बदलता जा रहा है गोवा

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बदलता जा रहा है गोवा

अंबरीश कुमार
करीब तीस साल की रेडियो टैक्सी ड्राइवर मरिया ने जब गोवा के मीरमार स्थित सरकारी पर्यटन रिसार्ट से डाबोलिम एयरपोर्ट पर छोड़ा तो सभी ने चैन की सांस ली .इतनी तेज रफ़्तार से तो किसी पुरुष टैक्सी वाले को कार चलाते नहीं देखा .पूछने पर मरिया का जवाब था ,सर मुझे लौटकर फ़ौरन कलंगूट रेजीडेंसी से एक गेस्ट को एयरपोर्ट ले जाना है. हर ट्रिप से हमारा कमीशन भी बढ़ता है. इसलिए कुछ तेज चला रही थी . मीरमार से डाबोलिम एयरपोर्ट की दूरी तीस किलोमीटर है. हमें उसने करीब चालीस मिनट में पहुंचा दिया था .साथ में गोवा की बदलती संस्कृति के बारे में बताते हुए .कोकम ,जामुन ,नारियल और
मछली के तरह-तरह के व्यंजन के बारे में भी बताती जा रही थी . इस साल अप्रैल का अंतिम हफ्ता गोवा के समुद्र तटों पर गुजरा .गये थे विवाह के पच्चीस साल पूरे होने पर .इन पच्चीस सालों में गोवा कई बार जाना हुआ. पणजी की गलियां याद है तो वेगाटार से लेकर कोलवा और मीरमार के समुद्र तट की बहुत सी शाम भी. तब गोवा एक गांव लगता था. अब यह स्मार्ट सिटी बन गया है. तब बेतिम से आगे जो पतली-पतली सर्पीली सड़कें थी. अब ये फोर लेन में बदल चुकी है. दोनों तरफ भव्य होटल माल और आलीशान भवन .पुर्तगाली वास्तुशिल्प अब पुराने गोवा या गांवों में सिमटता जा रहा है .पर्यटन गोवा का मुख्य व्यवसाय है. गोवा के पर्यटन विभाग ने नब्बे के दशक में बहुत अच्छी सुविधाएं सैलानियों को दी थी और वह भी कम दाम में .अब सुविधायें तो हैं पर उच्च वर्ग के सैलानियों के लिए ज्यादा. खैर शहर का मिजाज सभी जगह बदला है तो गोवा क्यों न बदले. हमने इसीलिए गांवो  से लगे पुराने समुद्र तट का रुख किया और सुबह-शाम इन्हें निहारा.
 आज सुबह तो कलंगूट से बागा समुद्र तट तक पैदल ही चले .खूब बादल उमड़ रहे थे और बूंदें भी पड़ीं पर भीगे नहीं. कई जोड़े हाथों में हाथ डाले लहरों के साथ चल रहे थे. रात में गुलजार रहने वाले
झोपड़ीनुमा रेस्तरां अभी बंद थे. मेज पर मेज लदी थी तो कुर्सियों के ढेर पड़े थे. कुछ बैरा उठ गये थे तो कुछ उठ रहे थे. आस पास कुत्तों के झुंड समुद्र से आईं मछलियों पर जुटे हुए थे. मौसम काफी खुशनुमा था. सामने पहाड़ी के ऊपर बादल काले हो रहे थे. नीचे समुद्र का शोर बढ़ रहा था .पर इस बार बहुत ज्यादा बदलाव दिखा .वह गोवा जो दो दशक पहले तक एक गांव कस्बे या छोटे शहरों जैसा था. वह अत्याधुनिक शहर में बदलता जा रहा था .पर इससे भ्रमित न हों गोवा एक प्रदेश है जो मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण गोवा में बंटा है. इसमें कई शहर है .पर राजधानी पणजी ही किसी बड़े नगर जैसी दिखती है .पणजी के बाजार में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया है. पुराने चर्च और भवन बरकरार हैं .कुछ नये माल और रेस्तरां जरूर खुल गये हैं. पर व्यंजनों का स्वाद पुराना ही है. उतर भारत के लोग जब दक्षिण में आकर जब उत्तर का खानपान तलाशते है तो उन्हें शेरे पंजाब होटल का पता बता दिया जाता है. जो पणजी के बाजार में है .हालांकि ज्यादातर पांच सितारा होटल और रिसार्ट उत्तर भारतीय व्यंजन परोसते हैं. पर वह मध्य वर्ग की पहुंच से बाहर होता है. मझोले होटल और रिसार्ट में भी कुछ उत्तर भारतीय व्यंजन मिल जाते हैं. अरब सागर तट पर स्थित कलंगूट रेजीडेंसी में सुबह के समय यह दिखा भी.पास पड़ोस में ठहरे उत्तर भारतीय परिवार बुफे व्यवस्था में दिये जा रहे
नाश्ते में आलू के पराठे और पूड़ी भाजी वाले स्टाल पर कतार लगाये हुये थे. अन्य सैलानी दक्षिण भारतीय से लेकर कांटिनेंटल नाश्ता कर रहे थे. गोवा के पर्यटन विभाग का फोकस भी अब मध्य वर्ग की बजाय अभिजात्य वर्ग की तरफ हो चुका है .वर्ना इसी रिसार्ट के सामने के रेस्तरां में दाल, चावल और आम सब्जियां खाने के मीनू से गायब नहीं होती और उनकी जगह इटैलियन से लेकर फ्रांसीसी व्यंजन प्रमुखता पर नहीं होते .

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