पहले भी निशाने पर रहे है राज्यपाल

आखिर वह दिन आ ही गया ! बिहार में कब चुनाव होगा? मंदिर निर्माण का श्रेय इतिहास में किसके नाम दर्ज होगा ? राष्ट्रीय कंपनी अधिनियम पंचाटः तकनीकी सदस्यों पर अनावश्यक विवाद बहुतों को न्यौते का इंतजार ... आत्महत्या की कहानी में झोल है पार्षदों को डेढ़ साल से मासिक भत्ता नहीं मिला पटना के हालात और बिगड़े गांधीवादियों की चिट्ठी सोशल मीडिया में क्यों फैली ? अमर की चिंता तो रहती ही थी मुलायम को चारण पत्रकारिता से बचना चाहिए तो क्या 'विरोध' ही बचा है आखिरी रास्ता पटना नगर निगम के मेयर सफल रहीं अमर सिंह को कितना जानते हैं आप राजस्थान का गुर्जर समाज किसके साथ शिवराज समेत चार मंत्रियों को कोरोना कम्युनिस्ट भी बंदर बांट में फंस गए पूर्वोत्तर में भी बेकाबू हुआ कोरोना किसान मुक्ति आंदोलन का कार्यक्रम शुरू राजकमल समूह में शामिल हुआ हंस प्रकाशन

पहले भी निशाने पर रहे है राज्यपाल

यशोदा श्रीवास्तव

भारत में राज्यपालों की भूमिका पर सवाल उठना नया नहीं है. देखा जाय तो इसकी शुरूआत नेहरू के शासन काल से ही हो चुकी थी. उदाहरण के तौर पर हरियरणा में जेडी तपासे,सिक्किम में तलयार खान, जम्मू कश्मीर में जगमोहन और ऐसे ही उस काल के तमाम ररज्यपालों का स्मरण किया जा सकता है. इसी तरह

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत के राजभवन घेरने की बात कहना भी नया नही है. याद होगा 2 जून 1995 को राजस्थान के गर्वनर कलराज मिश्र यूपी बीजेपी के अध्यक्ष रहते हुए राजभवन में धरना प्रदर्शन कर चुके हैं. तब ये लोकतंत्र का अधिकार था और आज धमकी?और पीछे देखेंगे तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री राम कृष्ण हेगड़े ने अपने यहां के तत्कालीन राज्यपाल एएन बनर्जी को केंद्र सरकार का नौकर तक कह डाला था तो आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रामलाल को लोग गुंडा बेइमान और डकैत तक कहने से बाज नहीं आए थे.


कांग्रेस के शासन काल में 91 बार अनुच्छेद 356 का दुरूपयोग हुआ. अकेले इंदिरा गांधी ने इस अनुच्छेद का सहारा 50 बार लिया था. 2014 से सत्ता में आई भाजपा से ऐसी उम्मीद नहीं थी लेकिन अपने महज सात साल के शासन में इस सरकार ने भी अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए राज्यपालों को खूब मोहरा बनाया. कर्नाटक,महाराष्ट,मध्यप्रदेश के पहले सिक्किम,मेघलय,मिजोरम,नागालैंड,गोवा इसका उदाहरण है. इन प्रदेशों में बीजेपी के शून्य से लेकर 01,02,12,व 13 विधायक चुने गए थे. बीजेपी की यह सदस्य संख्या सरकार क्या विपक्ष के लायक भी नहीं थी लेकिन आज वहां उनकी सरकार है. कहना न होगा, सत्ता को लेकर राजस्थान में जैसी रस्सा कसी चल रही है,उसे देख ऐसा संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में राजस्थान कांग्रेस मुक्त हो सकता है. गहलौत का वह एक बयान तिल का ताड़ बन रहा है जब उन्होंने राजभवन के कथित घेराव की बात कही थी. बीजेपी गहलौत को लोकतंत्र के हत्यारे के रूप् में साबित करने पर तुली है. आगे क्या होगा देखना बाकी है. लेकिन आजादी के बाद से ही राज्यपालों के बेजा इस्तेमाल पर एक नजर डालना जरूरी है.कहते हैं कि नेहरू शासन काल में राज्यपालों का वेजा इस्तेमाल नहीं किया जाता था और जनतात्रिक मूल्यों की रक्षा हो रही थी. लेकिन यह बताने की जरूरत नहीं है कि नेहरू के कार्याकाल में अधिकांश प्रदेशीय सरकार भी कांगे्रस की हुआ करती थी. इसलिए सरकार गिराने या बनाने में राज्यपालों के इस्तेमाल की जरूरत नहीं महसूस हुई. लेकिन नेहरू काल के जनतांत्रिक होने का भी भ्रम 1959 में टूट गया जब केरल की इएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को एक दम अनुचित ढंग से गिरा दिया गया. उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती इंदरा गांधी थीं जिन्होंने केरल में कानून व्यवस्था की बिगड़ी हाल का हवाला देकर केरल सरकार को गिराया था. नेहरू तब इस ओर से आंख बंद किए रहे. बताने की जरूरत नहीं कि आपातकाल के बाद 1980 में वापस लौटीं श्रीमती इंदरा गांधी के शासन काल में  आंध्र प्रदेश में एनटीरामाराव की सरकार को तत्कालीन राज्यपाल रामलाल ने कैसे बर्खास्त किया था? कहना न होगा कि इंदरा गांधी का यह ऐसा शासन काल था जब राज्यपालों को तास के पत्ते की तरह फेंटा जाता रहा है. राज्यपालों के संदर्भ में पूर्व की ऐसी स्थिति की पूनरावृत्ति की कल्पना फिलहाल इस शासनकाल में नहीं की गई थी लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने जब कांग्रेस मुक्त भारत का आवाहन किया था तब फिलहाल इसकी कल्पना नहीं की गई थी कि उसके कांग्रेस मुक्त भारत का रास्ता बजरिए अनुच्छेद 356 होगा जिसका इस्तेमाल कर गैर बीजेपी सरकारों को अपदस्थ करने के लिए राज्सपालों का सहारा लिया जाएगा जैसा कि इसके पहले लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस करती रही है. हैरत है कि यह सवाल यदि बीजेपी के छोटे से बड़े नेता से पूछा जाय तो वे साफ कहते हैं कि यह सवाल पहले क्यों नहीं पूछा गया?

फोटो वर्ष 1995 में लखनऊ में राजभवन का घेराव करते कलराज मिश्र 


Share On Facebook
  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :