हिंदी अखबारों में हिंदू राष्ट्र का उत्सव !

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला, एक रुके हुए फैसले का इंतजार नीतीश कुमार का पलड़ा भारी है क्या ? डिजिटल इंडिया का नारा पर आधी आबादी अब भी दूर पत्रकार ने पत्रकार को पीटा चिराग पासवान की जिद से कहीं बिगड़ न जाए एनडीए का खेल चिराग पासवान की जिद से कहीं बिगड़ न जाए एनडीए का खेल शंकर गुहा नियोगी को भी याद करें नौकरी छीन रही है सरकार मौसम बदल रहा है ,खाने का जरुर ध्यान रखें किसान विरोधी कानून रद्द करने की मांग की क्या बिहार में सत्ता के लिए लोगों की जान से खेल रही है सरकार कांकेर ने जो घंटी बजाई है ,क्या भूपेश बघेल ने सुना उसे ? क्या मुग़ल काल भारत की गुलामी का दौर था? अधर में लटक गए छात्र पत्रकारों के बीमा का दायरा बढ़ाए सरकार बिहार चुनाव से दूर जाता सुशांत का मुद्दा सड़क पर उतरे ऐक्टू व ट्रेड यूनियन नेता किसानों के प्रतिरोध की आवाज दूर और देर तक सुनाई देगी क्या मोदी के वोटर तक आपकी बात पहुंच रही है .... खेती को तबाह कर देगा कृषि विधेयक- मजदूर किसान मंच

हिंदी अखबारों में हिंदू राष्ट्र का उत्सव !

