जनादेश

बिहार में कोरोना से फैली दहशत नेपाल में अब इमरजेंसी की भी आहट एक सवाल कभी नहीं मर सकता अति राष्ट्रवाद की राजनीति का परिणाम अखबारों की मोतियाबिंदी नजर राजनीतिशास्त्र अपराधशास्त्र की ही एक शाखा है उत्तर प्रदेश में फिर लॉक डाउन ,फ़िलहाल तीन दिन का विकास दुबे की कहानी में कोई झोल नहीं है ? बिहार में राजनीति तो बंगाल में लापरवाही का नतीजा सामने तो बच्चों के दिमाग से लोकतंत्र हटा देंगे ? अपना वादा भूल गए नीतीश दलाई लामा से यह बेरुखी क्यों ? बारूद के ढेर पर बैठा है पटना विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए जब तक जिए शान से जिये चन्द्रशेखर असली समस्या तो बुद्धि है सादगी में मुस्कुराता चेहरा यानी चंद्रशेखर गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह गुजर जाना एक दरख्त का जोमैटो में चीन का निवेश रुका

साइकिल दिवस पर शहीद हुई एटलस साइकिल !

 प्रभात डबराल

नई दिल्ली .विश्व साइकिल दिवस पर कल एटलस साइकल वालों ने अपनी तीसरी फैक्ट्री भी बंद कर दी. पहली २०१४ मे और दूसरी २०१८ मे बंद हुई थी.स तरह देश का एक और अपना ब्रांड आत्मघाती अर्थनीति की भेंट चढ़ गया. हम लोग “आत्मनिर्भरता” की ओर एक कदम आगे और बढ़ गए.सबसे बड़ा कारण: चीन से सस्ती साइकिलों का आयात. बांग्लादेश से जो साइकिलें आ रही हैं वो भी ज़्यादातर चीन की ही बनी हुई हैं.

याद है साहेब ने क्या कहा था. चीन से झुकना नहीं चाहिए.लाल लाल आंख दिखा के बात करनी चाहिए. और खुद क्या किया? चीनी राष्ट्रपति को घर बुलाकर झूला झुलाया, तीन हज़ार करोड़ की तो मूर्ति ही बनवा ली. देश की अर्थव्यवस्था के दरवाज़े चीन के लिए खोल दिए.नतीजा: चीन के साथ हमारे व्यापार को घाटा जो १९१५ मे ४८.५ अरब डालर था २०१७ मे बढ़कर ५२.७ और २०१८ मे ५८ अरब डालर हो गया. इधर कुछ सुधार दिख रहा है क्योंकि कोरोना के कारण वहां  उत्पादन कम रहा.

जान लीजिए कि डिप्लोमेसी और व्यापार एक दूसरे पर निर्भर हैं. डिप्लोमेसी पिटी हुई हो तो व्यापार नहीं पनप सकता. साहेब और उनके समर्थकों की दादागिरी ने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश को नाराज़ कर दिया है. इस इलाक़े की डिप्लोमेसी के सूत्र हमारे हाथ से निकलकर चीन के हाथ मे चले गए हैं. वो जब चाहे हाथ मरोड़कर जो चाहे हासिल कर ले रहा है.मीडिया कुछ भी कहता रहे डोकलाम से लेकर लद्दाख तक हर बार हमने पाया कम, खोया ज़्यादा है. व्यापार घाटे का बढ़ते जाना इसका एक संकेत है.‘लाल लाल आंख  तो ग़ायब हैं ही रीढ़ भी नहीं दिख रही.

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं 

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