जनादेश

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यह बदख्शां तरबूज़ है

डॉ शारिक़ अहमद ख़ान

आजकल तरबूज़ों का मौसम है.जब बाबर हिंदोस्तान आया तो लिखता है कि यहाँ तरबूज़ -खरबूज़ -अंगूर नहीं पाए जाते हैं.ना बर्फ़ है ना ठंडा पानी.किसी ने एक बार बाबर को एक खरबूज़ भेंट किया तो उसे खाने के दौरान बाबर रोने लगा.बाबर ने जब सल्तनत स्थापित कर ली तो बल्ख़ से एक सिद्धहस्त बाग़वान को आगरा बुलवाया और तरबूज़ -खरबूज़ -अंगूर उगाने का हुक़्म दिया.जो तरबूज़ आजकल बाज़ार में ज़्यादा दिखता है जिसमें हरी धारियां होती हैं यह बदख्शां तरबूज़ है.बदख्शां  अफ़ग़ानिस्तान में एक जगह है जो इस तरबूज़ की खेती के लिए प्रसिद्ध है. अफ़ग़ानिस्तान में कुल 36 किस्म के तरबूज़ -खरबूज़ पैदा होते थे जिनको हिंदोस्तान में मुग़ल बादशाहों ने सबसे पहले ख़ुद खाने के लिए अपने शाही बाग़वानों की निगरानी में आगरा में उगवाया.

बाद में इसके बीज आम नागरिकों में तक्सीम करवाए ताकि तरबूज़-खरबूज़ बड़ी तादाद में उगाए जा सकें. बल्ख़-बुखारा -समरकंद -बदख़्शाँ वग़ैरह से आगरा लाकर उगाए गए जिन तरबूज़ों -खरबूज़ों को लगवाया गया उनमें नाशपाती ,दूद-ए-चिराग़, बर्ग़-ए-नई, अलीशेरी, मीर -तैमूरी, ख़ोरासवी,बदख्शां ,कुन्दुज़ प्रमुख हैं.यूँ तो गुजरात के अहमदाबाद के शेख़ों ने भी तरबूज़-खरबूज़ की किस्में ईरान से लाकर अपने यहाँ लगवाईं लेकिन जब एक बार मुग़ल बादशाह ने उनको बल्ख़ से मंगाए गए और अपने आगरे में उगाए गए खरबूज़ तोहफ़े में भेजे तो देखकर चकित रह गए.अाज से कुछ बरस पहले तक ये हरी धारी वाले बदख़्शाँ के तरबूज़ कम दिखाई देते थे. पूरे हरे तरबूज़ दिखते और बोए जाते जिनको देसी तरबूज़ भी कहा जाता है.ये तरबूज़ ' कुन्दु़ज़ तरबूज़ ' कहलाते थे जो अफ़ग़ानिस्तान के कुन्दुज़ नामक स्थान पर पाए जाने के कारण कुन्दुज़ तरबूज़ के नाम से मशहूर थे और आगरा में सबसे पहले अकबर के बागीचे में उगाए गए.ये ज़्यादा मीठे होते थे,उत्तर प्रदेश के इलाके में देसी तरबूज़ बोले जाते थे.अब भी मिलते हैं लेकिन कम पाए जाते हैं.ख़ुद किशोरावस्था में मैंने इस किस्म के तरबूज़ और फूट अपने खेतों में उगाए थे.फूट को गुड़ की राब के साथ खाने में बहुत मज़ा आता है..बीती सदी के आखिरी दशक तक हरे कुन्दुज़ तरबूज़ों का राज था.आजकल बदख़्शाँ के तरबूज़ों का बाज़ार में राज है.अब तो हाईब्रिड नस्ल के तरबूज़ भी आ रहे हैं जो कई तरबूज़ों की मिक्स किस्म हैं.तरबूज़ के बारे में हम ये पहले भी बता चुके हैं.आज एक गोल और हरा वाला तरबूज़ लाए.एक पसेरी का तरबूज़ किसान ने बीस रूपये में दे दिया.कोरोना के दौर में तरबूज़ का भाव धड़ाम है.फ़्रिज में रखकर ठंडा किया और काटा.वैसे तरबूज़ को फ़्रिज में नहीं पानी भरी बाल्टी में डालकर ठंडा करना चाहिए.गर्मियों में सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है तरबूज़.तरबूज़ खाना चाहिए.आज़मगढ़ ज़िले में एक तरबूज़ का मेला भी लगता है.

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