लालजी टंडन चले गए

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लालजी टंडन चले गए

अंबरीश कुमार 

लालजी टंडन चले गए .मार्च में अपने मित्र विजय उनके घर ले गए पर मेरे पास एक बैग था और सुरक्षा वजहों से उसे न कोई रखने को तैयार था न जाने देने को .कोरोना की शुरुआत हो चुकी थी तो मैंने कहा बाद में मिल लेंगे पर अब कहां मिलना होगा .हालांकि टंडन जी अपने से कोई बहुत खुश रहे हों ऐसा भी नहीं था .वैसे भी जनसत्ता जैसा अख़बार ज्यादातर नेताओं को बहुत पसंद भी नही था .फिर एक नहीं कई खबरे अपनी नाखुश करने वाली ही रहीं .वैसे भी अपनी खबरे ज्यादातर को नाखुश ही तो करती रही .खैर ,टंडन जी इस मामले में आम भाजपा नेताओं की अपेक्षा उदार थे अटल बिहारी वाजपेयी की तरह .उन्ही की परम्परा वाले थे .खाने खिलाने के शौकीन भी .लखनऊ में किसी नेता के घर चाट की दावत सिर्फ टंडन जी के घर ही होती थी .हमने भी चाट खाई है .वैसे वे लखनऊ के नेता ज्यादा थे भाजपा के कम .ऐसा व्यवहार कहां आज के नेता दिखाते हैं .मैंने ही तो खबर का शीर्षक दिया था ,प्रदर्शन करने गए टंडन मुलायम के घर रसगुल्ला खाकर लौटे .इस खबर पर भी वे नाराज हुए .पर उन रिश्तों को भी देखिये कि धुर विरोधी नेताओं के आपसी रिश्ते कैसे होते थे .अब तो ऐसे रिश्ते नहीं दिखते .इसलिए टंडन जी लखनऊ को हमेशा याद रहेंगे .श्रद्धांजलि .

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