देवताओं के देश की नौका दौड़ !

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देवताओं के देश की नौका दौड़ !

राकेश सहाय 

पता नहीं आप भगवान के खुद के देश को देखने कभी गए हैं या नहीं .जी हम केरल की बात कर रहे हैं जो अपने खूबसूरत समुद्र तटों ,नारियल के घने विस्तार और अपनी हरियाली के लिए मशहूर है .पर्यटन विभाग ने इस राज्य के लिए जो मुहावरा गढ़ा है उसमें इसे देवताओं का अपना देश कहा जाता है .फिलहाल हम आपको केरल की मशहूर नौका दौड़ के बारे में बताने जा रहे हैं .इसे स्नेक बोट रेस भी कहा जाता है .स्नेक यानी सांप .

सांप का तो नाम सुनते ही शरीर में सिरहन पैदा हो जाती है पर स्नेक बोट या मलयालम में कहे तो चूंडन वल्लम बोट रेस दिल में रोमांच पैदा कर देती है.  स्नेक जैसी दिखने वाली बोट रेस की परंपरा केरला के कुटनाद   में बहुत पुरानी है . सांप जैसी दिखने वाली  बोट करीब १०० से १३८ फ़ीट तक लम्बी होती है जिसको चलाने  के लिए नब्बे नाविकों  तक की टीम हो सकती है . इसका निर्माण  करीब ८० फ़ीट की लंबी लकड़ी से किया जाता है . नाव का निचला हिस्सा आग में तपाया जाता है फिर मछली का तेल नारियल ,कार्बन और अंडे आदि से इसकी पालिश होती है . नाव बनाए जाने के बाद मंत्रो के उच्चारण से इसे  पास की नदी या झील  उतारा जाता है जो अपने आप में गांव का एक पर्व सा बन जाता है .


पूरे केरल में पंद्रह ऐसी स्पर्धा साल भर में होती है जो एक साल में अगस्त से नवम्बर तक  आयोजित होती है .इसमें सबसे प्रमुख है नेहरू ट्रॉफी जो आईपीएल के तर्ज पर पुन्नमडाल अल्लेप्पी की झील में  आयोजित होती  है.नौकाओं की दौड़ में करीब अस्सी  टीम भाग लेती है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाता है जो अगस्त माह के दूसरे हफ्ते में होता है. आपको जान कर ये आश्चर्य होगा के एक बोट रेस की तैयारी में चालीस लाख रुपये तक खर्च होते है . स्पोर्ट्स नाविकों के ट्रेनिंग तीन महीने पहले से शुरू हो जाती है जिन्हे उनकी क्षमता और कुशलता  के आधार पर  नाव के आगे पीछे या बीच में स्थान दिया जाता है.आगे के भाग में नाव को दिशा देने और रफ़्तार देने के लिए नाविक होते हैं . और पीछे नाव को बैलेंस करते हुए चलाने वाले नाविक होते हैं .बीच में जो नाविक होते है वो गीत गाने के साथ मूसर जैसी मोती लाठी से एक ताल और लय देते है. मज़े की बात ये है की सारे नाविक  नाव के दोनों और इसी संगीत पर अपनी नाव को चलाते है जिनकी पतवार एक मिनट में ८० बार तक चल जाती है . 

इतनी सारी स्नेक बोट्स को झील में चलने का दृश्य बहुत रोमांचक और जोश भरा  होता है . अब तो ये प्रतिस्पर्धा महिलाओ के लिए भी पर्यटन विभाग ने शुरू कर दी है जहां महिला नाविक बढ़ चढ़ के भाग ले रही है .यह एक नई शुरुआत है .इसे देखने के लिए आपको केरल के अलेप्पी में आना चाहिए .इस प्रतिस्पर्धा में पांच लाख रुपए तक का इनाम होता है .

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