पीएम का विज्ञापन क्यों ?

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पीएम का विज्ञापन क्यों ?

चंचल 

 मर्यादा , गरिमा , मान , आचरण , वगैरह अनेक शब्द हैं , जो अब निरर्थक लगने लगे हैं .देश का प्रधानमंत्री  खुले आम  बिक जा रहा है और उनका कार्यालय ,  समूचा तंत्र , तमाम गुप्त एजेंसियां हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं उन्हें कुछ सूझता नही .इस तंत्र में जहां हम है नरेंद्र ,दामोदर दास मोदी दो हैं एक-  प्रधानमंत्री .वे प्रधानमंत्री न संघ के हैं न ही भाजपा के , इन संगठनों के सदस्य हो सकते हैं लेकिन,  हैं देश के प्रधान मंत्री .उस देश मे वैचारिक रूप से विरोध करने वाले लोग भी शामिल हैं .हम इसी विरोध वाले में हैं । 

  प्रधानमंत्री विज्ञापन के मॉडल बने यह ग्राह्यता का सवाल है लेकिन विज्ञापन का विषय या उसका उत्पाद क्या है ? किसी ओहदे के लिए यह सबसे बड़ा सवाल है .अब अनेकों उदाहरण आ चुके हैं जब प्रधानमंत्री को विज्ञापन में तस्वीर के तौर पर विज्ञापित किया गया .यह तब और निंदनीय हो जाता है जब उस उत्पाद का फल आमजन को न मिलकर किसी व्यक्ति विशेष या  संस्था विशेष को मिले .

अभी एक बड़ी खबर बड़े आहिस्ता से निकली और खो  गयी .खादी एक स्वायत्त संस्था है भारत की शान है .सरकारी उपक्रम है .उसका अपना लोगो है , सिंबल है ट्रेडमार्क है अगर कोई इसका गलत इस्तेमाल करता है और इसके नाम का मुनाफा कमाता है तो यह बड़ा अपराध है .धोखा है .सच तो यह है कि यह देश द्रोह की श्रेणी में आता है .करोना काल मे जब देश महामारी से गुजर रहा है ऐसे में कफ़नखसोट अपनी बेहूदा हरकत से भी नही बाज आ रहे .खादी के  बैनर तले लम्बा मुनाफा कमाया गया , क्यों कि खादी की विश्वसनीयता अन्य विभागों से बहुत ज्यादा है .खादी का मास्क बना , नरेंद्र मोदी का चित्र लगा मास्क बाजार में उतरा .   जब खादी को इस बात की जानकारी हुई तो उसने ट्वीट कर इसका विरोध किया .क्या इतने से ही बात खत्म हो गयी ? कई वाजिब सवाल हैं 

 - क्या प्रधानमंत्री से इसकी अनुमति ली गयी कि उस मास्क पर मोदी जी तस्वीर छापी जाय ? यदि नही तो - प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर कानूनी कार्यवाही क्यों नही की ? 

 - खादी द्वारा ट्वीटर पर दिए गए बयान को गृह मंत्रालय और छोटेउद्योग मंत्रालय ने जिसके अधीन खादी आता है ने चुप्पी क्यों साधी हुई है ? 

 - खादी  ने पुलिस में इसपर क्यो.नही मुकदमा दर्ज कराया ? 

 यह किसका गोरखधंधा है जिसने एक झटके में करोड़ो कमा गया ?

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