जनादेश

जब तक जिए शान से जिये चन्द्रशेखर असली समस्या तो बुद्धि है सादगी में मुस्कुराता चेहरा यानी चंद्रशेखर गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह गुजर जाना एक दरख्त का जोमैटो में चीन का निवेश रुका कोई क्यों बनती है आयुषी क्या समय पर हो जाएगा वैक्सीन का ट्रायल हरफनमौला पत्रकार की तलाश काफ़्का और वह बच्ची ! कोरोना ने चर्च भी बंद कराया सरकार अपनी जिम्मेदारियों से क्यों भाग रही है? वसूली का दबाव अलोकतांत्रिक विपक्षी दलों ने कहा ,राजधर्म का पालन हो पुर्तगाल ,गोवा और आजादी कब शुरू हुई बाबाओं की अंधविश्वास फ़ैक्ट्री कोरोना से बाल बाल बचे नीतीश आंदोलनकारी या अतिक्रमणकारी ओली के बाद प्रचंड की भी राह आसान नही खामोश हो गई सितारों को उंगली से नचाने वाली आवाज

कुर्बान से बात करने का संदेश क्या है

यशोदा श्रीवास्तव

लखनऊ.यूपी में गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चुनिंदा गांवों के चुनिंदा श्रमिकों से बात करके की गई.प्रधानमंत्री द्वारा किसी योजना की जैसी शुरुआत हुई उसका भी एक निहितार्थ था. केंद्र सरकार के सीएए एनआरसी की घोषणा से देश का मुस्लिम तबका गुस्से में है, दूसरे यूपी में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से यह तबका पता नहीं क्यों दहशतजदा है.हालांकि ऐसा कुछ नहीं है.सरकार के सारे योजनाओं का लाभ इन्हें बिना भेदभाव के मिल रहा है. केंद्र व प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद इनसे जुड़ी कई योजनाओं को और बेहतर ढंग से संचालित किया गया. इसके पीछे बीजेपी की इस गैर परंपरागत अपने वोटरों में विश्वास हासिल की मंशा रहती है. बीजेपी का यह प्रयास लगातार जारी है.

सिद्धार्थ नगर के कोडरा ग्रांट के मुंबई से आए एक राजमिस्त्री कुर्बान अली से बात करने का निहितार्थ भी कुछ ऐसा ही है.जिले के इकलौता संसदीय क्षेत्र डुमरियागंज मुस्लिम बाहुल्य है.यह अलग बात है कि यहां कोई मुस्लिम उम्मीदवार बिना गैर मुस्लिम वोटरों के नहीं जीत सका. इस संसदीय क्षेत्र के सांसद जगदंबिका पाल बीजेपी के हैं.पांच में से चार विधायक बीजेपी के और गठबंधन से अपना दल के हैं. स्वयं हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी और सीएम योगी के करीबी राघवेंद्र सिंह इसी जिले के डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. मुस्लिम बाहुल्य इस संसदीय क्षेत्र में चारों ओर हिंदुत्व का परचम लहरा रहा है. हिंदुत्व वादी संगठनों के पदाधिकारियों का मुस्लिमों के प्रति बड़ा कटु व्यवहार कि चर्चा होती रहती है.ऐसे में पीएम द्वारा जिले के एक मुस्लिम कुशल श्रमिक से बात करना बड़ी बात है और अपने उन बड़बोले लोगों को एक संदेश भी है .

पलायित कर गांव आ गए श्रमिकों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराने की सरकार की पहल नीसंदेह स्वागत योग्य है बशर्ते यह रोजगार सचमुच रोजगार जैसा हो पाता. गांव में ले देकर"कांग्रेस के नाकामी का स्मारक" मनरेगा ही है जहां परदेश से पधारे श्रमिकों में रोजगार हासिल करने की होड़ मची है.

ग्रामीण रोजगार का यह जरिया मनरेगा कार्डधारकों के खुशहाल होने का माध्यम है तो ग्राम प्रधानों के मलाई काटने का आपदायी अवसर. कहना न होगा कि मजदूरों का भले ही अपना खाता हो,और उस खाते में उनकी मजदूरी जा रही हो लेकिन यह भ्रष्टाचार मुक्त का पैमाना नहीं बन पाया. गांवों में सौ दो सौ मजदूरों के लिए महीने दो महीने काम के लिए काम नहीं है.लेकिन सरकार चूंकि मेहरबान है तो इन्हें "रोजगार" उपलब्ध कराया जा रहा. इसमें बड़ा खेल चल रहा है.बिना काम के एक मजदूर के खाते में प्रतिमाह करीब सात हजार रूपए आ रहा है. मनरेगा में मजदूरी के लिए ग्राम प्रधान की मर्जी सर्वोपरि है. सभी श्रमिकों का जाबकार्ड प्रधान के पास होता है. श्रमिक बिना जाबकार्ड के अपनी मजदूरी नहीं निकाल सकता.उसे ग्रामप्रधान पर आश्रित रहना पड़ता है.चूंकि इस मद में 70 प्रतिशत धन बिना काम के आ रहा है इसलिए प्रधान मजदूर को अधिकतम एक हजार देकर बाकी अपने पास रख लेता है. इस शेष रकम से ऊपर तक हिस्सा तय है.सरकार को इस खुशफहमी में नहीं रहना चाहिए कि पिछले सरकारों में 90 प्रतिशत सरकारी धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा था जो अब नहीं हो रहा.हो रहा है.खूब मजे से हो रहा है.

मनरेगा ग्रामीण रोजगार का ऐसा फंडा है जिसका कोई राजनीतिक दल अथवा क्षेत्रीय नेता जांच की मांग नहीं करता.रोजगार के इस माध्यम से प्रति विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 35 हजार वोटर संबद्ध है, जांच के नाम पर  इन्हें कौन नाराज करना चाहेगा. बड़ी खूबसूरती से गांवो के विकास के नाम पर पंहुच रहे करोड़ों रूपये पर हाथ साफ किया जा रहा है. चाहे यह धन शौचालय के मद का हो या पीएम/सीएम आवास के मद का. लूटा खूब जा रहा है. मनरेगा के बाद कुशल श्रमिकों को कौन सा रोजगार मिलना है, यह अभी स्पष्ट नहीं है. वैसे बीस लाख करोड़ रूपए के राहत पैकेज में ऐसे श्रमिकों के लिए आसान कर्ज का दावा किया गया है.


Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :