जनादेश

जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें जांच के नामपर लीपापोती तो नहीं ? पीएफ घोटाले में बचाने और फंसाने का खेल ? कश्मीर के बाद नगालैंड की बारी ? गोंडा जंक्शन ! कभी इस डाक बंगला में भी तो रुके ! बिकाऊ है चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन,खरीदेंगे ? झटका तो यूपी बिहार में भी लग गया !

इमरजेंसी में भी अखबार पर प्रतिबन्ध नहीं था -उर्मिलेश

नई दिल्ली .इन्टरनेट और टेलीफोन सुविधा पर रोक के चलते जम्मू कश्मीर में समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के न चलने पर मंगलवार को यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में सम्पन्न सभा में देश के जाने माने पत्रकारों ने चिन्ता व्यक्त की. पत्रकारों ने कहा कि ऐसा आजाद भारत में पहली बार हुआ है बीते  पांच अगस्त से जम्मू कश्मीर से एक भी समाचार किसी न्यूज एजेंसी के पास नहीं आ सका है. वहां अखबारों के न छपने के चलते जम्मू कश्मीर और लद्दाख सूचनाओं के स्तर पर पूरे देश और दुनिया से कट गया है.

देश को भी यह नहीं मालूम कि वहां क्या हो रहा है। सरकार जो सूचनाएं दे रही है वह सूचनाएं भ्रामक हैं.वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा कि इमरजेंसी में भी अख़बार के छापने पर प्रतिबंध नहीं था . वक्ताओं ने सवाल किया कि जब सब कुछ वहां ठीक है तो पत्रकारों को वहां जाने क्यों नहीं दिया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में मीडिया की आजादी पर रोक विषय पर परिचर्चा का आयोजन एडिटर्स गिल्ड, प्रेस एसोसिएशन, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन प्रेस कॉर्प ने संयुक्त रूप से किया।प्रेस असोसिएशन के अध्यक्ष जयशंकर गुप्त ने सभा की अध्यक्षता की.

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