जनादेश

जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें जांच के नामपर लीपापोती तो नहीं ? पीएफ घोटाले में बचाने और फंसाने का खेल ? कश्मीर के बाद नगालैंड की बारी ? गोंडा जंक्शन ! कभी इस डाक बंगला में भी तो रुके ! बिकाऊ है चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन,खरीदेंगे ? झटका तो यूपी बिहार में भी लग गया !

हम इस खाकी से बहुत लड़े हैं

चंचल 

उत्तर प्रदेश में अपराधियों हाथ गिरवी रखी एक संस्था है जो पशुवत पोषण पर पल रही है ,एवज में जनता के साथ वही पशुवत व्यवहार करती जा रही है क्रूरता की मात्रा कुछ ज्यादा ही कर रही है .हाल ही में शामली रेल पटरी पर हुए हादसे को देखें तो खुद से नफ़रत हो जाएगी कि हम चुप बैठे हैं ? पूरी क्लिपिंग हमने देखा पुलिस जिस तरह से उस पत्रकार को मार रही थी उससे साफ है उस पुलिस का मकसद है इस पत्रकार को जान से मार दिया जाए  .

देश की सियासत में पुलिस और हुकूमत के बीच वफादारी के एवज में अभाव बनाये रखना और उतना ही कि जितने पर यह पुलिस महकमा जिंदा तो रहे पर मालिक के सामने गुर्राने की हिम्मत न करे बल्कि पूछ हिलाता रहे .हम इस खाकी से बहुत लड़े हैं , बहुत मार खाये हैं , बाज दफे तो पुलिस वाला थक जाता था - स्साला ! थेथर हो चुका है इसे मालूम है मंत्री जी का कुछ नही होगा फिर भी ये पगले काला झंडा लिए मुरदाबाद बोलेंगे जरूर .बन्द करो लॉक अप में .कोई भी जिला नही होगा जहां इस तरह के दो चार सिरफिरे न पाए जाते हों ? यही दो चार सिरफिरे सत्ता को मजबूर करते थे - सुधरो या हटो .कई सरकारें गिरी हैं .इतिहास गवाह है .

71 में पुलिस ने खुद को देखा .उसकी निजी जिंदगी पर क्या गुजर रही है ? हम उस मुद्दों का जिक्र नही करेंगे .सरकार फिर जेल में डाल देगी - कम्बख्त पुलिस भड़का रहे हो ? इसका साथ देकर भी जेल गया 71 में .हमारे नेता थे बिहार के रामानंद तिवारी जिन्हें हम प्यार से बाबा बोलते थे .जॉर्ज फ़र्नान्डिस की अगुआई में चले थे पुलिस को सहूलियत दिलवाने .77 इस देश की सबसे मनहूस घटना है जनता दल का बनना .सियासत में गणित आ गया , जातियों की पार्टी बन गयी , संदूक और बंदूक वाले कल तक बिसात को बाहर से देख रहे थे अचानक वो वजीर बन गए पर सियासत में सियादत ही गायब हो गई .रहा - सहा कसर नरसिंहराव  ने पूरा कर दिया सांसद निधि , विकास निधि , वगैरह की अतिरिक्त आमदनी देकर राजनीति को कोठे पर पहुंचा दिया .

नया काल आया है गुजरात मॉडल .यूज ऐंड थ्रो .प्रयोगिये और फेंकिये .केशुभाई से लेकर जोशी वाया आडवाणी तो मामूली लोग हैं आढ़तिया ने थोक भाव मे पत्रकार ले लिए .जो मर्जी आये ये बोलेगा .फेंको काम का नही रहा .नौकर शाही की तो .हालत कराओ लालच देकर .काम खत्म तो ठेंगा दिखा दो .सब कुछ बिगड़ गया है बंधु ! रफू नही होगा .तुम्हारा कमजोर जोड़ उसकी गिरफ्त में है , भुगतो .भुगतो कह कर पलायन नही करना है , कुछ सार्थक कदम उठाओ .उत्तर प्रदेश पुलिस धार्मिक है युवा भक्त जो कभी कांवरिया बन के सड़क कानून अपने हाथ मे लेते हैं उनपर पुलिस गुलाब की पंखुड़ी बरसा कर अपने बजरंगी को खुश करते हैं .ये कानून देख रहे हैं .



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