मौसम है रोज खाइए आम

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मौसम है रोज खाइए आम

चंचल 

मलिक साहब जब भी आते है, ज्ञान अलग से लाते है . कल अपना मोबाइल खोल कर सामने रख दिये और हमे समझा गए इसे गौर से सुनिए , खुद चले गए बैगन देखने . स्क्रीन पर एक देवी जी थी और तार्किक बात कर रही थी . जेरे बहस आम था . आम की ढिपुनी से शुरू हुई . उनका कहना था -

आम प्रकृति की अनमोल देन है . सीजन भर एक आम प्रतिदिन खाली पेट खाना चाहिए . खाली पेट आम खाने से ब्लड सुगर कंट्रोल करता है , गैस को खत्म करता है , रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है वगैरह वगैरह . पर नुकसान किसी भी तरफ़ से नही करता .आम को काटकर , चाकू से छील कर नही खाना चाहिए . अगर आम शख्त है तो इसे दांत और हाथ से ही छिलका उतार कर खाइए . सबसे अच्छा होता है आप इसे चूस कर खाइए . पहले दोनो हाथ की उंगलियों से इसे गुलगुलाइये फिर धीरे से ढिपुनि निकालिए फिर चूसिये . आम की ढिपुनि के पास एक तरह का पारदर्शी तरल द्रव निकलता है उसे अपनी भाषा मे चोपी बोलते हैं . अक्सर यह मुलायम त्वचा पर असर दिखा जाती है लेकिन इसका एक दो बूंद अमृत माना जाता है . इसका स्वाद कसैला होता है लेकिन एक तरह का वैक्सीन का काम करता है . गले के अनेक रोगों का इलाज भी कर जाता है बे वजह .

हिदायत - हर आम के पकने की एक उम्र होती है . उसके साथ किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती दोनो के लिए हानिकारक होती है . कच्चे पन में ही दवाओं से या पाल से पके आम में वह गुन नही रह जाता जो होता है . इसलिए पेड़ से पके आम का ही सेवन करना चाहिए .

पर शहर में कहां मिलेगा ?फिर वही गांव . गांव में फल बिकते नही थे . अब बिकने लगे हैं जदा कदा . बगीचे में जो गिरे उस पर लपकनेवाले का हक आज भी बदस्तुर कायम है . गांव में जितने भी बगीचे बचे हैं , भोर से ही गांव के गदेलों से भर जाता है.

हिलाया भी जाता है. हिलाने हिलवाने का हक बगीचा मालिक को ही है . एक आदमी जो पेड़ पर चढ़ कर आम की डाल को झकझोरता है उसे गिरे हुए आमों का एक हिस्सा मिलता है .आम खाइए , स्वास्थ्य , सौंदर्य और स्वाद की तासीर मापिये . दुनिया का बेहतरीन आम गांव के बगीचा से मिलता है अलग अलग नाम से . आम की बनावट से , साइज से , स्वाद से , सीरत से और स्वभाव से उन पेड़ों का नाम करण होता है.आम खाने से पहले आम को पानी मे भिगोना जरूरी है . वांगमय कहता है सौंदर्य और स्वाद की जननी है जल .फोटो साभार फेसबुक से 


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