अदालत में क्यों मुकर गए आडवाणी ?

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अदालत में क्यों मुकर गए आडवाणी ?

अमिताभ श्रीवास्तव 

एक तरफ  मीडिया में अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का जोश छाया हुआ है तो दूसरी तरफ बीजेपी के अयोध्या आंदोलन के नायक रहे लालकृष्ण आडवाणी के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में ताज़ा बयान से  दिलचस्प स्थिति पैदा हो गयी है. आडवाणी ने सीबीआई अदालत में दर्ज कराये अपने बयान में बाबरी मस्जिद गिराए जाने में अपनी भूमिका से साफ़ इंकार किया है और कहा है कि इस मामले  में उनके खिलाफ राजनीतिक वजहों से आपराधिक साज़िश का केस बनाया गया. आडवाणी ने यह बयान क्यों दिया और इसके क्या राजनीतिक निहितार्थ हो सकते हैं? जनादेश के यू ट्यूब चैनल पर बुधवार शाम इस मुद्दे पर हुई चर्चा में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी राय रखी . 

 वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के मुताबिक आडवाणी के ताज़ा बयान के बाद बीजेपी के वर्तमान कार्यकर्त्ता की नज़र में उनका क्या मूल्यांकन है यह देखना दिलचस्प होगा.  सरकार इस मामले को वापस लेने  अगर इस मामले में आडवाणी, जोशी और उमा भारती  को सजा होती हैं तो यह वर्तमान सरकार के लिए एक असमंजस की स्थिति होगी.  

वरिष्ठ पत्रकार के विक्रम राव का कहना था कि आडवाणी राम मंदिर आंदोलन के सर्वेसर्वा थे और कारसेवकों को लेकर अयोध्या पहुंचे थे लेकिन अब वो अपनी भूमिका से मुकर रहे हैं तो इस मामले में सीबीआई अदालत अगर कोई सजा दे भी दे तो उस के क्या मायने होंगे  क्योंकि इस समय दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों जगह  बीजेपी की सरकार है.  यह गलतबयानी है , अदालत की अवमानना है.  

चर्चा का संचालन  कर  रहे वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर ने सवाल उठाया कि जब अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है और  दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों जगह बीजेपी की सरकार  है तो यह मामला ख़त्म  क्यों नहीं कर  देते ?  इसके पीछे मंशा क्या है ? इस पर वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र नाथ भट्ट का कहना था कि केस  वापस लेना वर्तमान  सरकार के लिए राजनैतिक दृष्टि से कोई फायदे का सौदा नहीं हैं . आडवाणी पहले से ही बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में हैं तो उनके लिए नरेंद्र मोदी किसी तरह का कोई जोखिम क्यों मोल लेना चाहेंगे ?   

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी की राय थी कि जब बीजेपी की प्रचंड बहुमत वाली केंद्र सरकार के राज में सुप्रीम कोर्ट  के फैसले के बाद मंदिर बन रहा है और भूमि  पूजन होने जा रहा है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेवजह ऐसा कोई विवाद नहीं चाहेंगे जिससे कहीं कोई नुकसान हो. बाबरी  मस्जिद विध्वंस  मामले के प्रमुख गवाहों में से एक उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ  पत्रकार शरत प्रधान का कहना था कि यह सोचना हास्यास्पद है कि इस मामले में  इन नेताओं को सजा हो जाएगी.  बीजेपी के दिग्गज नेता मंदिर आंदोलन में अपनी बहादुरी का ढोल तो बहुत पीटते हैं लेकिन सजा की आशंका पर सब अपनी भूमिका   से मुकर जाते है. बहरहाल, अयोध्या का मसला भूमि पूजन के साथ ही एक बार फिर चर्चा में आ गया है और मुख्यधारा का मीडिया अभी इसे हवा देने के मूड में दिख रहा  है.     


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