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बेलगाम गिरिराज के ट्वीट से मचा बवाल

डा  लीना

पटना. बिहार में विभिन्न दलों की इफ्तार पार्टी और फिर भाजपा नेता व केद्रीय मंत्री गिरिराज  सिंह के ट्वीट ने एनडीए में हलचल पैदा कर दी है. गठबंधनों के बिखरने और नए साझेदारी के कयास लगाए जाने लगे हैं.

दोबारा सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने नफरत की भाषा पर लगाम लगाने की नसीहत अपने सांसदों / मंत्रियों को दी. मोदी की नसीहत दरकिनार करते हुए विवादों में रहने वाले बिहार के बड़बोले भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने ट्वीट कर एनडीए में खटास ही पैदा कर दी है. खासकर, बिहार की राजनीतिक गलियारे में अपने ही सहयोगी जनता दल यूनाइटेड, जदयू को नाराज कर दिया है.


    केन्द्र की सत्ता में जदयू को सांकेतिक हिस्सेदारी का ऑफर  देकर भाजपा ने एनडीए में कलह की शुरूआत कर दी है. जदयू नाराज है और पार्टी के महासचिव केसी त्यागी ने साफ कहा है कि भविष्य में भी जदयू की केन्द्र की सत्ता में साझीदार नहीं होगी. लोक सभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा जंहा आह्लादित है वहीं जदयू भी पूरे तेवर में है. जदयू जीत का के्रडिट नीतीश कुमार को देता है तो वहीं भाजपा नरेंद्र मोदी को. केन्द्र में मन मुताबिक मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज जदयू के घाव अभी ताजा ही थे कि गिरिराज सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर कुछ तस्वीरों के साथ एक ट्वीट किया, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा नेता सुशील मोदी, जीतन राम मांझी, रामविलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान एक साथ इफ्तार पार्टी में दिखाई दे रहे हैं. गिरिराज सिंह ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए तंज कसा है. उन्होंने लिखा, कितनी खूबसूरत तस्वीर होती जब इतनी ही चाहत से नवरात्रि पर फलाहार का आयोजन करते और सुंदर सुदंर फोटो आते? अपने कर्म-धर्म में हम पिछड़ क्यों जाते हैं और दिखावा में आगे रहते है?


   ट्वीट ने जख्म को और गहरा कर दिया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गिरिराज सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी है और कहा कि गिरिराज ऐसा इसलिए करते रहते हैं ताकि मीडिया खबर बना सके यानी वो सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसा करते हैं. गिरिराज सिंह के ट्वीट पर बवाल मचना ही था. जदयू ने ट्वीट का करारा जवाब दिया, तो उसके समर्थन में हम, कांग्रेस और राजद भी सामने आये. वहीं मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री जदयू नेता अशोक चैधरी ने गिरिराज सिंह को करारा जवाब देते हुए कहा है कि जब चुनाव का समय था तो गिरीराज सिंह नीतीश कुमार को दस बार फोन करते थे कि उनके लिए सभा की जाए. आज नीतीश कुमार की बदौलत ही वह चार लाख से ज्यादा वोटों से जीते हैं. लेकिन अब नीतीश कुमार को लेकर वे इस तरह के बयान दे रहे हैं. जो ठीक बात नहीं है.


    इफ्तार पार्टी पर ट्वीट के पीछे गिरिराज सिंह ने यों हमला नहीं बोला. इफ्तार पार्टी में हम के जीतन राम मांझी और लोजपा के साथ गोलबंदी को देख बयान ठोक दिया. इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है. केन्द्र में हिस्सेदारी नहीं मिलने से नाराज नीतीश कुमार ने आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर अपनी रणनीति तय कर ली है. और एक जगह अपने विराधी से मिलना राजनीतिक गलियारे में संदेश तो दे ही गया है. केद्र में स्थान नहीं मिलने के तुरंत बाद बिहार में मंत्रिमंडल के विस्तार में सिर्फ जदयू नेताओं को जगह देने के बाद सियासी भूचाल का संकेत जदयू ने दिया है. वहीं जदयू  और भाजपा की ओर से अयोजित इफ्तार पार्टी से भी यह संकेत मिले हैं कि दोनों दलों की बीच रिश्ते तल्ख हुए हैं. भाजपा की इफ्तार पार्टी में जदयू का कोई भी नेता शामिल नहीं हुआ. हालांकि मीडिया ने जदयू की गैरहाजिरी पर सवाल किए तो भाजपा सवालों से बचती रही. उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने मीडिया को सफाई दी और कहा कि इफ्तार का कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकालना चाहिए. यह मूलरूप से धार्मिक आयोजन है. सुशील मोदी ने कहा कि सभी जगह एक साथ आयोजन होने से असुविधा हुई. लोजपा की इफ्तार पार्टी में एनडीए के सभी नेता एक साथ शामिल होंगे. जदयू की इफ्तार पार्टी में नीतीश कुमार के पुराने साथी रहे हम पार्टी के मुखिया जीतनराम मांझी पहुंचे. लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान भी पहुंचे. लेकिन भाजपा का कोई नेता इफ्तार में नहीं आया. एनडीए सबकुछ ठीक होने का दावा भी कर रहा है.

    बिहार में विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से अधिक का समय है. इस दौरान कई समीकरण बनेंगे- बिगड़ेंगे. इसलिए कौन सा दल किस पाले में जाएगा, फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता. लेकिन जोड़ तोड़ की शुरुआत तो हो ही चुकी है.  

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