जनादेश

बिहार में कोरोना से फैली दहशत नेपाल में अब इमरजेंसी की भी आहट एक सवाल कभी नहीं मर सकता अति राष्ट्रवाद की राजनीति का परिणाम अखबारों की मोतियाबिंदी नजर राजनीतिशास्त्र अपराधशास्त्र की ही एक शाखा है उत्तर प्रदेश में फिर लॉक डाउन ,फ़िलहाल तीन दिन का विकास दुबे की कहानी में कोई झोल नहीं है ? बिहार में राजनीति तो बंगाल में लापरवाही का नतीजा सामने तो बच्चों के दिमाग से लोकतंत्र हटा देंगे ? अपना वादा भूल गए नीतीश दलाई लामा से यह बेरुखी क्यों ? बारूद के ढेर पर बैठा है पटना विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए जब तक जिए शान से जिये चन्द्रशेखर असली समस्या तो बुद्धि है सादगी में मुस्कुराता चेहरा यानी चंद्रशेखर गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह गुजर जाना एक दरख्त का जोमैटो में चीन का निवेश रुका

सभी के लिए पौष्टिक और भर पेट भोजन

आलोक कुमार 

श्योपुर. श्योपुर जिला मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है. श्योपुर के पूर्व में मध्य प्रदेश के शिवपुरी,पश्चिम में राजस्थान के कोटा, उत्तर में मुरैना, ग्वालियर एवं दक्षिण में राजस्थान के कोटा जिले से जुड़ा हुआ है. यह जिला सड़क मार्ग से व्यवस्थित रूप से जुड़ा हुआ है. श्योपुर ग्वालियर नैरोगेज लाईन से भी जुड़ा हुआ है. यहा से विजयपुर, कराहल और बड़ौदा के लिए परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं. और यहा से राजस्थान का जिला सवाई माधोपुर के लिये भी परिवहन सेवाएं उपलब्ध है पालपुर (कुनो) की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी यहां का मुख्य पर्यटन स्थल है. ककेता जलाशय भी मुख्य रूप से इसी जिले में है. यह जिला लकड़ी के फर्नीचर के लिए भी प्रसिद्ध है. यहाँ पर सागौन के दरवाजे, खिड़की आदि बहुत ही खुबसूरत ढंग से बनाए जाते हैं. जिले में मुख्य रूप से चंबल, सीप और कुनो नदियाँ बहती हैं. चंबल नदी इंदौर से होते हुए दक्षिण-पूर्व मध्य प्रदेश की ओर बहती है.श्योपुर जिले को हिन्दु देवी देवताओ प्रति आस्था वाला जिला माना जाता है! यहाँ से प्रति वर्ष सावन के महिने मैं बहुत दूर दूर जैसे कि गोवर्धन (मथुरा) ,केलादेवी (करोली),श्रीजी (दिग्गीपुरी राजस्थान ), त्रिनेत्र गनेश जी (सवाई माधोपुर ) आदि जिलों में पदयात्रा जाती हैं, जिले के 15 प्रतिशत गाँव सड़क व रेल मार्ग से जुड़े हुए हैं. सड़क मार्ग सभी तहसील मुख्यालयों से जुड़ा हुआ है. श्योपुर की कराहल तहसील में प्रदेश की सहरिया जनजाति निवास करती है.

देश से गरीबी दूर करने का ऐलान किया जाता है परन्तु आजादी के 73 साल के बाद भी गरीबी दूर नहीं हुई. लेकिन कुकुरमुत्ता की तरह बढ़ते ही जा रहा है. विदेशी वित्तीय सहयोग से धन्य होकर महात्मा गांधी सेवा आश्रम ने श्योरपुर जिले को पूर्ण रूप से कुपोषण मुक्त करने का बीड़ा उठाया है. इसका मतलब है कि मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी केन्द्र का कार्य बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है. जिसके कारण एनजीओ का सहारा लिया जा रहा है. 

