरगुजा की मांड नदी का बालू खोद डाला लैंसेट ने लेख क्यों वापस लिया? क्या बड़ा मेडिकल घोटाला है यह ! अमेरिकी आंदोलन को ओबामा का समर्थन ये फेक न्यूज़ फैलाते हैं ? भारत चीन के बीच शांति का रास्ता तिब्बत से गुजरता है - प्रो आनंद कुमार पांच जून 1974 को गांधी मैदान का दृश्य ! रामसुदंर गोंड़ की हत्या की हो उच्चस्तरीय जांच-दारापुरी घर लौटे मजदूरों से कानून-व्यवस्था को खतरा ? अंफन ने बदली सुंदरबन की तस्वीर और तकदीर बबीता गौरव से कौन डर रहा है अख़बार से निकले थे फ़िल्मकार बासु चटर्जी देश में कोरोना तो बिहार में होगा चुनाव ? बुंदेलखंड़ लौटे मजदूरों की व्यथा भी सुने ! बिहार को कितनी मदद देगा केंद्र ,साफ बताएं एजेंसी की खबरें भरते हिन्दी अखबार ! दान में भी घालमेल ! मंच पर गांधी थे नीचे मैं -पारीख पार्टी और आंदोलन के बीच संपूर्ण क्रांति इसलिए पांच जून एक यादगार तारीख है !

अवाम की जान सूली पर टांग दी है नीतीश कुमार ने

फज़ल इमाम मल्लिक 

पटना .कायदे से तो बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को उनके पद से हटाया जाना चाहिए था, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को ही पद से हटा डाला. कोरोना काल में मंगल पांडेय का सेवेदनहीन चेहरा तो सामने आया ही थी, लगातार गलत आंकड़े भी वे साझा करते रहे थे जिससे बिहार में भ्रम की स्थिति पैदा होती रही थी. चमकी बुखार के वक्त भी मंगल पांडेय, मंगल गान में लगे हुए थे और कोरोना काल में भी विज्ञान को झुटलाते हुए घंटी, थाली बजा और हवन कर कोरोना को भगाने की बात करते रहे हैं. बिहार में कोरोना से पसरे संकट के दौर में भी मंगल पांडेय गलत जानकारी देने की वजह से खबरों में थे. विभाग से उनका जिस तरह का तालमेल था, उसे देखते हुए तो नीतीश कुमार को उनसे या तो उनका इस्तीफा लेना चाहिए था या फिर बर्खास्त करना चाहिए था. लेकिन अंधेर नगरी और चौपट राजा वाली कहानी यहां फिट बैठती है. मंगल पांडेय को हटाने की बजाय स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार का तबादला कर दिया गया. उनकी जगह विवादित अधिकारी उदय सिंह कुमावत को प्रधान सचिव बनाया गया है. कोरोना संकट से जूझते बिहार में इस तबादले के बाद सरकार और राजा यानी नीतीश कुमार दोने कठघरे में हैं. 

संजय कुमार के तबादले की वजह सियासी ज्यादा है, प्रशासनिक कम. हालांकि कायदे से अभी उनका तबादला किया जाना सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि संजय कुमार पिछले कई महीने से कोरोना संकट के कामकाज को देख रहे थे. अब नए अधिकारी आएंगे तो नए सिरे से कामकाज को देखेंगे और इससे काम करने वालों की परेशानी बढ़ेगी. लेकिन नीतीश कुमार की अंतरात्मा जागी क्योंकि संजय कुमार अपने तरीके से काम कर रहे थे. कुछ ऐसे फैसले लिए जिससे नीतीश कुमार तिलमिलाए और फिर क्या था अंतरात्मा जाग गई. मजदूरों, शिक्षकों, किसनों और छात्रों की बेबसी और परेशानी के बावजूद उनकी अंतरात्मा सोई ही रही थी. लेकिन संजय कुमार के काम करने के तरीके ने नीतीश कुमार की सोई अंतरात्मा को जगाई क्योंकि संजय कुमार ने कुछ असहज करने वाले फैसले लिए थे. फिर किसी निरंकुश राजा की तरह उन्होंने संजय कुमार के तबादले का फरमान जारी कर डाला. 

आम दिनों में यह सामान्य बात थी. लेकिन कोरोना संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के तबादले को सामान्य या रूटीन तबादला तो नहीं ही कहा जा सकता. मंगल पांडेय से तो टकराव उनका था ही. लेकिन कई ऐसी बातें और थीं जो नीतीश कुमार को बेतरह चुभीं. ऐसा कहा जा रहा है कि संजय कुमार के कई फैसलों की वजह से नीतीश कुमार असहज थे. इससे उनकी नाराजगी बढ़ी और फिर तबादले की यह वजह बनी. सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा है कि करीब महीने-दो महीने पहले स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. सत्येंद्र नारायण सिंह को निलंबित कर दिया था. कोरोना नमूनों की जांच में उन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे थे. वैसे सियासत को नजदीक से जानने वाले यह भी जानते हैं कि सत्येंद्र नारायण सिंह का रसूख बिहार में सीधे सत्ता के शीर्ष तक है. कहा जाता है कि नीतीश कुमार से उनकी कई वजहों से याराना है. यह बात सच भी साबित हुई. उन्हें गंभीर आरोपों में आठ अप्रील को निलंबित किया गया लेकिन पांच दिन बाद ही उनका निलंबन वापस ले लिया गया और  डा. सत्येंद्र नारायण सिंह को फिर से पुराने पद पर बहाल भी कर दिया गया.


फिर कोरोना संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग ने कई डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही पकड़ी थी. उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही थी. कार्रवाई की जद में कुछ खास जिलों के कई डॉक्टर आए थे. ऐसा कहा जाता है कि सरकार उन डॉक्टरों पर कार्रवाई के खिलाफ थी. लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उसे नहीं समझा. डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो सरकार की बेचैनी बढ़ी. बिहार में यह बात भी आमतौर पर आम है कि सरकार मंत्री नहां बल्कि नौकरशाह चला रहे हैं. नीतीश कुमार के कुछ खास और चहेते अधिकारी हैं जो सरकार को चला रहे हैं और स्याह को सफेद बनाने के खेल में लगे हुए हैं. सियासी गलियारे में तो इस बात की भी चर्चा है कि नौकरशाहों के इस गिरोह के सामने पूरी राजसत्ता दरबारी की तरह रहती है.बिहार में ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर ठेका-पट्टे के सारे बड़े काम को यह गिरोह ही अंजाम दिया करता था लेकिन संजय कुमार की वजह से स्वास्थ्य विभाग में इनकी दाल नहीं गल रही थी. कहा तो यह भी जा रहा है कि विभाग पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए भी संजय कुमार को  वहां से हटवाया गया है.





            

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :