नायाब है बीज बम आइडिया

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नायाब है बीज बम आइडिया

नैनीताल .द्वारिका प्रसाद सेमवाल का बीज बम आइडिया काफी यूनिक है, खासकर अब बरसात के दौरान पर्याप्त नमी सोख चुकी जमीन को हरा भरा करने के लिए. उत्तरकाशी में शायद ही लोग द्वारिका सेमवाल के नाम से वाकिफ न हों. बेतरतीब ढंग से पहना गया रंगत खो चुका खादी का कुर्ता पजामा, दिन भर दौड़ धूप में जुटे द्वारिका से उत्तरकाशी शहर में घूमते हुए आपकी कई बार आमना सामना हो सकता है.

द्वारिका सेमवाल से पहचान करीब दस साल पुरानी है तब वह नदी बचाओ अभियान में हमारे सहयात्री थे, उसके बाद मेल मिलाप बढ़ता रहा. 2012 व 2013 में उत्तरकाशी में आई आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्य में उन्होंने खूब काम किया. इसके बाद अपनी संस्था ‘जाड़ी’ के जरिए गांव गांव में आजीविका संवृद्धन पर अगले दो तीन साल तक काम किया. बकरी पालन, सब्जी उत्पादन, गोबर गैस समेत कई नवाचारी विचारों को धरातल पर उतारा. इन दिनों कोरोना वारियर के तौर पर काम कर रहे हैं, दिन रात मजबूर प्रवासियों, मजदूरों, गरीबों की मदद के लिए तंत्र को झकझोरने के अलावा आपदा प्रबंधन जन मंच के जरिए हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं.

अब आते हैं उनके यूनिक आइडिया बीज बम पर. मिट्टी और गोबर को मिलाकर एक गोला बनाकर उसमें कुछ बीज डालकर इसे जंगल में खाली जमीन पर फेंक दो, जमीन से नमी मिली तो पौधा तैयार. विचार यह है कि इससे जंगलों में हरियाली मिलेगी तो शाकाहारी जंगली जानवरों को जरूरी आहार भी जंगल में ही उपलब्ध हो सकेगा तो वह गांव बसावट की ओर भोजन की तलाश में नहीं आएंगे. बीज बम का यह विचार लोगों को खूब भी भा रहा है, द्वारिका गाजणा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं और इन दिनों जब कोरोना संकट के चलते प्रवासी वापिस लौट रहे हैं और स्कूल भवनों में क्वारंटीन हो रहे हैं तो ऐसे में प्रवासियों को यह बीज बम का विचार खूब भाया है. बताया जा रहा है कि गाजणा क्षेत्र में प्रवासियों ने बीस हजार बीज बम तैयार किए हैं. इन्हें जंगलों में, खाली जमीनों में फेंका जाएगा, मानसून दस्तक देने वाला है और मानसून से पूर्व खूब बारिश हो चुकी है ऐसे में जमीन में पर्याप्त नमी है और बीज बम में रखे बीजों को पनपने के लिए मुफीद माहौल. लिहाजा बीस हजार बीज बम का परिणाम उम्मीदों के मुताबिक रहा तो मानसून के दौरान यह द्वारिका सेमवाल का यह विचार हरियाली लाएगा.

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