जर्मन सरकार द्वारा पोषित बीएम जेड और डब्ल्यू एच एच के वित्तीय सहयोग से महात्मा गांधी सेवा आश्रम द्वारा कराहल क्षेत्र के चिन्हित 5000 बच्चों को पूरक पोषण आहार 2 महीने तक उपलब्ध कराया जाएगा ताकि एक भी बच्चा कुपोषित ना रहे. पोषण समृद्ध गांव योजना के अंतर्गत चलाए जा रहे इस पोषण अभियान में प्रत्येक गांव और परिवार को पोषण समृद्ध बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है इसी के तहत 5000 कमजोर बच्चों को  चिन्हित करके नियमित रूप से बाल सुलभ पोषक तत्वों से भरपूर न्यूटी मिक्स उपलब्ध कराया जाएगा . 


यह न्यूट्री मिक्स पूरक पोषण आहार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषण सामग्री से गांव गांव में तैयार कराया जाएगा ताकि प्रत्येक गांव की सभी महिलाएं घर में उपलब्ध खाद्य सामग्री से पोषण आहार तैयार कर अपने बच्चों को स्वस्थ एवं पोषक रख सकें तथा गांव की निर्भरता बाहर के संसाधनों पर नहीं रहे इसलिए इस न्यूट्रिमिक्स को तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की खोज की गई जिसमें इस क्षेत्र में गेहूं का अनाज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तथा इसका उत्पादन इस क्षेत्र में किया जाता है दूसरा अनाज चना तथा मूंग की दाल जिनमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं यह दोनों अनाज भी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध है तीसरे अनाज के रूप में ऐसे अनाज को चुना जाता है जिसमें अनेकों पोषक तत्व के साथ वसा की मात्रा भी उपलब्ध हो इनमें से मूंगफली या तिल्ली का उपयोग पोषण आहार के लिए बहुत उपयोगी होता है और यह दोनों अनाज भी स्थानीय स्तर पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है.

पोषण समृद्ध गांव योजना की पोषण विशेषज्ञ सुश्री शबनम अफगानी ने गढ़ला गांव मैं पूरक पोषण आहार के बनाने की विधि 1 दर्जन से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से बताई जहां सबसे पहले गेहूं ,चना तथा मूंगफली के दानों को साफ कराया गया उसके बाद एक-एक कर तीनों अनाजों को अलग अलग कढ़ाई में भुना गया इसके पश्चात तीनों अनाजों को अलग अलग चक्की से पीस  कराते के रूप में तैयार किया गया. अब एक कटोरी भुने हुए गेहूं के आटे में ,आधी कटोरी भुने हुए चने का आटा मिलाकर आधी कटोरी भुने हुए मूंगफली के दानों का चूर्ण मिलाकर पोषण आहार तैयार किया गया अब यह पोषण आहार 5 महीने से 6 साल तक के बच्चों को खिलाने के लिए तैयार हो गया इसके पश्चात छोटे बच्चों की माताओं को कटोरी चम्मच से गुड़ का घोल बनाकर उसमें न्यूट्री मिक्स का पाउडर मिलाकर खाने योग्य तरल बनाया गया उसके बाद जब चम्मच से बच्चों को खिलाया तो 4 साल का बच्चा आराम से एक बार में एक कटोरी आहार खा गया यहीं से बच्चे के सुपोषण की शुरुआत होती है.

सुपोषण अभियान का नेतृत्व कर रही  शबनम अफगानी ने बताया कि जून के महीने तक हम 5000 बच्चों तक पूरक पोषण आहार के रूप में न्यूटी मिक्स पहुंचाने का काम करेंगे साथ ही साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सुपरवाइजर तथा जिला महिला एवं बाल विकास के जिला अधिकारी के सानिध्य में सुपोषण अभियान को गति प्रदान करेंगे इस अभियान में सुपोषण अभियान के क्षेत्रीय कार्यकर्ता पवन शिवहरे नीरज श्रीवास्तव संदीप भार्गव आशीष यादव तथा योजना समन्वयक श्री प्रशांत थोटे भी शामिल हुए.

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