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तो दिग्विजय चला रहें हैं सरकार !

पूजा सिंह

भोपाल. कांग्रेस को मध्य प्रदेश में सत्ता में आये अभी आठ महीने ही हुए हैं और पार्टी का आंतरिक कलह खुल कर सामने आ गया है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और वन मंत्री उमंग सिंघार के बीच हुए विवाद के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी की खबरें पार्टी के बारे में कोई अच्छी छवि नहीं बना रहीं.

सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं. ऐसा सोचने वाले सिंघार अकेले नहीं हैं बल्कि कई विधायकों और मंत्रियों को ऐसा लगता है. मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि उनकी सरकार दिग्विजय सिंह के अनुभव का लाभ लेती है.

बहरहाल, ताजा विवाद तब शुरु हुआ जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर चयन की कवायद शुरू हुई. अभी यह पद मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास है लेकिन पार्टी में इसके कई दावेदार हैं. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा आदिवासी नेता सिंघार भी इसकी दावेदारी कर रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया इस पद पर इसलिए आना चाहते हैं ताकि पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकें.


राजनीतिक विश्लेषक साजी थॉमस कहते हैं कि सिंधिया खुद को मन ही मन मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते हैं. विधानसभा चुनाव जीतने में उनकी जबरदस्त भूमिका को नकारा भी नहीं जा सकता है. यही कारण है कि उनको अब भी यह उम्मीद है कि अगर किसी वजह से कमलनाथ की कुर्सी खतरे में पड़ी तो उन्हें प्रदेश की गद्दी पर बैठने का मौका मिल सकता है. उधर, कमलनाथ दिग्विजय और सिंधिया समर्थक विधायकों के बीच संतुलन साधने का प्रयास लगातार कर रहे हैं लेकिन उनको इसमें कामयाबी नहीं मिल सकी है. उधर, भाजपा भी इन घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है. सिंधिया के अलावा सिंघार को भी राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. उन्होंने जिस तरह खुलकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ बयानबाजी की उसके बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न होना यह बताता है कि उन्हें ऊपर से अभयदान मिला हुआ है.

प्रदेश में अगले वर्ष राज्यसभा की तीन सीटों पर भी चुनाव होने हैं और कुछ जानकार इस पूरे झगड़े को उससे भी जोड़कर देखते हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख पद की लड़ाई दिलचस्प होती नजर आ रही है. 

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