राजेंद्र तिवारी
पांच और छह अगस्त के हिंदी अखबार उत्सव मनाते हुए नजर आये और अंग्रेजी अखबार सामान्य दिनों की तरह. इन दोनों दिनों के हिंदी अखबार पढ़कर यह लग ही नहीं रहा कि देश के एक राज्य के लोगों के नागरिक व संवैधानिक अधिकारों पर एक साल से तालाबंदी चल रही है और इसे लेकर लगातार झूठ बोला जा रहा है. हिंदी अखबार रामचरित मानस की चौपाइयां गा रहे हैं और दीवाली मना रहे हैं. इनको देखकर कोई यह समझ ही नहीं सकता कि ये उस देश के अखबार हैं जो कोरोना संक्रमण रोज नये रिकॉर्ड बना रहा है, जहां पिछले पांच महीने में 10 करोड़ लोगों का रोजी-रोटी छिन चुकी है, अर्थव्यवस्था औंधे मुंह है, जिसके एक प्रदेश के लोगों के नागरिक व संवैधानिक अधिकारों पर सरकारी तालाबंदी है  और पड़ोसी देश ने जिसके क्षेत्र में कब्जा जमा रखा है.
5 अगस्त के तमाम हिंदी अखबारों के पहले पेज को देखिए. इस पर एक बड़े बदलाव की आहट झलकती नजर आएगी और ऐसा लगेगा जैसे पूरा देश इस नये बदलाव के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछाए खड़ा है. प्रभात खबर के पहले पेज पर भगवान रामचंद्र के भव्य चित्र का जैकेट है. हेडिंग है ‘निर्बल के बल राम’. साथ में  वंदना लगाई गयी है -  श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन…... और दिया गया है प्रधानमंत्री मोदी का मिनट टू मिनट कार्यक्रम. मानो भगवान श्रीराम खुद पधार रहे हों. पेज ३ पर अयोध्या का भव्यफोटो मास्टहेड से. इस पर चौपाई के साथ हेडिंग ‘सजा राम का धाम’. 5 अगस्त के दैनिक जागरण का भी पहला पेज पोस्टर है. इसमें मंदिर के मॉडल पर भगवान राम का धनुष बाण लिये चित्र लगाया गया है और हेडिंग है ‘श्रीराम’. इस पेज पर बाबरी विध्वंश के समय उप्र में मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह का आलेख है - अयोध्या में नये युग के सूत्रपात की तैयारी. साथ ही साध्वी ऋतंभरा का भी एक आलेख है - लोकभावना की संजीवनी है भगवान श्रीराम. प्रधानमंत्री का मिनट टू मिनट कार्यक्रम यहां भी दिया गया है. पूरा अखबार राममय है. संपादकीय का हेडिंग है ‘राष्ट्रीय अभिलाषा का उत्सव’. पत्रिका ने पहले पेज पर हेडिंग लगाई है - देश के मस्तक से हृदय तक रामराज. और इसके ऊपर लगाई गई है  रामचरितमानस की एक चौपाई. हिंदुस्तान के पहले पेज पर विज्ञापन है लेकिन पेज ३ पर उसने भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. मास्ट से प्रस्तावित राम मंदिर के मॉडल की तस्वीर है और हेडिंग है - अयोध्या में 492 साल बाद इतिहास की करवट. हेडिंग के ऊपर यहां बाल्मीकि रामायण से लिया गया एक श्लोक लिखा है. अखबार के हर पेज पर मंदिर हेडर में भी है. दूसरे हिंदी अखबारों में कमोबेश यही स्थिति है. दूसरी तरफ अंग्रेजी अखबारों ने इसे एक सामान्य खबर की तरह प्रमुखता से दिया है.
आइये अब देखते हैं 6 अगस्त के अखबार. इस दिन भी अंग्रेजी अखबारों ने रुटीन लीड खबर के तौर पर इसे पहले पेज पर लगाया है. ये अखबार उत्सव मनाते नजर नहीं आए. इसके विपरीत अधिकतर हिंदी अखबारों ने इस तरह कवरेज दी है जैसे देश को आजादी मिल रही हो. दैनिक जागरण (ऱाष्ट्रीय) का पहला पेज पूरी तरह राम मंदिर पर केंद्रित है. मास्ट से फोटो लगाई और हेडिंग दिया - राम काज कीन्हे बिना मोहि कहां विश्राम. और नीचे दंडवत मोदी जी की बड़ी फोटो लगी है. एडिट पेज पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का लीडर आलेख है - भारत के निर्माण का शुभारंभ. कुल मिलाकर ध्वनि यह है कि अब तक भारत बेड़ियों में था, अब उसका निर्माण शुरू हो रहा है. अमर उजाला (दिल्ली) ने भी पहले पेज अयोध्या का उत्सव मनाया है. ‘अयोध्या में इतिहास’ शीर्षक से लिखे संपादकीय में अखबार ने घोषित किया है कि भव्य राम मंदिर के निर्माण के जरिये समरस भारत के निर्माण का सपना भी पूरा होगा. चंडीगढ़ के दैनिक ट्रिब्यून ने भी पूरा पहला पेज अयोध्या केंद्रित ही रखा है लेकिन शीर्षक में यह अखबार लहालोट नहीं हुआ. अपनी संपादकीय में दैनिक ट्रिब्यून ने जरूरी सलाहें दी हैं.राजस्थान पत्रिका ने पहले पेज पर संयम दिखाया. संपादकीय पेज पर प्रधानमंत्री मोदी का आलेख लीडर है - राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम. प्रभात खबर ने पहले पेज पर खासी पच्चीकारी की है और अंदर के पन्नों तक खूब उत्सव मनाया. पहले पेज पर सबसे कम स्पेस देने वाले नवभारत टाइम्स (मुंबई) ने भी हेडिंग में दीवाली ही मनाई और साथ में यह सूचना भी कि 492 साल बाद यह शुभ घड़ी आई. संपादकीय में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के दम की घोषणा की गई है. हिंदी अखबार पढ़कर कुल मिलाकर आपको यह लगेगा कि पूरे देश में एक जबरदस्त बदलाव आ रहा है और बहुसंख्यकवाद की तरफ देश बढ़ रहा है. इसमें बाद वाली बात तो सही है लेकिन पहले वाली सिरे से गलत. दरअसल, हम हिंदी पट्टी के लोग हिंदी पट्टी को ही देश मानकर चलते हैं.
अंगरेजी अखबार देखिए तो अधिकतर में उत्सव जैसी चीज नजर नहीं आएगी लेकिन ध्वनित वही सब हो रहा है जो हिंदी अखबारों में भोंपू लगाकर कहा जा रहा है. कुछ अखबारों ने तो अपनी प्रस्तुति के जरिये पहले पेज पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. कोलकाता का द टेलीग्राफ विशेष रूप से उल्लेखनीय है. इसने वही सब कहा है लेकिन सवाल के रूप में जो हिंदी अखबार लहालोट होकर कह रहे हैं. टेलीग्राफ की हेडिंग है -  द बुक दैट बेगिंस विद वी, द पीपुल ऑफ इंडिया, इज द गॉड दैट वी फेल्ड. साथ में प्रधानमंत्री पद की शपथ,  जो मोदी जी ने 30 मई 2019 को ली थी. और इसके नीचे अयोध्या में मोदी जी के भाषण का अंश. मुख्य कॉपी लिखी है संकर्षण ठाकुर ने. इसका पहला वाक्य ही सबकुछ कह देता है. पहला वाक्य है - राष्ट्र बुधवार को अयोध्या में चर्च और ऱाज्य - ऋषि और राजा - के विलय अनुष्ठान का साक्षी रहा जब संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष राज्य (स्टेट) के निर्वाचित प्रधानमंत्री मोदी ने वस्तुत: महंत के रूप में राम मंदिर के भूमि पूजन अनुष्ठान को संपन्न किया और पूरे भारत को राममय घोषित किया. पूरी कॉपी पढ़ने योग्य है. इसे टेलीग्राफ के ईपेपर पर पढ़ा जा सकता है. यह मुफ्त है. पत्रकारिता तो सवाल ही खड़ी करती है, बाकी सब तो विज्ञापन या सहकार्यता है.

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