ये तस्वीर सुशासन की तो नहीं है !

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ये तस्वीर सुशासन की तो नहीं है !

फज़ल इमाम मल्लिक 

पटना .बिहार में स्वास्थ्य सिस्टम ध्वस्त हो गया है. दिल दहलाने वाली तसवीरें बिहार के अस्पतालों से सामने आ रही हैं. कोरोना मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है और टेस्टिंग के मामले में बिहार फिसड्डी है. आंकड़ों की बात करें तो बिहार में टेस्टिंग अभी तक 0.35 फीसद ही हुई है. मुख्यमंत्री गायब हैं, स्वास्थ्य मंत्री लंबे समय बाद दिखाई दिए. अस्पताल भी गए लेकिन कुछ न होना था न हुआ. उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी लालू यादव की फिक्र में दुबले हुए जा रहे हैं. राहुल गांधी का भी गम उन्हें सता रहा है और राजस्थान का भी. दिलचस्प यह है कि सुशील मोदी को राजस्थान के कोरोना संक्रमितों की तो चिंता है बिहार की नहीं. जबकि बिहार इस मामले में राजस्थान से आगे हैं. उन्होंने ट्वीट कर राजस्थान की जनता से हमदर्दी जताई और कहा कि राजस्थान की गहलोत सरकार न कोरोना संक्रमण रोकने में कारगर है, न पार्टी के अंतरकलह को खत्म कर पा रही है. वहां मुख्यमंत्री विधानसभा का सत्र बुलाने का तर्कसंगत कारण बताए बिना राज्यपाल पर इसके लिए न केवल दबाव डाल रहे हैं, बल्कि धमकियां दे रहे हैं. इससे उनकी योग्यता को समझा जा सकता है. वे जनता से कितने जुड़े हैं अंदाजा लगाया जा सकता है. बिहार की फिक्र कब करेंगे कोई नहीं जानता, लेकिन राजस्थान की उन्हें फिक्र है. यानी बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. पहले घर की उन्हें फिक्र करनी चाहिए लेकिन ऐसा वे नहीं कर रहे हैं और बिहार के लोग कोरोना से भी मरने के लिए अभिशप्त हैं और बाढ़ भी उनकी परेशानी बढ़ा रहा है. नीतीश कुमार की कार्यशैली का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को फिर बदल डाला गया. पहले संजय कुमार को बदला गया. अब उदय सिंह कुमावत को भी बदल डाला गया. यानी बिहार पहला ऐसा राज्य बन गया, जहां कोरोना के समय स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को दो-दो बार बदला गया. जाहिर है कि इसकी वजह से भी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा क्योंकि संजय कुमार बेहतर काम कर रहे थे. इस तबादले पर लोग चुटकी भी ले रहे हैं और कह रहे हैं कि छुट्टी तो स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की करनी चाहिए थी लेकिन नीतीश कुमार में उन्हें हटाने की हिम्मत नहीं है. सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के काम करने के तरीके पर पूर्व गृह सचिव अफजल अमानुल्लाह ने बाकायदा वीडियो जारी कर कई सवाल उठाए हैं और बिहार सरकार को हमाम में नंगा खड़ा कर दिया है.


बिहार में कोरोना से हाहाकार है. सरकार रोज नए वादे व नए दावे करती है लेकिन नतीजा ठनठन गोपाल ही है. सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि महामारी की रोकथाम के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं. लेकिन बिहार के अस्पतालों के वायरल होते वीडियो सरकार के दावों को गलत साबित करते हैं. सिस्टम पूरी तर ध्वस्त हो गया है. कोरोना काल में एनएमसीएच के कई वीडियो सामने आए लेकिन उसके बावजूद सरकार सोई हुई है. कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए एनएमसीएच को डेडिकेटेड कर दिया गया. लेकिन वहां के हालात इतने खराब हैं कि देश भर में बिहार की फजीहत हो रही है. कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच लाशें पड़ी रहने की तसवीरें सामने आईं थीं अब एक वीडियो एनएमसीएच से वायरल हुआ है इसमें एक कोरोना संक्रमित मरीजो को फर्श पर लिटा दिया गया है और वहीं उसे ऑक्सीजन दिया जा रहा है. यानी सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन हो गई है. पाश ने सपनों के मर जाने की बात कही थी, हम संवेदनाओं के मरने का तमाशा रोज बिहार के अस्पतालों में देख रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि मरीज जमीन पर लेटा है डॉक्टर नर्स सब आ जा रहे हैं लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं हैं. इतना ही नहीं इस वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कोरोना संक्रमित मरीज की लाश वार्ड में पड़ी है लेकिन कोई देखने वाला नहीं हैं.

सरकार की भद्द पिटी तो अचानक एक दिन न जाने कहां से स्वास्थय मंत्री मंगल पांडेय अवतरित हुए. बकायदा पीपीई किट पहन कर एनएमसीएच का दौरा किया. दावा यह किया गया कि स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद से वहां का हालात ठीक हो जाएंगे लेकिन कहानी कल भी वही थी और आज भी वही है. अस्पतालों का हाल बेहाल है. पानी में डूबे अस्पताल और पानी से परेशान मरीजों की तसवीरें देख कर जी हौला जाता है. बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी विज्ञापनी सेना कुछ इस तरह से लड़ रही है कोरोना से.

लोग पूछ रहे हैं कि बदहाल इंतजाम का जायजा लेने के बाद भी कुछ बदला तो नहीं फिर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे एनएमसीएच में क्या देखने गए थे. बिहार में कोरोना जानलेवा होता जा रहा है लगातार भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं ऐसे में इस तरह की बदइंतजामी सरकारी दावों की हकीकत को बयान करने के लिए काफी है. वैसे सवाल यह भी पूछा जाना चाहिए नीतीश कुमार से कोरोना काल में उन्होंने संजय कुमार को प्रधान सचिव के पद से क्यों हटाया. क्या इसकी वजह अपने स्वजातीय मित्र का तबादला तो नहीं रहा, सवाल पूछे जा रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार मौन हैं और लोग परेशान.

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