जनादेश

बिहार में कोरोना से फैली दहशत नेपाल में अब इमरजेंसी की भी आहट एक सवाल कभी नहीं मर सकता अति राष्ट्रवाद की राजनीति का परिणाम अखबारों की मोतियाबिंदी नजर राजनीतिशास्त्र अपराधशास्त्र की ही एक शाखा है उत्तर प्रदेश में फिर लॉक डाउन ,फ़िलहाल तीन दिन का विकास दुबे की कहानी में कोई झोल नहीं है ? बिहार में राजनीति तो बंगाल में लापरवाही का नतीजा सामने तो बच्चों के दिमाग से लोकतंत्र हटा देंगे ? अपना वादा भूल गए नीतीश दलाई लामा से यह बेरुखी क्यों ? बारूद के ढेर पर बैठा है पटना विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए जब तक जिए शान से जिये चन्द्रशेखर असली समस्या तो बुद्धि है सादगी में मुस्कुराता चेहरा यानी चंद्रशेखर गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह गुजर जाना एक दरख्त का जोमैटो में चीन का निवेश रुका

अख़बार से निकले थे फ़िल्मकार बासु चटर्जी

अमिताभ 

तीसरी क़सम में बासु भट्टाचार्य के सहायक निर्देशक से अपना फ़िल्म करियर शुरू करने वाले बासु चटर्जी फिल्मो में आने से पहले कार्टूनिस्ट थे और ब्लिट्ज से जुड़े थे. बतौर फ़िल्म निर्देशक राजेंद्र यादव के उपन्यास सारा आकाश के फ़िल्मांकन से पारी शुरू की. उसके बाद अमोल पालेकर को लेकर चितचोर, रजनीगंधा, छोटी सी बात, बातों बातों में बनाई. शौक़ीन में तीन बूढ़े पात्रों की काॅमेडी थी. अशोक कुमार का लाजवाब अभिनय कौन भूल सकता है. गिरीश कर्नाड और शबाना आज़मी को लेकर स्वामी फ़िल्म बनाई जिसका गाना का करूँ सजनी बहुत लोकप्रिय हुआ. बासु चटर्जी ने अमिताभ बच्चन, देव आनंद, राजेश खन्ना, जीतेंद्र , मिथुन चक्रवर्ती के साथ भी फ़िल्में बनाईं जिन्हें सराहना भी मिली और कुछेक को छोड़कर बाक्स आॅफिस पर ठीकठाक कमाई भी की.

हल्की फुल्की फ़िल्मों के महारथी बासु चटर्जी ने एक रुका हुआ फ़ैसला जैसी गंभीर फ़िल्म बनाकर चौंका दिया था. दूरदर्शन के लिए उनके धारावाहिक रजनी और व्योमकेश बक्शी बहुत चर्चित रहे.विनम्र श्रद्धांजलि.


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