जेल में बहुत खराब हैं हालात -डा कफील

आखिर वह दिन आ ही गया ! बिहार में कब चुनाव होगा? मंदिर निर्माण का श्रेय इतिहास में किसके नाम दर्ज होगा ? राष्ट्रीय कंपनी अधिनियम पंचाटः तकनीकी सदस्यों पर अनावश्यक विवाद बहुतों को न्यौते का इंतजार ... आत्महत्या की कहानी में झोल है पार्षदों को डेढ़ साल से मासिक भत्ता नहीं मिला पटना के हालात और बिगड़े गांधीवादियों की चिट्ठी सोशल मीडिया में क्यों फैली ? अमर की चिंता तो रहती ही थी मुलायम को चारण पत्रकारिता से बचना चाहिए तो क्या 'विरोध' ही बचा है आखिरी रास्ता पटना नगर निगम के मेयर सफल रहीं अमर सिंह को कितना जानते हैं आप राजस्थान का गुर्जर समाज किसके साथ शिवराज समेत चार मंत्रियों को कोरोना कम्युनिस्ट भी बंदर बांट में फंस गए पूर्वोत्तर में भी बेकाबू हुआ कोरोना किसान मुक्ति आंदोलन का कार्यक्रम शुरू राजकमल समूह में शामिल हुआ हंस प्रकाशन

जेल में बहुत खराब हैं हालात -डा कफील

 मथुरा.गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बाद पचास से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी.इस दौरान डॉ. कफील खान ने मदद की थी लेकिन उल्टे उन्हें ही आरोपी बनाकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जेल में भिजवा दिया था.इसके बाद कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें रिहा किया गया था लेकिन फिर उन्हें मथुरा जेल में डाल दिया गया, जहां वह बीते पांच महीनों से बंद हैं.

अब डॉ. कफील खान ने जेल से पांच पत्र लिखे हैं जिनमें उन्होंने सरकार से अपनी मांगों और जेल की हालात का जिक्र किया है.द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ कफील खान ने पत्र में लिखा, मेरी क्या गलती है जिसके लिए मुझे सजा दी जा रही है? मैं अपनी बीवी, बच्चों और अपने भाई बहनों के पास कब लौट पाऊंगा? मैं कब कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ पाऊंगा?बता दें कि डॉ. खान को दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण को लेकर 29 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था.इसके बाद जमानत पर बाहर आए डॉ. खान के खिलाफ रासुका के तहत मामला दर्ज कर दिया गया था.

इससे पहले उन्होंने मार्च के महीने में पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा था, ‘देश के कोरोना वायरस के स्टेज 3 पर पहुंचने से पहले हमें कई टेस्ट और इसकी मॉनिटरिंग की जरूरत होगी.फिलहाल सोशल डिस्टेंसिंग के कड़े नियम की जरूरत है.बीआरडी ऑक्सीजन ट्रेजडी के बाद मैंने करीब 103 फ्री मेडिकल कैंप चलाए जिसमें 50,000 बच्चे/मरीजों को एग्जामिन किया गया, मुझे लगता है मैं इस महामारी में कुछ मदद कर सकता हूं.’पत्र में डॉ. खान बताते हैं, ‘हर बरैक में 125 से 150 लोग हैं और सिर्फ 4-5 ही टॉयलेट हैं तो जाहिर तौर पर सभी को लाइन लगानी पड़ती है, अब मेरे पेट में दर्द होने लगा है और जब मैं टॉयलेट में होता हूं तो वहां मच्छर हैं और ये बहुत बदबूदार है जिससे कई बार मुझे उल्टी हुई, इसके बाद नहाने के लिए अलग लाइन लगती है, खाने में पानी जैसी दाल उबली हुई सब्जी ज्यादातर गोभी, पत्ता गोभी और साथ में मूली होती है, मैं जिंदा रहने के लिए उसे पानी से निगल लेता हूं.लॉकडाउन के चलते अब हम अपने परिवार से भी नहीं मिल सकते कई बार मैं फलों से और बाकी खाने से अपनी भूख मिटाता था जब भी वो आते थे साथ लाते थे.’सबरंग इंडिया 


Share On Facebook
  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :