जनादेश

बिहार में कोरोना से फैली दहशत नेपाल में अब इमरजेंसी की भी आहट एक सवाल कभी नहीं मर सकता अति राष्ट्रवाद की राजनीति का परिणाम अखबारों की मोतियाबिंदी नजर राजनीतिशास्त्र अपराधशास्त्र की ही एक शाखा है उत्तर प्रदेश में फिर लॉक डाउन ,फ़िलहाल तीन दिन का विकास दुबे की कहानी में कोई झोल नहीं है ? बिहार में राजनीति तो बंगाल में लापरवाही का नतीजा सामने तो बच्चों के दिमाग से लोकतंत्र हटा देंगे ? अपना वादा भूल गए नीतीश दलाई लामा से यह बेरुखी क्यों ? बारूद के ढेर पर बैठा है पटना विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए जब तक जिए शान से जिये चन्द्रशेखर असली समस्या तो बुद्धि है सादगी में मुस्कुराता चेहरा यानी चंद्रशेखर गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह गुजर जाना एक दरख्त का जोमैटो में चीन का निवेश रुका

बिहार को कितनी मदद देगा केंद्र ,साफ बताएं

आलोक कुमार

पटना. बिहार के उघोग मंत्री हैं श्याम रजक. उन्होंने कहा कि मैंनें केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को पत्र लिखकर आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत 20 लाख करोड़ के कोरोना राहत पैकेज में राज्यों की हिस्सेदारी निर्धारित करने की तथा इस पैकेज के तहत एमएसएमई को दिए जाने वाले तीन लाख करोड़ में बिहार की हिस्सेदारी तय करनें की मांग की है.

 उघोग मंत्री श्याम रजक ने कहा कि ऐसा नहीं करने से बिहार जैसे राज्यों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा.लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम श्रेणी के उद्यम के लिए तीन लाख करोड़ रुपये बिना गारंटी ऋण देने का पैकेज केंद्र सरकार ने घोषित किया है. बिहार में बैंकों का ऋण देने के मामले में काफी नकारात्मक रवैया रहा है, वहीं साख-जमा अनुपात भी दर्शाता है कि बिहार में बैंक उद्यमियों को कर्ज देने में हीलाहवाली करती है. लिहाजा, तीन लाख करोड़ में बिहार के उद्यमियों के लिए हिस्सेदारी तय नहीं होगी, तो यहां के उद्यमी लाभान्वित नहीं होंगे. इस राहत पैकेज का उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा.

 कोरोना के कारण सबसे अधिक आर्थिक संकट और चुनौतियों से बिहार को जूझना पड़ रहा है. बड़ी तदाद में प्रवासी मजदूर बिहार लौटें हैं, उनको रोजगार देने का निश्चय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया है. लिहाजा, केंद्र 20 लाख करोड़ के पैकेज में बिहार जैसे राज्य के लिए अलग से कोष एवं हिस्सेदारी तय करे.

 बिहार में मखाना, मक्का, मगही पान, जर्दालु आम, शाही लीची, शहद और लाल आलू उत्तम गुणवत्ता के पाए जाते हैं. इनके माइक्रो फूड इंटरप्राइजेज के क्लस्टर डेवलपमेंट की जरूरत है. जिससे हम लोकल के लिए वोकल हो सकें और इसे ग्लोबल बना सकें. इसके अलावा मैंने बाढ़ और सूखाड़ से सबसे ज्यादा प्रभावित 15 जिलों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के लिए लोन पर 2 प्रतिशत की आर्थिक सहायता देने की मांग की. इससे दूसरे शहरों में जाकर काम करने वाले बिहार के मजदूरों में कमी आएगी.


बिहार को उत्तर भारत में फूड प्रोसेसिंग हब बनाने के लिए जापानी उद्योग टाउनशिप के लिए बिहार पर भी विचार करने का आग्रह किया. यदि बिहार में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगते हैं तो यहां के बने माल को नेपाल, भूटान और बांग्लादेश आसानी से निर्यात किया जा सकता है. बिहार के पास उपजाऊ भूमि, प्रचूर जल संसाधन और कुशल और मेहनती लोग हैं. बिहार देशी और विदेशी कपनियों के लिए एक अच्छा डेस्टिनेशन है. इससे न सिर्फ राज्य को बल्कि निवेशकों को भी फायदा होगा।

उघोग मंत्री ने वित्त मंत्री जी से मधुबनी पेंटिंग, खादी, रेशम और हस्तकरघा उद्योग पर ध्यान देने का आग्रह किया. यदि इनपर अच्छी तरह ध्यान देकर इन्हें सहायता पहुंचाई जाए तो इनका तेजी से विकास होगा और इससे घर वापस लौटे लाखों प्रवासी लोगों को रोजगार मिलेगा. वित्त मंत्री जी से मांग की है कि राज्य वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए विशेष प्राथमिकता दी जाए. देश में लगभग 1.5 करोड़ प्रवासी मजदूर बिहार के है। कोरोना वायरस महामारी के कारण इन सभी का रोजगार छिन गया और सभी अपने घर वापस आ गए हैं. इन सभी को रोजगार देने के लिए हमें विशेष सहायता राशि की जरूरत है.

 चन्द्रमा यादव ने कहा कि बिहार वासियों के कल्याण एव उन्हें विकास की पटरी पर बनाये रखने के लिए केंद्र से शानदार और जानदार प्रस्ताव किये हैं मंत्री जी.आप अपने प्रदेश की फायदे के लिए सदैव सतर्क है.पूर्व का भी आपकी जीवन इतिहास रहा है कि आप जहां भी रहे हैं वहां अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन की दिशा में चार चांद लगा दिए हैं.यही कारण है कि आप जैसे पुरसार्थी नेता को हमेशा जिम्मेदारी में रखे जाने की जरूरत समझा जाता है. जमील अंसारी गुड्डू ने कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनावी साल है. जितना हो सके, इतना ढोंग कीजिए.वैसे नहीं भी कीजियेगा, तो भी सत्ता में रहियेगा. सत्ता का मलाई कैसे खाया जाता है आपको भली भाँति आता है.

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