जनादेश

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देश में कोरोना तो बिहार में होगा चुनाव ?

डा लीना

पटना. कोरोना संक्रमण के बीच बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी है.  राज्य में राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं. हालांकि अभी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवास सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चुनाव की आरंभिक तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं. तो मुख्यमंत्री सहित, सभी सत्तारूढ़ दल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चुनावी रैली और वार्ता करने में जुट गए हैं. वहीं विपक्षी दलों द्वारा इनके आभासी रैलियों का विरोध जारी है.

निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां अपने स्तर से शुरू कर दी हैं. 2 जून को बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवास ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चुनाव की आरंभिक तैयारियों की समीक्षा की और कई दिशा-निर्देश दिए. सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को मतदान केंद्रों का भौतिक सत्यापन, बजट का आकलन, निर्वाचन व्यय और निर्वाचन सामग्रियों की उपलब्धता की जानकारी आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम जल्द शुरू करने और इसके लिए नई तारीखों की घोषणा की बात कही. बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जिलों को कर्मचारियों का डाटाबेस और प्रशिक्षण के लिए शेड्यूल तैयार करने का भी निर्देश दिया.

इधर, मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत 7 जून से करने वाले हैं. मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नेताओं-कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे. वे जिलाध्यक्ष, प्रखंड, पंचायत, बूथ अध्यक्ष से जिलावार बातचीत करेंगे. पहले चरण में नीतीश कुमार ने 1 मई से राज्यस्तरीय नेताओं, कार्यकारिणी के सदस्यों, जदयू कोटे के मंत्रियों, विधायकों, जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी, प्रखंड अध्यक्ष, पंचायत अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष तक से बातचीत की थी.


केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की वर्चुअल रैली तो चर्चा का विषय बना हुआ है ही. उनकी यह रैली 7 जून को होगी. पहले यह 9 जून को होने वाली थी.  शाह डिजिटल माध्यमों से पूरे प्रदेश के लोगों को एकसाथ संबोधित करेंगे. राज्य में यह अपने तरीके की पहली रैली होगी. पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पूरे प्रदेश में कई वर्चुअल रैलियों का आयोजन करेगी. शाह की रैली इसकी शुरुआत है. इस कार्यक्रम का प्रसारण पार्टी के सोशल मीडिया चैनलों के साथ-साथ विभिन्न स्थानों पर टीवी स्क्रीन लगा कर भी करने के प्रबंध किये जा रहे हैं, जिससे इस कार्यक्रम की पहुंच वैसे लोगों तक भी हो सके जिनके पास स्मार्ट फोन या लैपटॉप की सुविधा उपलब्ध न हो. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने बताया कि हर बूथ और शक्ति केंद्रों पर भाजपा के पदाधिकारी इस आयोजन के लिए तैनात हो चुके हैं. इसके अलावा मंडल स्तर पर भी इस आयोजन के लिए विशेष नियुक्ति हो चुकी है. प्रदेश स्तर पर वरीय नेताओं के मार्गदर्शन में पार्टी की आईटी टीम भी लगातार काम में जुटी हुई है.

इधर, एनडीए में सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने भी चुनाव तैयारी का बिगुल फूंक  दिया है. वह भी जल्द ही अपने प्रत्याशियों का चयन करेगी. लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह जमुई सांसद चिराग पासवान ने 3 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं व पदाधिकारियों से वार्ता करते हुए बिहार चुनाव की तैयारी करने का निर्देश दिए है. पार्टी जल्द ही प्रत्याशियों का चयन कर उन्हें सम्बंधित तैयारी करने को कहेगी. चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय कमेटी के सदस्यों, संसदीय बोर्ड के सदस्यों एवं सभी प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय अध्यक्षों से बात भी की.

इधर, बिहार में विपक्षी दल भाजपा की वर्चुअल रैली का विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस ने जहां आरोप लगाया कि कोरोना संकट के दौर में भाजपा पर चुनावी धुन सवार है. तो वहीं रैली के विरोध में 7 जून को राजद गरीब अधिकार दिवस और वाम दल राज्यव्यापी विश्वासघात धिक्कार दिवस मनाएंगे.नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा ‘वर्चुअल' रैली के ढोंग से जमीन की सच्चाई को छिपाना चाहती है. लोग कोरोना और भूख से मर रहे है लेकिन भाजपा रैली कर रही है. राजद थाली पीटकर उसकी पोल खोल देगा. राजद के सभी कार्यकर्ता, समर्थक और बिहारवासी 7 जून को अपने-अपने घरों के बाहर सुबह 11 बजे थाली-कटोरा बजाएंगे. उस दिन सुबह 11 बजे गरीब अधिकार दिवस मनाएंगे. 3 जून को उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि इस विपदा में सरकार ने किसान, मजदूर और भूखे की थाली खाली रखी है. वह इसी कड़वी सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रही है.

भाजपा की वर्चुअल रैली के खिलाफ सभी वाम दल 7 जून को राज्यव्यापी विश्वासघात धिक्कार दिवस मनाएंगे. भाकपा, माकपा, भाकपा माले के नेताओं ने 3 जून को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कोरोना आपदा से निपटने में विफल सरकार गरीब मजदूरों के जीवन और जीविका को खतरे में डालकर यह रैली कर रही है. सरकार को ऐसी आभासी रैली नहीं करके रोजगार देने और कोरोना से बचाव की गारंटी देनी चाहिए. जन शक्ति भवन में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि वर्चुअल रैली के विरोध में भोजन रोजगार की सुरक्षा के नारे लगाए जाएंगे.

वर्चुअल रैली पर कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने आरोप लगाया कि कोरोना संकट के दौर में भी भाजपा को चुनावी धुन सवार है.  उन्होंने कहा कि इस विपत्ति काल में जब बिहार दोहरी मुसीबत झेल रहा है, लोग रोजी-रोजगार की समस्या से पीड़ित हैं. दूसरी ओर उनके प्रदेश लौटने की दुश्वारियां. राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या बेलगाम बढ़ रही है. ऐसे में बिहार की जनता की सेवा के बजाय भाजपा नेता शाह का वर्चुअल रैली करना दर्शाता है कि भाजपा सिर्फ चुनाव और सत्ता प्राप्ति की ही चिंता करती है, देश की पीड़ित जनता की चिंता उसे नहीं है.

जबकि, बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा रैली का विरोध तर्कसंगत नहीं है. सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि गृहमंत्री अमित शाह गरीबों के लिए किये कार्य और मोदी-2 की एक साल की उपलब्धियों पर वर्चुअल रैली के जरिये बिहार के लोगों से बात करना चाहते हैं, तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है. क्या देश के गृहमंत्री का जनता से संवाद करना अलोकतांत्रिक है. क्या वर्चुअल माध्यम का विरोध उचित है, जो अब न्यू नॉर्मल बनता जा रहा है. गौरतलब है कि पहले कोरोना के कारण चुनाव टलने की आशंका जताई जा रही थी. लेकिन चुनाव आयोग की भी कवायद को देखकर अब लगता है कि बिहार में विधानसभा चुनाव समय पर ही अक्तूबर- नवंबर में ही होंगे. देखने वाली बात होगी कि जहां सत्ता पक्ष आभासी माध्यम से चुनावी तैयारियों में लग गया है वहीं विपक्ष महज इसका विरोध कर रहा है.  देखने वाली बात यह होगी कि किसको कितना फायदा होगा.फोटो साभार 


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