तो क्या 'विरोध' ही बचा है आखिरी रास्ता

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तो क्या 'विरोध' ही बचा है आखिरी रास्ता

अवधेश मल्ल
कुशीनगर
. इसे टॉयलेट एक प्रेमकथा का एक वर्जन ही मान लीजिए. शौचालय  के लिए बहूओं के ससुराल छोड़ने की बात सूर्खियां बनी तो जिम्मदारों को उनके गांव  भरपटिया की याद आ गई. दुल्हनों की दिक्कतों की भी चिंता विभाग को होने लगी है. जिला पंचायतराज अधिकारी अब गांव में सामुदायिक शौचालय बनवाने प्लान बना रहे  है.बगावती बहूओं के ससुराल को भी इज्ज्त घर से लैस करने की बात चलने लगी है. सरकारी  मशीनरी तरह- तरह के उपायों से इस टॉयलेट विद्रोह कथा पर पर्दा  के डालने में लगी हुई है. इसका पटक्षेप भी होने लगा है. परंतु इसी के साथ कई गंभीर सवाल पैदा हो गये हैं जिनका जबाब देने वाला कोई नहीं है.

      कुशीनगर जनपद में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण कराने और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने में लगभग 5 अरब रुपये खर्च किये जा चुके हैं.  जिले में पानी की तरह रुपये बहाने के बाद  भी  एक बड़ी संख्या में गरीब शौचालय की सुविधा से वंचित हैं. यहां यह बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन को धरातल पर उतारने से पहले वर्ष 2012 में एक सर्वेक्षण कराया गया. इस सर्वे में पाया गया कि कुशीनगर जिले में लगभग 4 लाख लोग ऐसे हैं जिनके घरों में शौचालय नहीं है. प्राप्त आंकडों के आधार पर ही शौचालय के लिये पात्र लोगों की एक सूची बनाई गई.जिला पंचायतराज अधिकारी राघवेंद्र द्विवेदी के मुताबिक, इसी सूची के आधार पर ही लाभार्थियों को शौचालय का लाभ दिया गया है. तो फिर सवाल उठता है कि तमाम गांवों के गरीब शौचालय के लाभ से वंचित कैसे रह गये ? कायदन तो सूची में गरीबों का नाम पहले होना चाहिए. परंतु ऐसा है नहीं. दरअसल सूची बनाने से लेकर गरीबों को शौचालय बनवाने के लिये धन देने तक में केवल और केवल मनमानी की गई.  एक बड़े उद्देश्य को लेकर शुरू किये गये  स्वच्छ भारत मिशन को जिम्मदारों ने दुधारू गाय बना डाला . इसका हश्र यह  हुआ कि जनपद में तकरीबन 5 अरब रुपये खर्च होने के बाद भी हजारों जरूरतमंद शौचालय निर्माण हेतु धन पाने से वंचित रह गये. शौचालय लाभार्थियों की सूची ही इस बात की गवाह है कि रेवड़ी की तरह उन लोगों को भी शौचालय का लाभ दे दिया गया जिनके घर में पहले से शौचालय मौजूद था और वे पैसे वाले भी हैं.
 कुशीनगर जनपद के गांव जंगल जगदीशपुर टोला भरपटिया की बहुओं द्वारा बगावत का झंडा उठाने  के बाद उनके ससुराल में तो शौचालय बन जायेगा, लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि स्वच्छ भारत मिशन में व्याप्त भ्रष्टाचार का क्या होगा ? क्या इस गांव की बहुओं को शौचालय मिलने से समस्या का निदान हो जायेगा ?  भरपटिया जैसे कुशीनगर जिले में तमाम गांव है जहां की बहुयें इस समस्या से जुझ रहीं हैं. इज्जत घर के अभाव में उनकी रोज इज्जत तार- तार हो रही है .  एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सरकारी योजनाओं का वाजिब लाभ लेने के लिये आम आदमी के पास केवल विरोध का ही रास्ता बजा है ?


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