बिहार में गैंडों की संख्या तेजो से बढ़ी

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बिहार में गैंडों की संख्या तेजो से बढ़ी

 संजय कुमार

पटना. पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान एक बार फिर से चर्चे में है. पटना ज़ू ने राइनो(गैंडा) ब्रीडिंग के मामले में दुनिया में अमेरिका के सेंटियागो जू को पछाड़ दिया है. यह तब हुआ जब रानी नमक गैंडे ने 16 जून को एक बच्चे को जन्म दिया है. बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और अपनी मां के साथ उद्यान में मटक मटक कर चल रहा है. पटना ज़ू में अब इस बच्चे को जोड़ कर गैंडों की संख्या 13 हो गई है. इसमें 11 वयस्क और 2 बच्चे हैं. इसके साथ ही पटना ज़ू ने गेंडों की संख्या के मामले में अमेरिका के सेंटियागो जू को पीछे छोड़ दिया है यहाँ पर 12 गेंडें हैं .

वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पटना जू का राइनो (गेंडा) ब्रीडिंग दुनिया भर में प्रसिद्ध है. राइनो ब्रीडिंग में दुनिया भर में अमेरिका के सेंटियागो चिड़ियाघर के बाद दूसरे नंबर पर आता है. जबकि भारत में इसका पहला स्थान है. पटना चिड़ियाघर में राइनो ब्रीडिंग सेंटर भी बनाया गया है.इसके पूर्व गौरी नामक गैंडा ने 8 मई 2020 को एक बच्चे को जन्म दिया था उसी समय रानी नाम की एक और मादा भी अगले महीने बच्चे को जन्म देने वाली थी और 16 जून को रानी ने सुबह 4.30 बजे बच्चे को जन्म दे कर पटना ज़ू का नाम रौशन किया है.

रानी और गौरी ने जिस बच्चे को जन्म दिया उसका वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों को अपनी ओर खीच रहा है. पटना जू में जन्में बच्चे पैदा होने के साथ ही खड़ा होने की कोशिश करने लगे. हालांकि इस दौरान वे बार-बार गिरते और फिर खड़े होते  देखे गए. रानी के बच्चे के पहले गौरी के नन्हे बच्चे को प्यार करते हुए वीडियो को लोगों ने काफी पसंद किया था. गैंडे के बच्चे का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लॉकडाउन में बंद ज़ू में इस बच्चे की अटखेली को प्रधान सचिव द्वारा जेबी सोशल मीडिया पर डाला गया तो लोगों ने खूब पसंद किया.

प्रधान सचिव के अनुसार पटना जू में अलग से बनाए गए ब्रीडिंग सेंटर में फिलहाल गणेश और लाली नामक गैंडे के जोड़े को भी रखा गया है. इसके अलावा रानी नाम की एक मादा को भी रखा गया था जो बच्चे को जन्म दे चुकी है. पहली बार 1979 में एक जोड़ा गैंडा को लाया गया था. 1982 में बेतिया से एक नर गैंडा को लाया गया था. 1988 में पहली बार प्रजनन हुआ था.

लॉकडाउन के बीच पटना के चिड़ियाघर में गैंडे के परिवार में दो नए सदस्य की एंट्री से जहां चिड़ियाघर के तमाम लोग खुश हैं वहीं पशु-पक्षी प्रेमी भी. पिछले ही दिनो वाल्मीकि नगर क्षेत्र में एक गेंडा कि मौत की खबर ने वन-जीव प्रेमियों को निराश किया था. लेकिन पटना ज़ू में बढ़ती गेंडो की संख्या ने खुशी की लहर दौड़ाई है.

 जाने माने पशु-पक्षी विशेश ज्ञ और हेड-कंजर्वेशन, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इण्डिया के उपनिदेशक समीर कुमार सिन्हा कहते हैं कि यह एक अच्छी खबर है लेकिन वन-जीवों के बीच आये व्यवहारिक बदलाव से बहुत प्रभाव पड़ रहा है. जंगल कट रहे हैं. गाँव बस रहे हैं. ऐसे में वन-जीवों का पलायन होते देखा जा रहा हैं. एक ओर वन–जीव को बचाने की पहल की जा रही है तो दूसरी ओर वे कई कारणों से शिकार बन जा रहे है. खास जानवरों से फसलों आदि के नुकसान को रोकने के लिए किए जा रहे अमानवीय प्रयोग की चपेट में दूसरे वन जीव भी आ जा रहे हैं.  बहरहाल, आने वाले दिनों में चिड़ियाघर में गैंडों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी जो पटना ज़ू को खास पहचान दिलाने की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगा.


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