जनादेश

बाबा रामदेव का ट्विटर पर क्यों हुआ विरोध ? जेएनयू के छात्र यूं नहीं सड़क पर हैं गुदड़ी के लाल थे वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई ध्यान से देखिये ,ये फोटो देश के महान गणितज्ञ की है ! नेपाल में शुरू हुआ चीन का विरोध जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें

ट्रैफिक एक्ट को लेकर गडकरी अपनों के निशाने पर !

शिशिर सोनी

नई दिल्ली . नया संशोधित यातायात कानून  भाजपा  की अंतर्कलह  को सतह पे लायेगा . इसमें कई का चलान कटेगा. कई बाप बाप करेंगे. इसकी शुरुआत हो चुकी है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और परिवहन मंत्री नितीन गडकरी  के बीच सौहार्द नहीं है. अब ये खुल के सामने आ रहा है. जिस तरह से नए ट्रैफिक रूल्स को गुजरात सरकार ने रद्दी की टोकरी में डाल कर गडकरी  को बैकफुट पर धकेला है, अन्य राज्य सरकारों के लिए वैसा ही करने को उकसाया है, ये साफ -साफ इशारा कर रहा है भाजपा के ‘अंदर आल इज नॉट वेल!

भाजपा के खास वर्ग के समर्थन से गडकरी पर अलोकप्रिय, गैर जनतांत्रिक कानून बनाने का ठीकरा फोडऩे से पहले देश भर में नए परिवहन कानून के खिलाफ माहौल बनाने में ऐसा ‘होम’ किया जाएगा कि गडकरी शरणागत हो जाएं! गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने क्या बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्वास में लिए केंद्र के नये परिवहन कानून को पलटने का फैसला किया होगा? ना, कतई नहीं. ऐसा संभव ही नहीं है. सब जानते हैं रुपाणी वहां खड़ाऊ सरकार चला रहे हैं.


तो फिर अपनी ही केंद्र सरकार के बनाए कानून को रुपाणी सरकार ने क्यों फुस्स कर दिया? क्या वे पीएमओ द्वारा बनाए गए किसी कानून पर ऐसी ही तल्ख प्रतिक्रिया देने की हिम्मत करेंगे? सवाल ही नहीं. तो फिर इस कानून को संशोधित कर उसे भोथरा बनाने का आशीर्वाद उन्हें किसने दिया? क्यों दिया?भाजपा के पूर्व अध्यक्ष, पार्टी के वरिष्ठतम नेता महाराष्ट्र के नितीन गडकरी को महाराष्ट्र की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि बेहद जूनियर परिवहन मंत्री दिवाकर रावते पत्र लिखकर नए कानून पर उन्हें पुनर्विचार की नसीहत दे रहे हैं, क्या ये सब सामान्य बातें हैं? नहीं, बिल्कुल नहीं. गडकरी की घेराबंदी  की जा रही है, ताकि वे मोदी और अमित शाह के बीच किसी भी परिस्थिति में शहंशाह बन कर न उभरें.

राजनीति संभावनाओं का खेल है. कल, आज और कल की भाजपा के अंदर लक्षमण रेखा खींची जा रही है.गडकरी  पर ‘नागपुर’ की असीम कृपा है. उस कृपा को पहले उन्हीं के मोहरों से मात देकर ‘कुदृष्टि’ में बदलने की कोशिश है. संघ की नजर में उन्हें सियासी खलनायक बनाने की जुगत है. बहाना होगा- गडकरी  के नए परिवहन कानून के जन विरोध के कारण भाजपा को हो रहा नुकसान.गडकरी ‘अपनों’ की घेराबंदी  का ये खेल भांप गए हैं इसलिए पूरी आक्रामकता के साथ नये कानून के पक्ष में वकालत कर रहे हैं. संसद में कानून पास कराने के वक्त कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने नये कानून को मिलकर पास कराया अब विरोध का नाटक कर राजनीतिक फायदा उठाने के फिराक में हैं. इनके नेताओं को आम जनता पकड़े. उनसे सवाल पूछे, संसद में समर्थन, सड़क पर विरोध, ये कैसा दोगलापन है?

नए कानून का देश की अधिसंख्य आबादी स्वागत कर रही है. इससे ट्रैफिक नॉनसेंस खत्म होगा. सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. आखिर नया कानून हमारी सुरक्षा के लिए ही है. सड़क हादसे में मर रहे आम लोगों की लाशों पर इस तरह की ओछी राजनीति करने वालों का मुखौटा नोचा जाना चाहिए.(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, उनकी फेसबुक वॉल से साभार)

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